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आखिर एक भव्य मंदिर बनाने में कितना पैसा लगेगा ?

पी.डब्लू.डी के कर्मचारियों से जबरन, राम मंदिर के नाम पर एक दिन का वेतन लिया जा रहा है और इसे स्वेच्छा से कहा जा रहा है

उमाकांत विश्वकर्मा
अयोध्या

पी.डब्लू.डी के कर्मचारियों से जबरन, राम मंदिर के नाम पर एक दिन का वेतन लिया जा रहा है और इसे स्वेच्छा से कहा जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धार्मिक प्रयोजन हेतु चंदा, बिना सरकारी अनुमति के नहीं मांगा जा सकता। यूपी सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1957 के नियम 10 में अनुसार बिना सरकारी अनुमति के ऐसा नहीं किया जा सकता, इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि या तो सरकार ने इस अधिकारी को अनुमति दी है। फिर यह स्वेच्छा से कैसे रहा? यह तो जबरिया वसूली हुई। लगभग 100 करोड़ के खर्च में एक भव्य मंदिर आसानी से तैयार हो सकता है

क्या आप जानते हैं राम मंदिर चन्दा गैंग द्वारा कितनी रकम जुटाने का लक्ष्य है… यह लक्ष्य है लगभग 5 हजार करोड़ ! क्या करेंगे इतनी रकम का ? यह पूछेंगे तो कोई जवाब नही मिलेगा ! कितने स्कूल बनवाएगे?, कितने अस्पताल बनवाएंगे? कुछ नही बता रहे ! आप को जानकर आश्चर्य होगा कि भूमि पूजन से पहले तक अयोध्या के राम मंदिर के लिए 41 करोड़ रुपये का चंदा आ चुका था जिसमे कथावाचक मोरारी बापू की भागीदारी 11 करोड़ रुपये की है तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट के साथ ही कई अन्य धार्मिक संस्थाएं भी राम मंदिर के लिए आर्थिक सहयोग कर रही है महावीर मंदिर पटना की ओर से दो करोड़ रुपये दिए भी जा चुके हैं। शिवसेना के ओर से भी पांच करोड़ रुपये का आर्थिक सहयोग देने की बात की गई है यानी अब तक 100 करोड़ रुपये तो आसानी से इकठ्ठे हो गए होंगे लेकिन उसके बावजूद पूरे देश में दरवाजे दरवाजे खटखटाकर 10 करोड़ परिवारों से अयोध्या के भव्य मंदिर के लिए चंदा मांगा जा रहा है …..क्यो भाई ? किसलिए ?
एक विश्वसनीय जानकारी के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि न्यास को वित्त वर्ष 2018-19 में तकरीबन 45 लाख रुपए का चंदा मिला था जबकि इससे पिछले वर्ष इस संस्था को चंदे में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए मिले थे. मगर दिलचस्प बात है कि साल 1990 में विश्व हिंदू परिषद ने एक प्रेस नोट जारी करके बताया था कि उसे साल 1989 के आंदोलन के दौरान राम मंदिर के लिए 8 करोड़ 29 लाख रुपए का चंदा मिला था जिसमें से उसने 1 करोड़ 63 लाख रुपए ख़र्च कर दिए थे
इस संदर्भ में खोजबीन करने पर यह पता चला कि वर्ष 1990 में विश्व हिंदू परिषद ने प्रेस नोट जारी कर बताया था कि 1989 में मंदिर आंदोलन के लिए 8.29 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। उस दौरान देश भर में गांवों से मंदिर निर्माण के लिए शिलाएं और चंदा एकत्र किया गया था। इस चंदे में से 1 करोड़ 29 लाख खर्च कर दिए गए थे।

2015 में हिंदू संगठन अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने वीएचपी (विश्व हिंदू परिषद) और इसकी सहयोगी इकाइयों पर राम मंदिर के नाम पर मिले चंदे को हड़पने का आरोप लगाया….

निर्मोही अखाड़े ने भी जिन्होंने राम जन्म भूमि का केस इतने सालों तक लड़ा उन्होंने भी विहिप पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा था कि विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर के नाम पर 1400 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। निर्मोही अखाड़े के संत सीताराम ने कहा था कि विहिप ने राम मंदिर निर्माण के नाम पर घर-घर जाकर ईंट मांगी और पैसा जुटाया। अब तक करीब 1400 करोड़ रुपये जुटाकर संगठन के नेता डकार गए।असलियत हम सब जानते हैं कि उस वक्त यह जो बता रहे हैं उससे कई गुना ज्यादा चन्दा आया था विश्व हिंदू परिषद को उस वक्त हर ओर से भरपूर चंदा मिला ब्रिटेन और अमेरिका ओर विदेशों में बसे छत्प् ने उस वक्त विहिप को भरपूर चन्दा दिया था।

श्रीराम जन्मभूमि न्यास के ट्रस्टी चंपतराय ने बताया कि वो हर साल ट्रस्ट की ओर से आयकर रिटर्न दायर करते हैं
इस प्रश्न पर विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के ट्रस्टी चंपत राय ने बीबीसी से कहा, “कोई संस्था अपना हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं करती है, वो हिसाब सरकार को दे देती है.“श्रीराम जन्मभूमि न्यास को आयकर क़ानून की धारा 12-ए के तहत आयकर में छूट हासिल है. दस्तावेज़ों के मुताबिक यह संस्था ’ग़रीबों के कल्याण’ के उद्देश्य से पंजीकृत है. न्यास की इनकम टैक्स रिटर्न दिखाते हुए चंपतराय कहते हैं, “हमारे पास 11 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है, जिसमें अयोध्या मंदिर निर्माण से जुड़ी सभी चीज़ें शामिल हैं. पत्थर काटने की मशीनें भी इसमें शामिल हैं.“
चंपतराय कहते हैं, “हमने मंदिर के लिए एक ही बार साल 1989 में देश भर से पैसा इकट्ठा किया है. हम हर व्यक्ति से सवा रुपए, परिवार से पांच रुपए और अधिकतम दस रुपए लिया करते थे. इस देश के अंदर एक भी व्यक्ति नहीं है जो ये दावा कर सके कि उसने एक लाख या उससे अधिक रुपए न्यास को दिए.“ चंपतराय कहते हैं कि वीएचपी ने साल 1989 के बाद कभी भी बाज़ार में जाकर राम मंदिर के नाम पर धन संग्रह नहीं किया.
वीएचपी के महासचिव मिलिंद परांडे कहते हैं, “श्री राम जन्मभूमि न्यास ने 1989-90 के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए, न तो धनसंग्रह के लिए पब्लिक अपील की है, न तो उस तरह से धनसंग्रह किया है.“ उन्होंने बताया, “श्रीराम जन्मभूमि न्यास के संग्रह किये हुए धन का व्यय उस न्यास के ध्येय उद्देश्यों के अनुसार ही हुआ है. जो धन समाज ने स्वयं न्यास को लाकर दिया है उसे स्वीकार किया गया है.“

साल 1989 का आंदोलन और चंदा

’सवा रुपैया दे दे रे भैया राम शिला के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्थर तेरे नाम का.’ अस्सी के दशक के अंतिम सालों में वीएचपी नेता अशोक सिंघल की अगुवाई में राम मंदिर आंदोलन चरम पर था और गीत के रूप में मंदिर के लिए दान देने की विश्व हिंदू परिषद की ये अपील घर-घर पहुँच रही थी. वीएचपी ने हिंदुओं से कहा था कि जब अयोध्या में राम मंदिर बनेगा, तब ये राम शिलाएँ लगेंगी और दान का ये पैसा काम आएगा. हाल के सालों में निर्मोही अखाड़े और हिंदू महासभा से जुड़े नेताओं ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मिलने वाले चंदे पर सवाल उठाए हैं और जाँच की माँग की है.

इस पर चंपतराय कहते हैं, “जिन लोगों को शिकायत है, उन्हें आयकर विभाग में शिकायत करनी चाहिए और जाँच की माँग करनी चाहिए. जो लोग हमसे हिसाब-किताब मांग रहे हैं, ये पैसा उनका नहीं है, ये राम का पैसा है.“ चंपतराय कहते हैं, “शिकायत तब करनी चाहिए थी जब सोनिया गांधी राज कर रहीं थीं, तब वो हमारे ख़लिफ़ एक जांच बिठा सकती थीं. आज करने का कोई फ़ायदा नहीं है.“
चंपत राय कहते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मिलने वाली पाई-पाई का हिसाब आयकर विभाग को दिया गया है. वो कहते हैं, “साल 1985 में न्यास बना, धन संग्रह हुआ साल 1989 से, तब से 30 साल हो चुके हैं. इन 30 सालों में हम तीस ऑडिट रिपोर्ट सरकार को भेज चुके हैं. सरकारें जिसकी भी रही हों, कभी भी एक रुपए का दंड भी हमें नहीं लगा. न ही हमने अपनी आयकर रिटर्न भरने में कभी विलंब किया. अगर हम ग़लत होते तो हमारे ख़लिफ़ जांच हुई होती.“

राम मंदिर निर्माण के नाम पर कथित हिंदू संगठनों द्वारा देश के तमाम हिस्सों में ठगी

राम मंदिर निर्माण के नाम पर कथित हिंदू संगठनों द्वारा देश के तमाम हिस्सों में ठगी का मामला सामने आया है. राम मंदिर निधि समर्पण समिति के मंत्री प्रभात गोयल ने चार लोगों के खिलाफ मुरादाबाद के थाना सिविल लाइंस में अवैध रूप से चंदा जमा करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई है. अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने के लिए सहयोग राशि संग्रह को लेकर पूरे देश में हिंदू संगठनों द्वारा जागरूकता पैदा की जा रही है. और अब तो पी.डब्लू.डी जैसा सरकारी संस्थान, अगर राम मंदिर के लिए कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट रहा है तो उससे पूछा जाना चाहिए कि क्या कभी किसी मस्जिद या गुरुद्वारे के लिए भी ऐसा किया है? प्रदेश में सिर्फ हिन्दू मंदिर, हिन्दू तीर्थ स्थलों के लिए सुरक्षा गार्ड और हिन्दू तीर्थयात्रा रेल चलाई जा रही तो जाहिर है संविधान खत्म कर दिया गया है और एक हिन्दू राष्ट्र का आधार तैयार कर लिया गया है I

 

राम मंदिर निधि समर्पण समिति के मंत्री प्रभात गोयल ने बताया कि हमें उन लोगों के खिलाफ शिकायत करनी पड़ी है, जो राम मंदिर के नाम पर अवैध वसूली कर रहे थे. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है, उनका उद्देश्य मुरादाबाद की जनता को गुमराह करना था. गोयल ने कहा कि ये लोग राष्ट्रीय सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को बदनाम कर रहे थे, जबकि हमारे संगठन में 21 और 25 रुपए का कोई विकल्प नहीं है.
आपको बता दें कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह के साथ ही सीएम योगी का फोटो लगी रसीद से चंदा वसूली का मामला सामने आया था. राम मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा वसूली करने के आरोप में भाजपा के जिला अध्यक्ष राजपाल चौहान द्वारा थाना मझौला में मुकदमा दर्ज कराया था.
निधि समर्पण अभियान के तहत राम मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिन्दू परिषद लोगों का समर्पण और सहयोग राशि लेगी. इस दौरान 10 रुपये, 100 रुपये और 1000 रुपये के कूपन होंगे. 2000 रुपए से ज्यादा सहयोग करने वालो को रसीद दी जाएगी. इस चंदे के माध्यम से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य संपन्न होगा. कार्यकर्ता टोलियां बनाकर घर-घर जा रहे हैं और राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि की मांग कर रहे हैं.

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