आप की बात

आखिर मीड़िया का मौलना साद अब कहां चला गया

आखिर मीड़िया का मौलना साद अब कहां चला गया
आज एक प्रश्न अचानक से मेरे जहन में आया, आखिर मौलना साद कहा गया उसको जमीन खा गई या आसमाँ निगल गया,
मार्च और मध्य अप्रैल के महीने में सभी न्यूज चैनलस साद को खोजने का दावा करते नजर आये, इतना हंगामा खड़ा कर दिया मानो कोरोना सिर्फ मौलाना साद की वजह से ही आया। जमयती संगठन के विरुद्ध आग उगलते नजर आये, क्या मौलाना साद को पकड़ा गया या दिल्ली पुलिस नाकाम रही । विदेशी नागरिकों पर क्या कार्यवाही हुई, जो अवैध रूप से भारत मे रह रहे थे, उन पर क्या कार्यवाही हुई जिन्होंने कोरोना वारियर्स जे साथ बदसलूकी की, आज ये सब एक ठंडे बस्ते में बंद है क्योंकि लाक डाउन के समय न्यूज चैनल्स के पास लोगो को परोसने के लिए कुछ और मसाला नही था, आज इसके इलावा बहुत खबरे हैं जिनसे उनकी टीआरपी बढ़ती है तो वो ये सब भूल गए।क्या देश की सारी समस्याओं मसलन बिगड़ती चरमराती अर्थ व्यवस्था,भयावह बढ़ती बेराजगारी, लगातार निजी हाथों में जाते या सरकार द्वारा बेचे जाते सरकारी उपक्रम हमारे देश की मीड़िया को नजर नहीं आ रहा है या मीड़िया सिर्फ सरकार की चमचागीरी ही करती रहेगी।
वनिका कपूर नई दिल्ली

मुश्किल वक्त
लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के बाद अनलॉक 3 लागू करना सरकार के द्वारा उठाया गया सही कदम नहीं है। देश में संक्रमण अनलॉक 2 के बाद तेजी से बढ़ा है उसके बाद अनलॉक 3 के फैसलों को तार्किक निर्णय नहीं कहा जा सकता है। कॉलेज और मेट्रो को बंद करना एक सही कदम है लेकिन व्यायामशाला को इजाजत देने का निर्णय सही नहीं है। देश में संक्रमण की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
नारायण हरि, चंडीगढ़

नयी शिक्षा नीति
पिछले 34 सालों से हम पुरानी शिक्षा नीति के साथ पढ़ते आ रहे थे। आज पूरी दुनिया एक बेहतर शिक्षा नीति को अपना चुकी है। हमारी शिक्षा नीति विद्यार्थियों को किताबी कीड़ा बनाने का कार्य करती आ रही थी। नई शिक्षा नीति के अनुसार अभी तो कुछ अलग देखने को मिल रहा है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि शिक्षा नीति अपनी बदलते समय के अनुरूप कितनी कारगर साबित होगी।
नेहा, चंडीगढ़

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