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पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए असम पुलिस को दिल्ली भेजने का फैसला किसका था

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श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली

असम में 9 अप्रैल को मतदान होना है और वहाँ पर आचार संहिता लागू है आचार संहिता होने के बाद पुलिस-प्रशासन सब चुनाव आयोग के अधीन होता है, लेकिन पवन खेड़ा के एक बयान ने चुनाव से दो दिन पहले बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया। जिसे लेकर असम पुलिस दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पहुंच गई। उनके घर के आसपास पुलिस ने जिस तरह की घेराबंदी की, उसे देखकर ऐसा लगा मानो किसी कुख्यात अपराधी के घर दबिश दी जा रही है। अब यह भाजपा को बताना होगा कि क्या पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को दिल्ली भेजने का फैसला किसका था हिमंता बिस्वासरमा का या फिर यह चुनाव आयोग के निर्देश पर हुआ। पवन खेड़ा गिरफ्तार तो नहीं हुए , लेकिन असम पुलिस ने उनके घर छापा मारा है, जिसमें घर से एक लैपटॉप, एक फोन, दो पेन ड्राइव और एक हॉंगकॉंग डॉलर मिलने की खबर है।

उल्लेखनीय है कि पवन खेड़ा ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वासरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हैं। बस इसी बात को लेकर हिमंता बिस्वा सरमा के अंदर इतनी बौखलाहट आ कि उन्होंने पवन खेड़ा के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह भी विचारणीय है। श्री बिस्वासरमा ने कहा कि पवन खेड़ा को मैं पवन पेड़ा बना दूंगा। हम पवन खेड़ा को पाताल से भी ढूंढ कर पकड़ लेंगे। उनका आरोप है कि पवन खेड़ा गिरफ्तारी से बचने के लिए हैदराबाद भाग गए। वहीं कांग्रेस के अध्यक्ष और देश के वयोवृद्ध नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए भी हिमंता बिस्वासरमा ने यही कहा कि उनकी उम्र हो गई है और वो पागल जैसी बात कर रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस के लोग सब फालतू हैं, राहुल गांधी पागल है और पवन खेड़ा उनसे भी ज्यादा पागल है।

जनता ने हमेशा देखा है कि चुनाव के वक्त विरोधी दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, कई बार मर्यादा लांघकर निजी प्रहार भी होते हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इन्हें सहज स्वीकारा जाए। अगर इस प्रवृत्ति पर सवाल नहीं उठाए गए, तो यह अशिष्टता की यह बीमारी पूरी तरह लाइलाज हो जाएगी। हिमंता बिस्वासरमा ने पहली बार राहुल गांधी या कांग्रेस पर हमला नहीं किया है। जब राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा लेकर असम पहुंचे थे, तो उन्हें वहां रोकने की कोशिश हुई थी और कांग्रेसी नहीं रुके तो राहुल गांधी पर मामला भी दर्ज हुआ था। पिछले कई महीनों से हिमंता बिस्वासरमा गौरव गोगोई और उनकी पत्नी पर पाकिस्तान के लिए काम करने के आरोप भी लगाते रहे हैं। जैसा कि हमने पहले कहा कि विरोधी एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं और इनका जवाब देने का तरीका यही है कि जिन पर आरोप लगे वे उन्हें खारिज करने के लिए अपने तर्क सामने रखें और जिन्होंने आरोप लगाए, वे उनकी पुष्टि के लिए सबूतों को पेश करें। लेकिन हिमंता बिस्वासरमा तो अपने ऊपर लगे आरोपों पर बात करने की जगह सीधे कार्रवाई पर उतर आए हैं। इसमें भी भाजपा का खेल समझ आ गया है।

 कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने इस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं कि जब छापा मारा गया है तो क्या मिला है, उसकी पूरी सूची देनी चाहिए। पेन ड्राइव के अंदर क्या है यह भी बताना चाहिए। क्या भरोसा है कि पुलिस पेन ड्राइव खोलकर इसके अंदर कुछ डाल देगी। जो पुलिस आचार संहिता लगे होने पर मुख्यमंत्री की पुलिस बनकर काम कर रही है, उस पर क्या भरोसा..? बिना गवाह के जिस तरह उन्होंने सब कुछ जब्त किया है उस से ही सारे सबूत संदेहास्पद हो जाते हैं..

ये वाकई गंभीर आरोप हैं और अपनी निष्पक्षता का दावा करने वाले चुनाव आयोग को इस बारे में खुद सफाई पेश करनी चाहिए कि क्या इस पूरी कार्रवाई में उसका हाथ है या फिर खुलकर बदले की  राजनीति की जा रही है। दरअसल हिमंता बिस्वासरमा इस समय इसलिए बौखलाए दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें सत्ता हाथ से निकलती हुई दिख रही है। चुनाव के ठीक पहले उन पर भ्रष्टाचार के न केवल बड़े आरोप पवन खेड़ा ने लगाए, बल्कि रविवार 5 अप्रैल को एक प्रेस कांफ्रेंस कर यह बताया कि हिमंता बिस्वासरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है, फिर भी उनके पास तीन पासपोर्ट कैसे हैं? श्री खेड़ा ने यह भी बताया कि रिंकी भुइयां सरमा की दुबई में दो संपत्तियां हैं और अमेरिका (व्योमिंग) में एक कंपनी है। जिसकी कीमत लगभग 52-53 हजार करोड़ है। उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों का जिक्र हिमंता बिस्वासरमा के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है। पवन खेड़ा ने यह दावा भी किया कि चुनाव के बाद बिस्वासरमा दंपती देश से भाग जाएंगे।

इन आरोपों को मुख्यमंत्री बिस्वासरमा और उनकी पत्नी दोनों ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही पवन खेड़ा पर असम में प्राथमिकी भी दर्ज कराई। ऐसा करना उनका संवैधानिक हक है। लेकिन राज्य की सत्ता पर काबिज होने के कारण श्री बिस्वासरमा की यह जिम्मेदारी भी है कि वे इन आरोपों को गलत साबित करने के लिए पुख्ता सबूत पेश करें और बताएं कि पवन खेड़ा ने जो आरोप लगाए हैं, उन पर यकीन क्यों नहीं करना चाहिए। इसकी जगह अगर वे खड़गेजी जैसे वयोवृद्ध नेता के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करेंगे, नेता प्रतिपक्ष के लिए अभद्रता दिखाएंगे और मर्यादा को त्याग कर अपने विरोधियों को चुनौती देंगे तो इससे संदेह और गाढ़ा होगा कि कहीं कुछ गलत है, जिसे छिपाने की कोशिश हो रही है।

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