श्याम लाल शर्मा
न पूछ बेशर्मी इस बे-हया सियासत की, गुलों को रौंदकर भी इसे तसल्ली नहीं होती.
दक्षिणी ईरान के मिनाब में स्थित प्राइमरी स्कूल में एक साथ में पढ़ने वाली वो 165 बच्चियां, जो साथ-साथ खेलती थी, अपने सपनों में रंग भरती थी, अब कब्र की ठंडी खामोशी में सो चुकी हैं । शनिवार को इजरायल, अमेरिका के हमले में दक्षिणी ईरान के मिनाब में स्थित प्राइमरी स्कूल (Minab school) में पढ़ने वाली 165 बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई इन सभी बच्चियों के शवों को मंगलवार के दिन भारी भीड़ के बीच बुलडोजर के खोदे गए 165 कब्रों में इन सभी बच्चियों को दफनाया गया ।

बच्चियों के अंतिम संस्कार की जो तस्वीरें-वीडियो सामने आई हैं, उसे इस जंग की सबसे क्रूर तस्वीरें कहा जा रहा है । बुलडोजर से खोदे गए कब्रों में जब इन बच्चियों दफनाया जा रहा था, तब वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थी ।

इन तस्वीरों को देखकर अब पूरी दुनिया की आखें नम हो रही होगी । लोग बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं आखिर इन बच्चों को क्या कसूर था ? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भतीजी मैरी एल ट्रम्प भी इन तस्वीरों को देखकर सन्न रह गई हैं और सवाल उठाया है ।
डोनाल्ड ट्रम्प की भतीजी मैरी एल ट्रम्प ने ईरान के मिनाब स्कूल पर हमले में मारी गई बच्चियों के लिए तैयार की गई कब्रों वाले कब्रिस्तान की तस्वीर की रि-पोस्ट करते हुए लिखा- ‘मैं किसी को भी इसे सही ठहराने की चुनौती देती हूं ‘।
दरअसल ईरान के मिनाब स्कूल में मारी गई 165 बच्चियों की कब्र की तस्वीरें देख पूरी दुनिया सन्न है। ट्रंप की भतीजी ने इस तस्वीर पर चुनौती देते कहा कोई है जो इसे जस्टीफाई करे।
मिनाब के स्कूल पर हुए हमले में मारी गई बच्चियों के लिए खोदी गई कब्रों की तस्वीर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी शेयर की है ।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लिखा, “ये कब्रें उन 160 से ज़्यादा मासूम लड़कियों के लिए खोदी जा रही हैं, जो US-इज़राइली बमबारी में एक प्राइमरी स्कूल में मारी गईं ।
उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए । मिस्टर ट्रंप ने जिस “बचाव” का वादा किया था, असल में वह ऐसा ही दिखता है। गाजा से लेकर मिनाब तक मासूमों की बेरहमी से हत्या की गई”।

इन बच्चियों को दफनाने के लिए खोदी गईं कब्रें एक ही जगह पर बराबर में खोदी गई । कब्रों की संख्या इतनी ज्यादा है कि जगह- जगह लगाए गए निशानों के आधार पर इनको हाथ के बजाय JCB से खोदना पड़ा । ऊंचाई से ली गई इस तस्वीर को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे छोटे-छोटे छेद बनाए गए हैं। लेकिन ये तो बच्चियों को दफनाने के लिए खोदी गई कब्रें हैं। इस तस्वीर को देखकर हर किसी का कलेजा फट उठेगा ।

क्या इजराइल के नरभक्षी नेतन्याहू ने और उसके सरपरस्त अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान के स्कूल की इन छात्राओं की मौत पर दुःख व्यक्त किया …अगर नहीं किया तो पूरी दुनिया को उपरोक्त दोनों का सदैव के लिए बॉयकाट होना चाहिए …स्कूल कालेज जैसी इमारतों पर न तो मिजाइलें गिराई जा सकती हैं और न ही ड्रोन हमले हमले किए जा सकते हैं …?
अमेरिका ने ऐसा अपराध अनेकों बार किया है .ज्ञात रहे कि पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका से यही गुजारिश किया था कि आप हमारे देश के स्कूलों कालेजों अर्थात गैर आतंकी ठिकानों पर आंख बंद करके ड्रोन हमला नहीं कर सकते …इसके अलावा उन्होंने अमेरिका परस्ती को स्वीकार नहीं किया तो लंबे अर्से बाद पाकिस्तान को किसी हद तक सही रास्ते पर लाने की कोशिश करने वाले लीडर को अपने सत्तालोभी पाकिस्तानी कुत्तों से इमरान खान की क्या दुर्गति करा दिया और लोकतंत्र को किस तरह कुचलवा दिया कि इमरान खान की पार्टी को ही अमान्य कर दिया .भारत की सभी पूंजीवादी एवं पूंजीवादी दलाल पार्टियों से बहुत सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि सत्ता के भूखों का कोई चरित्र नहीं होता अर्थात वे नीचता के किसी भी हद तक गिर सकते हैं …?
इजरायल और अमेरिका के ईरान पर संयुक्त हमले को पांच दिन हो गए हैं. इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई तो मारे ही गए. इसके अलावा एक हजार से ज्यादा लोगों की जान इस जंग में अब तक जा चुकी है.
सबसे ज्यादा प्रभावित ईरान है, जहां अब तक 1045 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें वो 165 बच्चियां भी शामिल हैं, जो स्कूल में पढ़ने गई थीं लेकिन मिसाइल हमले में शव बन गईं.
ईरान के बाद सबसे ज्यादा लोग लेबनान में मारे गए. यहां मरने वालों का आंकड़ा 50 बताया जा रहा है. 335 लोग घायल हैं.






