पी आई बी/ नई दिल्ली
लोक सभा अध्यक्ष ने आज डीपफेक और भ्रामक सूचना से उत्पन्न हो रही चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। इन्हें लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग सत्य और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने के लिए किया जाना चाहिए, न कि तथ्यों को विकृत या दबाने के लिए। उन्होंने लोकतांत्रिक विमर्श को भ्रम और दुष्प्रचार से सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सुदृढ़ सुरक्षा उपाय विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
आज भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के अंतर्गत “एआई फॉर डेमोक्रेसी” पर विशेष सत्र को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि एआई में लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन -केंद्रित बनाने की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का मार्गदर्शक सिद्धांत सदैव “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” रहा है और भारत अपने शाश्वत सभ्यतागत मूल्यों के अंतर्गत वैश्विक कल्याण की भावना के साथ कार्य करता है।
विधायी कार्यप्रणाली में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्लेख करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि एआई लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहा है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि “डिजिटल संसद” जैसी पहलें नागरिकों और संसद के बीच संवाद को सरल बना रही हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में डिजिटल और सूचना डिवाइड को पाट रही हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल संसद पहल के अंतर्गत संसदीय कार्यवाही को कागजरहित, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है। एआई उपकरणों की सहायता से हजारों घंटों की संसदीय बहसों और अभिलेखों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर आसानी से खोजने योग्य और सार्वजनिक रूप से सुलभ बनाया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ती है और नागरिक अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यों की निकटता से निगरानी कर सकते हैं, जिससे जवाबदेही सुदृढ़ होती है।
भारत की भाषाई विविधता का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष ने “संसद भाषिणी” पहल के महत्व को रेखांकित किया, जिसके माध्यम से एआई आधारित अनुवाद उपकरणों की सहायता से संसदीय बहसों को अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है। अब देशभर के नागरिक अपनी भाषा में संसदीय चर्चाओं को समझ और उनसे जुड़ सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास और सहभागिता मजबूत होती है।
लोक सभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर, विशेषकर पीठासीन अधिकारियों की वैश्विक सहभागिताओं के दौरान, लोकतांत्रिक संस्थाओं को आधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़ने के महत्व पर बल दिया गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि विधायी दक्षता के लिए एआई के उपयोग में भारत के नवाचारों की विश्व स्तर पर सराहना की जा रही है। आधुनिक डेटा प्रणालियां सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को बेहतर समझने में सहायता कर रही हैं, जिससे अधिक जन -केंद्रित नीति निर्माण संभव हो रहा है।

श्री बिरला ने कहा कि भारत की एआई रणनीति समावेशी विकास के सिद्धांत पर आधारित है; और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में देश की प्रगति को तीव्र करेगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाकर, स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी प्रणाली को सुदृढ़ कर तथा किसानों को डेटा-आधारित समाधान उपलब्ध कराकर एआई लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन ला सकती है, विशेषकर वंचित और असंगठित क्षेत्रों में। उन्होंने आगे कहा कि भारत की डिजिटल अवसंरचना विश्व के लिए एक उदाहरण बन चुकी है। अपने व्यापक स्वरूप, समावेशिता और दक्षता के कारण भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का वैश्विक स्तर पर अध्ययन और सराहना की जा रही है। उन्होंने दोहराया कि भारत सामूहिक प्रगति के लिए अपने डिजिटल अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

एआई के उपयोग की वकालत करते हुए श्री बिरला ने यह भी चेताया कि प्रौद्योगिकी मानव संवेदनशीलता और नैतिक निर्णय का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहा, “एआई एक साधन है, साध्य नहीं,” और इस बात पर बल दिया कि उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास और उपयोग में मानवीय मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नैतिक मानकों को सर्वोपरि रखना आवश्यक है। उन्होंने ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करने का आह्वान किया जो तकनीकी दक्षता के साथ-साथ करुणा और सुदृढ़ नैतिक आधार से भी संपन्न हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “एआई फॉर डेमोक्रेसी” सत्र में हुए विचार-विमर्श भविष्य के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे, जहां प्रौद्योगिकी और लोकतांत्रिक मूल्य साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि नवाचार और सभ्यतागत मूल्यों का समन्वित समागम वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
कार्यक्रम में यूनाइटेड किंगडम के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री श्री कनिष्क नारायण; हंगरी की संसद के उपाध्यक्ष श्री लाजोस ओलाह; तथा इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (आईपीयू) के महासचिव श्री मार्टिन चुंगोंग सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।






