back to top

एपस्टीन फाइल्स: भारतीय लड़की और न्याय की अधूरी यात्रा

Must Read

अखिलेश अखिल 
यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइल्स केवल एक व्यक्ति की आपराधिक प्रवृत्ति का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि वे उस वैश्विक सत्ता-संरचना की झलक देती हैं, जिसमें पैसा, राजनीति, कूटनीति और कॉरपोरेट हित मिलकर नैतिकता को बार-बार रौंदते रहे हैं। इन फाइल्स में एक भारतीय लड़की के पीड़ित होने का संकेत और भारत से जुड़े प्रभावशाली नामों का उल्लेख, भारतीय लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था और मीडिया की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह मामला केवल अमेरिका का नहीं है। यह उस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का मामला है, जहां ताकतवर लोग वर्षों तक एक ज्ञात यौन अपराधी के संपर्क में बने रहे, उससे मिले, उसके निमंत्रण स्वीकार किए, और कई बार उसकी “सेवाओं” पर निर्भर भी दिखाई दिए।

13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत में एक पीड़िता की तलाश का उल्लेख, अपने आप में चौंकाने वाला है। यह दर्शाता है कि एपस्टीन का जाल केवल पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं था। यह तथ्य दो स्तरों पर गंभीर है।पहला, भारत की कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों को अब तक इस संभावित पीड़िता के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी क्यों नहीं है?दूसरा, क्या भारत सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों से इस संबंध में कोई औपचारिक संवाद किया?
यदि एक भारतीय नागरिक यौन तस्करी और शोषण का शिकार हुई, तो यह भारत के लिए केवल “विदेशी मामला” नहीं रह जाता, बल्कि राष्ट्रीय गरिमा और नागरिक सुरक्षा का प्रश्न बन जाता है।
नई फाइल्स में हर्ष वर्धन, हरदीप सिंह पुरी और दिलीप चेरियन जैसे नामों का उल्लेख होना यह साबित नहीं करता कि वे अपराध में शामिल थे। लेकिन यह अवश्य दिखाता है कि एपस्टीन जैसे व्यक्ति की भारतीय सत्ता और कॉरपोरेट नेटवर्क तक पहुंच थी।
यहां असली सवाल यह है कि—जब 2008 में ही एपस्टीन नाबालिग से जुड़े यौन अपराध में दोषी ठहराया जा चुका था, तब भी इतने प्रभावशाली लोग उससे क्यों मिलते रहे?“यह केवल प्रोफेशनल मुलाकात थी” — यह दलील कानूनी रूप से बचाव हो सकती है, लेकिन नैतिक रूप से अपर्याप्त है।लोकतंत्र में केवल अपराध से दूरी काफी नहीं होती, अपराधी से दूरी भी उतनी ही जरूरी होती है।
एपस्टीन और अनिल अंबानी के बीच कथित चैट, जिसमें “लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला” जैसी भाषा का प्रयोग हुआ, उस मानसिकता को उजागर करती है, जहां महिलाएं व्यक्ति नहीं बल्कि मनोरंजन का साधन बन जाती हैं।यह कोई निजी नैतिक कमजोरी भर नहीं है। यह उस कॉरपोरेट-सत्ता संस्कृति का हिस्सा है, जिसमें धन और प्रभाव के साथ “सब कुछ खरीद सकने” का अहंकार जुड़ा होता है।जब ऐसे नाम सामने आते हैं, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या भारत का कॉरपोरेट क्षेत्र कभी अपने नैतिक मानकों की सार्वजनिक समीक्षा करेगा?
एपस्टीन को अक्सर एक “सेक्स अपराधी” के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तविकता में वह एक सिस्टम का चेहरा था।वह लड़कियों की भर्ती करता था। उन्हें अमीर और ताकतवर लोगों तक पहुंचाता था ,बदले में पैसा, प्रभाव और सुरक्षा पाता था। यह सेक्स ट्रैफिकिंग का अंतरराष्ट्रीय मॉडल था, जिसमें अकेला व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा नेटवर्क शामिल था।घिसलीन मैक्सवेल की सजा इस बात की पुष्टि करती है कि एपस्टीन अकेला नहीं था। लेकिन सवाल यह है कि उसके ग्राहकों की सूची आज भी सार्वजनिक क्यों नहीं हुई?
https://youtu.be/7KUicSydycw 

अमेरिका स्वयं को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा पैरोकार बताता है, लेकिन एपस्टीन केस में उसकी भूमिका विरोधाभासी रही है।2008 में एपस्टीन को मिली हल्की सजा, न्यायिक व्यवस्था की विफलता थी।2019 में उसकी संदिग्ध मौत ने कई रहस्यों को हमेशा के लिए दफन कर दिया।यदि वह जीवित रहता और मुकदमा चलता, तो संभवतः दर्जनों बड़े नामों का पर्दाफाश होता।
भारत में इस मामले को अधिकांश मीडिया संस्थानों ने “विदेशी गॉसिप” की तरह ट्रीट किया है।किसी बड़े चैनल पर यह सवाल नहीं उठता कि भारतीय पीड़िता कौन है?सरकार ने क्या कदम उठाए?
क्या किसी भारतीय एजेंसी ने जांच शुरू की?यह चुप्पी केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सत्ता और कॉरपोरेट दबाव का संकेत देती है।
सवाल है कि यह मामला भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?क्योंकि यह केवल एक अपराध कथा नहीं है।यह बताता है कि वैश्विक सत्ता संरचना कैसे काम करती है ,ताकतवर लोग कैसे कानून से ऊपर बने रहते हैंऔर कमजोर लोग कैसे सिस्टम में गुम हो जाते हैं। यदि भारत सच में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, तो उसे इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
एपस्टीन फाइल्स हमें यह याद दिलाती हैं कि यौन शोषण केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सत्ता-संरक्षित उद्योग बन चुका है।भारतीय लड़की का उल्लेख इस कहानी को भारत से जोड़ देता है, और भारत अब यह कहकर बच नहीं सकता कि “यह अमेरिका का मामला है।”
यह भारत की परीक्षा है कि क्या वह अपने नागरिक के लिए खड़ा होगा?क्या वह सत्ता के करीबी नामों से सवाल पूछेगा?या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?इतिहास गवाह है— चुप्पी हमेशा अपराधियों के पक्ष में जाती है।

https://x.com/i/status/2023710221903032714

- Advertisement -spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_img
Latest News

मनरेगा के नाम में प्रस्तावित बदलाव के विरोध में प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा घेराव करने जा रहे कांग्रेसजनों पर...

चौथा अक्षर संवाददाता/लखनऊ उत्तर प्रदेश में आज मनरेगा और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया जिसे...
- Advertisement -spot_imgspot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_imgspot_img