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देशभर में विश्वकर्मा पूजा सम्पन्न !,विश्वकर्मा पूजा पर सार्वजनिक अवकाश को लेकर सरकार को लाखों पत्र लिखे गये लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी

विश्वकर्मा पूजा का छुट्टी न होना दुर्भाग्यपूर्ण, संकल्प दिवस के रूप में मनाया विश्वकर्मा पूजा- अशोक विश्वकर्मा

चौथा अक्षर संवाददाता
वाराणसी
विश्वकर्मा पूजा पर्व के अवकाश हेतु देशभर में प्रजातांत्रिक ढंग से चल रहे लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार द्वारा पूजा पर्व के छुट्टी के संबंध में अब तक कोई निर्णय न लिया जाना बहुत ही निराशाजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है जिससे विश्वकर्मा समाज के लोगों में जबरदस्त क्षोभ व आक्रोश है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के पदाधिकारियों,सदस्यों द्वारा लाखों पत्र भेजे गये,विरोध स्वरुप लोगों ने मुंडन कराया,काले गुब्बारे आसमान में छोड़े लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और विश्वकर्मा पूजा पर्व के अवकाश हेतु देशभर में प्रजातांत्रिक ढंग से चल रहे लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार द्वारा पूजा पर्व के छुट्टी के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया।

आल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा कोर कमेटी की बैठक जिला कार्यालय पर संपन्न हुई बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर सरकार की भेदभाव पूर्ण एवं उपेक्षात्मक नीतियों के प्रति जमकर विरोध जताया बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा आस्था से जुड़े विश्वकर्मा पूजा पर्व के अवकाश हेतु देशभर में प्रजातांत्रिक ढंग से चल रहे लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार द्वारा पूजा पर्व के छुट्टी के संबंध में अब तक कोई निर्णय न लिया जाना बहुत ही निराशाजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है जिससे विश्वकर्मा समाज के लोगों में जबरदस्त क्षोभ व आक्रोश है उन्होंने कहा पौराणिक शास्त्रों के अनुसार आदि सनातन धर्म की उत्पत्ति एवं देवी देवताओं के साथ ही भगवान विश्वकर्मा के भी अवतरण का उल्लेख विद्यमान है उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि देश में अनेक पर्व , देवी देवताओ , संत महापुरुषों राजनेताओं के सम्मान में उनके नाम पर राजकीय अवकाश घोषित है फिर भगवान विश्वकर्मा के साथ सरकार भेदभाव और उपेक्षा क्यों कर रही है ?

देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा और उनके वंशजों का सृजन और निर्माण के क्षेत्र में सतत योगदान रहा है विश्वकर्मा समाज की पहचान आस्था संस्कृति संस्कार और स्वाभिमान के प्रतीक देवता है भगवान विश्वकर्मा का अपमान समाज सहन नहीं करेगा बैठक में नेताओं ने सरकार पर समाज को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि योगी ने भगवान विश्वकर्मा के जीवन चरित को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कह कर उसे आज तक पूरा नहीं किया बैठक में विश्वकर्मा पूजा पर्व 17 सितंबर को पूरे देश में संकल्प दिवस के रूप में मनाने तथा अवकाश होने तक निरंतर संघर्ष जारी रखने का निर्णय किया गया बैठक में प्रमुख रूप से नंदलाल विश्वकर्मा , रमेश विश्वकर्मा , सुरेश विश्वकर्मा , एडवोकेट चंद्रशेखर विश्वकर्मा , लोचन विश्वकर्मा , रामकिशुन विश्वकर्मा , राजेंद्र विश्वकर्मा , सुरेश विश्वकर्मा , मनोज विश्वकर्मा , श्याम लाल विश्वकर्मा , महेंद्र विश्वकर्मा , भरत विश्वकर्मा , केदार विश्वकर्मा , जय प्रकाश विश्वकर्मा आदि लोग थे ।

सोनभद्र के अनपरा ,डिबुलगंज में काला गुब्बारा छोड़कर सरकार की भेदभाव पूर्ण एवं उपेक्षात्मक नीतियों के प्रति जमकर विरोध जताया। बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा धर्मेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने कहा आस्था से जुड़े विश्वकर्मा पूजा पर्व के अवकाश हेतु देशभर में प्रजातांत्रिक ढंग से चल रहे लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार द्वारा पूजा पर्व के छुट्टी के संबंध में अब तक कोई निर्णय न लिया जाना बहुत ही निराशाजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे विश्वकर्मा समाज व अन्य समाज के लोगों में जबरदस्त क्षोभ व आक्रोश है। उन्होंने कहा पौराणिक शास्त्रों के अनुसार आदि सनातन धर्म की उत्पत्ति एवं देवी देवताओं के साथ ही भगवान विश्वकर्मा के भी अवतरण का उल्लेख विद्यमान है।उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि देश में अनेक पर्व,देवी-देवताओ,संत महापुरुषों राजनेताओं के सम्मान में उनके नाम पर राजकीय अवकाश घोषित है,फिर भगवान विश्वकर्मा के साथ सरकार भेदभाव और उपेक्षा क्यों कर रही है?देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा और उनके वंशजों का सृजन और निर्माण के क्षेत्र में सतत योगदान रहा है। विश्वकर्मा समाज की पहचान आस्था संस्कृति संस्कार और स्वाभिमान के प्रतीक देवता है,भगवान विश्वकर्मा का अपमान समाज सहन नहीं करेगा।

बैठक में नेताओं ने सरकार पर समाज को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि योगी जी ने भगवान विश्वकर्मा के जीवन चरित को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कह कर उसे आज तक पूरा नहीं किया। बैठक में विश्वकर्मा पूजा पर्व 17 सितंबर को पूरे देश में संकल्प दिवस के रूप में मनाने तथा अवकाश होने तक निरंतर संघर्ष जारी रखने का निर्णय किया गया। बैठक में प्रमुख रूप से सम्मिलित धीरज कुमार विश्वकर्मा, नागेंद्र कुमार विश्वकर्मा, प्रदीप विश्वकर्मा , दीपक शर्मा विश्वकर्मा, शंभू श्याम विश्वकर्मा, दुर्गेश विश्वकर्मा , करण विश्वकर्मा, पवन विश्वकर्मा, मनोज विश्वकर्मा , गणेश विश्वकर्मा ,संजय विश्वकर्मा आदि लोग बैठक में सम्मिलित थे।
नैनी स्थित विश्वकर्मा मंदिर में 17 सितंबर स्वजर्निक विश्वकर्मा पूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ जिसमें मुख्यरूप से फूल चंद्र शर्मा , वेद प्रकाश शर्मा , पारसनाथ विश्वकर्मा , अनिल कुमार विश्वकर्मा (प्रबंधक) , प्रभुनाथ शर्मा , त्रिलोकीनाथ शर्मा , छोटू शर्मा एवं पुरोहित फेकन राम शर्मा आदि लोगो के साथ अन्य सभी विश्वकर्मा बंधु उपस्थित रहे।

विश्वकर्मा पूजा छुट्टी के लिए समाज ने सामूहिक मुंडन करवा कर सरकार की हठधर्मिता का विरोध किया

ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में विश्वकर्मा पूजा की मांग को लेकर लंबे समय से चलाए जा रहे आंदोलन के तहत सरकार की हठधर्मिता भेदभाव खिलाफ समाज के लोगों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा के नेतृत्व में  काशी राजघाट स्थित शक्ति घाट पर सामूहिक मुंडन करवा कर विरोध जताया तथा विश्वकर्मा पूजा पर्व का राजकीय सार्वजनिक अवकाश घोषित होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की बात करने वाली सरकार जातीय आधार पर देवी देवताओं को बांटकर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ भेदभाव और आघात कर रही है तथा विश्वकर्मा पूजा पर्व की पौराणिक परंपरा संस्कृति और उसकी पहचान खत्म करना चाहती है। देव शिल्पी विश्वकर्मा देशभर में फैले करोड़ों विश्वकर्मा वंशीयो के स्वाभिमान गौरव और सामाजिक पहचान हैं।

उन्होंने कहा भाजपा सरकार द्वारा विश्वकर्मा पूजा पर्व का अवकाश रद्द किया जाना गंभीर राजनैतिक षडयंत्र है ज्ञात हो कि 17 सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जन्म दिवस है, श्री नरेंद्र मोदी देश में एक बड़े आदर्श महापुरुष के रूप में याद किए जाएं इसलिए सरकार विश्वकर्मा पूजा पर्व के दिवस की महत्ता को गौड़ और विलुप्त करने का बड़ा राजनैतिक षड्यंत्र कर रही है। उन्होंने सरकार से मांग किया कि विश्वकर्मा पूजा पर्व का अवकाश घोषित करने के साथ ही देश भर में प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के साथ भगवान विश्वकर्मा के सम्मान में उनके नाम पर भी सरकार द्वारा कार्यक्रम आयोजित होना चाहिए और कला, शिल्प, तकनीकी, विज्ञान, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना चाहिए। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीकांत विश्वकर्मा डॉ प्रमोद कुमार विश्वकर्मा नंद लाल विश्वकर्मा चंद्रशेखर विश्वकर्मा सुरेश विश्वकर्मा एडवोकेट श्याम बिहारी विश्वकर्मा रमेश विश्वकर्मा राम किशुन विश्वकर्मा लोचन विश्वकर्मा सुरेश विश्वकर्मा दीनदयाल विश्वकर्मा कालिका विश्वकर्मा अजय विश्वकर्मा राहुल विश्वकर्मा संजय बागी चौधरी विश्वकर्मा अशोक विश्वकर्मा पड़ाव राजवंश विश्वकर्मा कमलेश विश्वकर्मा पड़ाव विजयलक्ष्मी विश्वकर्मा हेमंत विश्वकर्मा सुरेंद्र विश्वकर्मा महेंद्र विश्वकर्मा राजेंद्र विश्वकर्मा श्याम लाल विश्वकर्मा कमलेश विश्वकर्मा लाल बिहारी विश्वकर्मा डॉ सुनील कुमार विश्वकर्मा मुन्ना लाल विश्वकर्मा गोलू विश्वकर्मा रोहित विश्वकर्मा पिंटू विश्वकर्मा राम लखन विश्वकर्मा रणजीत विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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