हमारे बारे में

चौथा अक्षर समाचार पत्र 1998 में भारत के लिए समाचार पत्रों के पंजीकरण (भारत के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का मुद्रण और प्रकाशन प्रेस और पंजीकरण अधिनियम, 1867 और अखबारों के पंजीकरण (केंद्रीय) नियम, 1956 द्वारा नियंत्रित किया जाता है।) के साथ पंजीकृत है। जिसका पंजीकरण क्रमांक 72871 / DELHIN1998 / 00314 दिल्ली दिनांक 15/2/2000 है और शीर्षक कोड DELHIN08804 है।
चौथा अक्षर हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन यथाशीघ्र अब बहुउद्देशीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र ” चौथा अक्षर हिंदी दैनिक ” के रूप में होने जा रहा है , जिसका प्रकाशन चौथा अक्षर की अपनी सहयोगी कम्पनी चौथा अक्षर मास मीडिया कम्युनिकेशंस (प्राइवेट लिमिटेड) के अंतर्गत किया जाना तय किया गया है। सहयोगी कंपनी चौथा अक्षर मास मीडिया कम्युनिकेशंस (प्राइवेट लिमिटेड) एक कंपनी के रूप में वर्ष 2008 में भारतीय कंपनी अधिनियम 1956 के तहत दिल्ली की कंपनियों के रजिस्ट्रार के साथ पंजीकृत कंपनी है।
सहयोगी कंपनी के पहले निदेशक पहली पीढ़ी के टेक्नोक्रेट हैं और कई विभिन्न परियोजनाओं और क्षेत्रों में संलग्न हैं और समाचार पत्र प्रकाशन की दृष्टि से प्रिंट मीडिया में पूरी तरह से योग्य और अनुभवी हैं।

हमारा उद्देश्य
हमारा उद्देश्य राष्ट्र के लिए,राष्ट्र की भाषा में राष्ट्र को समर्पित,एक ऐसे समाचार पत्र को प्रकाशित करना है, जो गांव की तस्वीर को सत्ता के गलियारे में उसकी वास्तविकता से अवगत करा सके। वास्तव में वातानुकूलित कमरों में बैठकर गाँव के विकास की जो योजनाएँ सरकार द्वारा बनाई जाती हैं वो सारी योजनायें अव्वल तो गांव के जो हमारे अन्नदाता हैं उन तक पहुंच ही नहीं पातीं और अगर पहुंचती भी हैं तो आधी अधूरी । हमारे ग्रामीणों को लगता है कि जिन प्रतिनिधियों को उन्होंने चुना है और चुनकर संसद में भेजा है, वे उनके हित के बारे में बात करेंगे, लेकिन अफसोस की बात है कि वे सत्ता के गलियारे में पहुंचते ही गांवगिरांव के अन्नदाताओं को भूल जाते हैं। हमारा उद्देश्य सत्ता के गलियारों में बैठे सत्ता के दलालों को सच का आईना दिखाना है। आज हमारे देश की पत्रकारिता अपने उद्देश्यों को लगभग भूल चुकी है, ऐसे में हमारे लिए अपनी मंजिल तक पहुंचना मुश्किल तो है लेकिन असंभव नहीं । हम देश और दुनिया के अंतिम लोगों, जो वंचित,उपेक्षित और शोषित हैं उनकी आवाज बनना चाहते हैं लक्ष्य बड़ा है,रास्ता कठिन है,ऊबड़-खाबड़ है,संकरा है और पगडंडियों से भरा है, मंजिल दूर है और रास्ता लंबा ह ै। हम सत्ता नहीं सच्चाई के साथ हैं, फिर वह सच किसी के खिलाफ क्यों न हो। हमें आपके समर्थन और प्रोत्साहन की जरूरत है और यही हमारी ताकत है।

आपका
श्याम लाल शर्मा
(प्रबंध संपादक)
चौथा अक्षर हिन्दी दैनिक

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