अर्थ-जगतटेक्नोलोजीदूरसंचार

दूरसंचार आपरेटर शुल्क दरें बढ़ाने की तैयारी में

सूत्रों ने कहा कि यह ट्राई के दिशानिर्देश आदि तमाम मुद्दों पर निर्भर करेगा

चौथा अक्षर संवाददाता
नई दिल्ली
पुराने दूरसंचार आपरेटर शुल्क दरें बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि शुल्क दरों में कितना इजाफा किया जाएगा और इसकी घोषणा कितनी जल्द की जाएगी। सुनील भारती मित्तल का कहना है कि प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) को बढ़ाकर 300 रुपये करने और यदि बाजार में स्थिरता आ जाए तो मौजूदा एआरपीयू को दोगुना करने की जरूरत है। जबकि रिलायंस जियो के करीबी सूत्रों का कहना है कि कंपनी अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और उसका लक्ष्य 50 फीसदी तक पहुंचना है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने फिलहाल इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। सूत्रों ने कहा कि यह ट्राई के दिशानिर्देश आदि तमाम मुद्दों पर निर्भर करेगा।
शुल्क दरों में इजाफे की आवश्यकता और स्पष्टता जाहिर तौर पर सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसलों पर भी निर्भर करेगी। भारती एयरटेल और रिलायंस जियो (जिसका एजीआर बकाया मामूली है और जो पहले ही भुगतान कर चुकी है) को अब उन कंपनियों के एजीआर बकाये का भुगतान करना है जिनके साथ उनका कारोबार है अथवा स्पेक्ट्रम साझेदारी समझौता है क्योंकि वे उनके स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल कर रही हैं। भले ही इस प्रकार की कंपनियां आईबीसी की प्रक्रिया के अधीन हों अथवा दिवालिया हो चुकी हों।
उदाहरण के लिए, रिलायंस जियो रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस टेलीकाम के करीब 34 फीसदी स्पेक्ट्रम का उपयोग कर रही है। इन दोनों कंपनियों के लिए एजीआर बकाये के भुगतान की जिम्मेदारी रिलायंस जियो की होगी जो विभिन्न आकलन के आधार पर आरकाम के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये और रिलायंस टेलीकाम के लिए करीब 31,000 करोड़ रुपये है। जहां तक भारती एयरटेल का सवाल है तो वह वीडियोकान और एयरसेल के स्पेक्ट्रम का उपयोग कर रही है जिनका एजीआर बकाया करीब 13,765 करोड़ रुपये है।
हालांकि स्पेक्ट्रम उपयोगकर्ता की वास्तविक भुगतान दायित्व उनके पास मौजूद स्पेक्ट्रम की मात्रा पर निर्भर करेगा। राहत की बात इतनी है कि वोडाफोन आइडिया ने इस प्रकार का कोई समझौता नहीं किया है।
वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल के लिए शुल्क दरों में वृद्धि जिन प्रमुख मुद्दों पर निर्भर करेगी उनमें से मुद्दा यह भी है कि सर्वोच्च न्यायालय उनके अपने एजीआर बकाये के किस्तों में भुगतान के लिए किस प्रकार की योजना को मंजूरी देता है। इसके लिए उन्हें 10 साल अथवा 15 साल अथवा इससे कम का समय दिया जाता है। रिलायंस जियो अपने बकाये का भुगतान पहले ही कर चुकी है और इसलिए उसे फिलहाल कोई चिंता नहीं है।
सुनील मित्तल का कहना है कि उनकी नजर अगले छह महीनों में 250 रुपये के एआरपीयू पर है जो मौजूदा 157 रुपये के एआरपीयू के मुकाबले 60 फीसदी अधिक है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि कंपनी बिना कोई शुल्क वृद्धि किए 165 रुपये के एआरपीयू तक पहुंच सकती है क्योंकि उसे काफी ग्राहक 4जी की ओर रुख कर गए हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Close