वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत के ऑयल और गैस सेक्टर का पूरा समीकरण बदल दिया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इस तेजी का असर सबसे ज्यादा देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी , और पर पड़ा है। इन कंपनियों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती लागत के बावजूद वे तुरंत पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ा पा रही हैं। भारत में ईंधन की कीमतें केवल बाजार से नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में कंपनियों के मार्जिन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे उनकी मुनाफाखोरी प्रभावित हो सकती है।
महंगे कच्चे तेल से OMC कंपनियों की बढ़ी परेशानी ?
ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, OMC कंपनियों के लिए ब्रेक-ईवन स्तर 75-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास माना जाता है। लेकिन मौजूदा कीमतें इससे काफी ऊपर चल रही हैं, जिससे कंपनियों के लिए संतुलित मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

पिछले दो-तीन वर्षों में इन कंपनियों ने असामान्य रूप से ऊंचे मार्जिन का लाभ उठाया था, लेकिन अब परिस्थितियां उनके खिलाफ जाती दिख रही हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होती, तो इन कंपनियों को घाटा भी उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि फिलहाल OMC स्टॉक्स में निवेश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
ONGC पर ब्रोकरेज का भरोसा, 65% तक रिटर्न का अनुमान ?
जहां OMC कंपनियां दबाव में हैं, वहीं अपस्ट्रीम सेक्टर की दिग्गज कंपनी (ONGC) इस माहौल में मजबूत नजर आ रही है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा फायदा ONGC जैसी कंपनियों को मिलता है, क्योंकि उनकी आय उत्पादन पर आधारित होती है। ब्रोकरेज फर्म CLSA ने ONGC पर ‘BUY’ रेटिंग को बरकरार रखते हुए इसका टारगेट प्राइस 315 रुपये से बढ़ाकर 405 रुपये कर दिया है। मौजूदा स्तर के मुकाबले यह लगभग 65% तक की संभावित तेजी का संकेत देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें 75-80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाने की संभावना कम है। ऐसे में ONGC की आय और मुनाफा मजबूत रह सकता है। कंपनी की स्थिर लागत और उच्च ऑपरेटिंग लीवरेज इसे इस समय निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।
निवेश के लिए सेक्टर में चयन जरूरी ?
इस समय ऑयल और गैस सेक्टर में निवेश करते वक्त केवल सेक्टर नहीं, बल्कि कंपनी का चुनाव अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। जहां OMC कंपनियां नीति और मूल्य नियंत्रण के दबाव में हैं, वहीं ONGC जैसी कंपनियां वैश्विक कीमतों का सीधा लाभ उठा रही हैं।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे वैश्विक तेल कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाओं और सरकार की नीतियों पर नजर बनाए रखें। सही रणनीति के साथ इस सेक्टर में अभी भी अच्छा रिटर्न कमाया जा सकता है, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी है।






