नई दिल्ली: अंडमान-निकोबार बेसिन को लंबे समय तक ‘नो-गो’ क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में लागू हुई नई ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) ने लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर के इस क्षेत्र को खोज के लिए खोल दिया है। यह क्षेत्र भारत के सबसे संभावनाशील लेकिन अब तक कम खोजे गए ऑफशोर ऊर्जा स्रोतों में से एक है।
America और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है। भारत की कुल तेल जरूरत का लगभग 85% और गैस जरूरत का करीब 70% हम विदेशों से आयात करते हैं। ऐसे समय में आपूर्ति में कोई रुकावट देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकती है। हाल ही में अंडमान के गहरे पानी में ऐसे संकेत मिले हैं कि यहां तेल और गैस का बड़ा भंडार मौजूद हो सकता है। अगर ये खोज सफल रहती है, तो आने वाले दशकों में यह देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी और खाड़ी देशों पर हमारी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंडमान बेसिन में छिपी यह ऊर्जा संभावना न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि देश को वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक आत्मनिर्भर खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित कर सकती है।






