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अंकल ! ये बच्चन से मुक्ति कैसे मिलेगी?

आप इनके खिलाफ कुछ करो अंकल !

संजीव आचार्य
मेरे एक मित्र के पुत्र को कोई दस साल पहले फिल्मी दुनिया का भूत सवार हुआ। बेटे की इच्छा और उसकी माँ के दबाव में मित्र ने लोखंडवाला में एक फ्लैट किराये पर लेकर बेटे को वहाँ रखा। एक कार और टेम्परेरी ड्राइवर का भी जुगाड़ कर दिया जिससे कि हीरो बनने के लिए आतुर बेटे को धक्के न खाने पड़ें। खैर, कुछ सीरियलों में छोटे मोटे रोल मिले, कई दलालनुमा मध्यस्थों ने फिल्म निर्माताओं से मिलवाने के नाम पर लाखों का चूना लगाया। पिता मन मसोसकर, कुछ आस उम्मीद में, खर्च करते रहे।

मैं कोई अनोखी कहानी बयां नहीं कर रहा हूँ। ये हर शहर के कुछ घरों के दुखद अध्याय हैं। मैं कुछ और बताना चाहता हूँ। दरअसल कोरोना के बाद से वो स्ट्रगलर एक्टर अपने माँ बाप के साथ घर में है। इस बीच जबर्दस्ती उसकी शादी भी कर दी कि शायद गृहस्थी बसाने का चस्का उसका बॉलीवुड से मोहभंग कर दे। तरकीब फेल हो गई क्योंकि उसकी पत्नी भी पति के हीरो बनने के सपने की सहभागी बन गई। खैर, मुद्दे पर आता हूँ। मित्र के बेटे ने आज मुझे फोन किया। बोला – अंकल आप को राजनीति के अलावा और कुछ सूझता नहीं कि देश में और भी समस्याएं हैं जो अपने आप में गम्भीर हैं। मैंने सोचा हमेशा की तरह कहेगा कि कोई अप्रोच भिड़ाकर आमिर खान, करन जौहर या सलमान खान से मिलवा दो। और मैं हमेशा की तरह कहूंगा बेटे मुझ अदने से आदमी को तुम क्यों इतना प्रभावशाली मानते हो? अपने लिये नौकरी तो ले नहीं पा रहे हैं।

खैर, वो मेरे विचारों के बादलों को खुद ही छांटते हुए बोला – अरे अंकल ये अमिताभ बच्चन से कब मुक्ति मिलेगी। दो लाख से दो करोड़ तक के हर विज्ञापन के लिए लार टपकाये हुये लगे पड़े हैं। तेल,साबुन, चड्डी बनियान, हर चीज का विज्ञापन वही करेंगे? मेरे जैसे लोग क्या करें? मुंबई में मेरे तमाम माडल दोस्त इस बात से जबरदस्त दुखी हैं। पचास हजार का काम भी बच्चन को चाहिये। अब वो अवेलेबल है तो कोई पीआर कम्पनी मेरे जैसे लोगों को क्यों लेगी? इनका पेट क्यों नहीं भरता? आप इनके खिलाफ कुछ करो अंकल।

मीडिया वाले इस मुद्दे को सीरियस क्यों नहीं लेते? भाजपा ने भी आडवाणी, जोशी वगैरह वगैरह को उम्र के बाद मेन पोलिटक्स से हटा दिया। काँग्रेस में भी नये लोगों के लिए, सचिन पायलट, वगैरह आगे आ रहे हैं। मीडिया स्पोर्ट कर रहा है। हमारी लाईन के बारे में कोई बात नहीं करता। enough of this Big B ये फिल्म भी करेंगे, एड भी, इवेंट भी। कोई लिमिट ही नहीं है। सुपरस्टार ऐसे होते हैं? We are tired of this man. Please start a campaign against this.
मैं हैरान हो कर हाँ, हूँ करता रहा और फिर इधर उधर की बात करके फोन काट दिया। लेकिन उसकी बात दिमाग में घूमती रही। सोचा फेसबुक पोस्ट तो लिख ही दूँ। कोई अखबार मैगजीन छापेगा तो लेख भी लिख दूंगा। समस्या तो है। टीवी खोलो तो हर विज्ञापन में वही हैं। सच है, किसी और को चार पैसे कमाने दोगे श्रीमान या सबको यही कहोगे कि कुछ दिन और गुजारो, (बेरोजगारी में), गुजरात में!

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