मुकेश कुमार/पटना
आज बिहार में नीतीश राज का अंत हो गया, भाजपा अपने मकसद में कामयाब हो गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की सूचना के बीच राज्य की सियासत गरमा गई है। उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में खासी हलचल है। पार्टी में इस मसले पर बगावत के सुर बनते दिख रहे हैं। नीतीश कुमार के सियासी जीवन में सबसे बड़ा उलटफेर हो रहा है. उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने की घोषणा की . उनके इस फैसले से जदयू के नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग नाराज बताया जा रहा है. यहां तक कि सड़कों पर उतरकर वे भाजपा पर धोखा देने, नीतीश के खिलाफ साजिश रचने और ऑपरेशन लोटस चलाकर जदयू को खत्म करनी कोशिश का आरोप लगाकर नारेबाजी भी करते दिखे.
“कुर्सी” बता रही है, कि “कुर्सी” चली गई है
गौरतलब है कि दिल्ली से पटना पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे ही नीतीश कुमार को लेकर मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकले वैसे ही जदयू कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा. ‘अमित शाह मुर्दाबाद… मुर्दाबाद- मुर्दाबाद, नीतीश कुमार होश में आओ… होश में आओ होश में आओ’.. का नारा लगाकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते जदयू कार्यकर्ताओं ने जमकर भाजपा के खिलाफ अपना गुस्सा निकाला. इसके पहले भी भाजपा कोटे से बिहार सरकर में शामिल एक मंत्री को भीड़ ने खदेड़ दिया था.

राज्यसभा चुनाव के लिए एनडीए प्रत्याशी के रूप में जदयू से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर तथा भाजपा की ओर से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, शिवेश कुमार एवं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने नामांकन किया।
नामांकन के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केन्द्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, लोजपा (रामविलास) के सांसद अरूण भारती सहित बिहार सरकार के मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, विधान पार्षदगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।


दरअसल, जदयू के नेताओं और कार्यकर्ताओं एक वर्ग का मानना है कि नीतीश कुमार के खिलाफ भाजपा ने साजिश रची है. जदयू के कुछ शीर्ष नेताओं को मिलाकर नीतीश कुमार को बिहार से दिल्ली भेजकर राज्य की सत्ता भाजपा को देने की योजना बनाई गई. बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नाम पर जीता गया था लेकिन अब भाजपा साजिश कर अपनी सरकार राज्य में बनाना चाहती है. इसके लिए नीतीश कुमार पर दबाव बनाकर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाया जा रहा है. इसी को लेकर जदयू समर्थित भीड़ ने ‘अमित शाह मुर्दाबाद… मुर्दाबाद- मुर्दाबाद का नारा लगाया.

उधर राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि जनभावना सत्ता परिवर्तन के खिलाफ है, लेकिन भाजपा ने साजिश के तहत नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की पूरी पटकथा पहले से तैयार कर रखी थी। उन्होंने याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान “2025 से 30 फिर से नीतीश” का नारा दिया गया था, लेकिन अब बिना किसी सार्वजनिक चर्चा के उन्हें पद से हटाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय ही उनकी पार्टी लगातार कहती रही थी कि नीतीश कुमार को आगे कर भाजपा अपना लक्ष्य साध रही है। तेजस्वी ने कहा, “हम पहले से कहते आ रहे थे कि चुनाव में उन्हें आगे किया गया, लेकिन असली फैसला बाद में होगा।” उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र मॉडल की तर्ज पर बिहार में भी भाजपा अपनी सहयोगी पार्टी को कमजोर कर अंततः खुद की सरकार बनाने की तैयारी में है।
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि भाजपा की रणनीति पहले सहयोगी दलों को कमजोर करने और फिर उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त करने की रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में भी सहयोगी दलों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया गया। तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक, महाराष्ट्र में शिवसेना, पंजाब में अकाली दल को इसी तर्ज पर भाजपा ने खत्म करनी साजिश रची। अब उसी तरह जदयू को खत्म किया जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्होंने पहले ही दावा किया था कि भाजपा धीरे–धीरे जनता दल यूनाइटेड को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। उनके मुताबिक जब वर्ष 2024 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़कर एनडीए का साथ लिया






