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जब दुनिया जूझ रही थी संकट से, भारत ने श्रीलंका को दिया सहारा

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका ने तेल आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसी बीच भारत ने मानवीय और कूटनीतिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद सप्लाई कर बड़ी राहत दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव चरम पर है और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर गंभीर असर पड़ा है।

जब दुनिया जूझ रही थी संकट से, भारत ने श्रीलंका को दिया सहारा
जब दुनिया जूझ रही थी संकट से, भारत ने श्रीलंका को दिया सहारा

भारत द्वारा दी गई इस सहायता में 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है। यह सप्लाई केवल ईंधन की कमी को दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में भारत की मजबूत कूटनीतिक स्थिति और पड़ोसी देशों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। श्रीलंका, जो पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहा था, इस ऊर्जा संकट के चलते और अधिक दबाव में आ गया था। ऐसे में भारत की यह मदद उसके लिए राहत की सांस लेकर आई है।

ऊर्जा संकट के बीच भारत की रणनीतिक पहल !

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन होता है। इसके बाधित होने से तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में कमी देखी जा रही है।

ऐसे परिदृश्य में भारत ने न केवल अपने घरेलू ऊर्जा संतुलन को संभाला, बल्कि पड़ोसी देश की मदद कर क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान दिया। यह कदम भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति को मजबूत करता है, जिसके तहत भारत अपने पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देता है। श्रीलंका को दी गई यह सहायता यह भी दर्शाती है कि भारत संकट के समय भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारत की यह पहल केवल मानवीय सहायता नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक निर्णय भी है। इससे क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ता है और वह चीन जैसे अन्य प्रभावशाली देशों के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत करता है। ऊर्जा संकट के समय इस तरह की मदद भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने में सहायक होती है।

श्रीलंका के लिए राहत और रिश्तों की मजबूती ?

श्रीलंका लंबे समय से आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि ने उसकी स्थिति को और कठिन बना दिया था। ऐसे में भारत से मिली यह सहायता उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई है। इससे न केवल परिवहन और बिजली उत्पादन जैसे जरूरी क्षेत्रों को राहत मिली, बल्कि आम जनता को भी राहत महसूस हुई। श्रीलंका के नेताओं ने भारत की इस मदद की खुले दिल से सराहना की है। विपक्षी नेता सजिथ प्रेमदासा ने कहा कि असली रिश्तों की पहचान संकट के समय होती है, और भारत ने इस कठिन घड़ी में साथ देकर सच्ची दोस्ती निभाई है। यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग को दर्शाता है।

भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं। इस सहायता ने इन रिश्तों को और गहरा कर दिया है। आने वाले समय में यह सहयोग व्यापार, निवेश और ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर खोल सकता है।

पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच भारत का यह कदम न केवल एक पड़ोसी देश की मदद है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर उसकी जिम्मेदार और संवेदनशील शक्ति की छवि को भी मजबूत करता है। यह दिखाता है कि भारत सिर्फ अपने हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को भी प्राथमिकता देता है। और पढ़े – फिर वही कहानी -डीयू के राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पदों पर  आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को किया गया नॉट फाउंड सूटेबल ( NFS )

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