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अब भी रहस्य के घेरे में 26 जनवरी को दिल्ली में हुई किसानों की रैली में नवरीत सिंह की मौत

चश्मदीदों, परिजनों का आरोप - पुलिस की गोली से हुई मौत, विशेषज्ञों ने भी कहा बुलेट जैसा घाव, लेकिन पुलिस कर रही इनकार - साभार कारवां

अतुल देव और अर्शु जान

26 जनवरी को दिल्ली में हुई किसानों की रैली में नवरीत सिंह की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है जबकि दिल्ली पुलिस ने चश्मदीदों और परिवार के आरोपों का खंडन किया है. दो चश्मदीदों और परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि 26 जनवरी को दिल्ली में किसान रैली में गोली लगने से उत्तर प्रदेश के 25 वर्षीय किसान नवरीत सिंह की मौत हुई है. चश्मदीदों ने कारवां को बताया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों को नवरीत पर गोली चलाते हुए देखा और जिसके बाद उसका ट्रैक्टर पलट गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, नवविवाहित की मौत “एंटीमार्टम सिर की चोट के कारण“ हुई. नवरीत के दादा हरदीप सिंह डिबडिबा ने अपने पोते के शव को देखा था और आरोप लगाया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत है. उनका कहना है, बंदूक की गोली लगने से हुए जख्मों को दर्ज करने के बावजूद इसमें मौत की संभावित वजह के रूप में गोली लगने का जिक्र नहीं है.

दिल्ली पुलिस ने चश्मदीदों और परिवार के आरोपों का खंडन किया है. दिल्ली के मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह ने कारवां को बताया कि “कोई गोली नहीं चलाई गई थी.“ पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए डीसीपी ने कहा कि इसमें मौत का कारण साफ दर्ज है. बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्होंने घटना के विवरण से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने से इनकार कर दिया.

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उत्तर प्रदेश के रामपुर में जिला अस्पताल के तीन डाक्टरों के एक पैनल द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि मौत का कारण “एंटीमार्टम सिर की चोट के परिणामस्वरूप झटका और रक्तस्राव“ है. 13 साल से पोस्टमार्टम के एक फोरेंसिक विशेषज्ञ, जो देश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक के सीनियर रेसिडेंस डाक्टर हैं, ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच की. विशेषज्ञ के अनुसार डाक्टरों द्वारा दर्ज की गई चोटों के लिए एकमात्र संभावित स्पष्टीकरण यह है कि नवरीत को दो गोलियां लगीं.

रिपोर्ट में दर्ज की गई पहले दो एंटेमार्टम चोटों में “ 2 x1सेमी की (दाहिने) भौं के कोने में गहरी हड्डी“ का एक गहरा घाव और मुंह के बाएं कोण के नीचे ठोड़ी के बाईं ओर “2×1सेमी“ का एक अन्य घाव है.” पहले घाव का “मार्जिन उलटा है“ और दूसरे में “मार्जिन उलटा है और हड्डी गहरी है,“ रिपोर्ट में कहा गया है.

रिपोर्ट में दर्ज पहली चोट का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञ ने कहा कि “जब बल बाहर से अंदर की ओर होता है, तो मार्जिन उलटा होता है,“ इसलिए यह “गोली घुसने का घाव भी हो सकता है.“ विशेषज्ञ के अनुसार दूसरी चोट भी गोली का घाव हो सकती है. फोरेंसिक विशेषज्ञ ने बताया, “जो चीज मेल खाती है, वह यह है कि दोनों चोटें एक ही आकार की हैं, 2Û1सेमी, दोनों में मामूली अंतर है, दोनों गहरी हड्डी तक हैं. तो यह शायद एक ही हथियार या बंदूक से हो… दूर से गोली लगने से“ हुआ है.

हमने इन चोटों के बारे में सरल ढंग से समझने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ से बात की. “देखिए, अगर कोई फर्श या सड़क या ट्रैक्टर या ट्राली या टायर या किसी भी चीज पर टकरा कर मारा जाता है, तो यह इस तरह नहीं होगा,“ विशेषज्ञ ने जवाब दिया. “उलटे मार्जिन की जगह बड़ा सा घाव होता. कहीं भी फिसलनदार घास को रिकार्ड नहीं किया गया है, जो सड़क पर फिसलने का कारण होती.”

रिपोर्ट में दर्ज की गई चौथी चोट “6 x 3 सेंटीमीटर का (दाहिने) कान पर एक और हल्का घाव है, जिसका “मार्जिन अनियमित और उलटा है.“ रिपोर्ट में दर्ज किया गया है कि इस घाव से “कान का अस्थिपंजर और भेजा बाहर आ गया.“ फोरेंसिक विशेषज्ञ ने कहा, “उलटा निशान दिखाता है कि बल अंदर से बाहर की ओर है. कान के अस्थिपंजर सिर के बाहरी वृत्त से दो से तीन सेंटीमीटर नीचे मस्तिष्क की ओर होते हैं. जब तक अंदर से बाहर की तरफ बल नहीं लगता, तब तक उनका बाहर खींचना असंभव है. तो यह एक प्रक्षेप्य चीज हो सकती है- यह कोई आग्नेयास्त्र हो सकता है, यह एक गोली हो सकती है. ”

विशेषज्ञ ने कहा कि लोहे की छड़ से इस तरह की चोटों की व्याख्या की जा सकती है. “लेकिन कोई राड भी इतनी गहराई तक नहीं घुस पाएगी और अगर घुस भी जाए तो यह बाहर नहीं निकल पाती, शरीर में ही रहेगी,” फोरेंसिक विशेषज्ञ ने कहा. “केवल सामने से आती चीज ही उलटा मार्जिन कर सकती है.“ यह पूछे जाने पर कि बुलेट के अलावा कौन सी अन्य चीज है जिससे नवरीत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज किए गए घावों की तरह घाव बन सकता है, फोरेंसिक विशेषज्ञ ने जवाब दिया, “मुझे नहीं लगता कि बुलेट के अलावा किसी चीज से ऐसा घाव बन सकता है.“

31 जनवरी की दोपहर को हमें दिया गया फोरेंसिक विशेषज्ञ का विश्लेषण, ब्रिटिश सरकार के साथ पंजीकृत फोरेंसिक रोगविज्ञानी डा. बेसिल पर्ड्यू की राय के साथ लगभग शब्दशः मेल खाता था, जिन्हें गार्जिअन में अगले दिन प्रकाशित एक रिपोर्ट में उद्धृत किया गया था. पोस्टमार्टम की जांच करने के बाद, पर्ड्यू ने गार्जिअन से कहा, “मेरे लिए यह एक बंदूक की गोली का घाव है, संभवतः दो, जब तक कुछ और साबित न हो.“ अखबार ने कहा कि नवरीत की मौत के पीछे पर्ड्यू की राय थी कि यह “बहुत ही असंभव“ है कि ट्रैक्टर पलटने से ऐसा हुआ होगा. “पलटने से ऐसी चोटें नहीं आ सकती.“

मेडिकल विशेषज्ञों के विचार परिवार के आरोपों से मेल खाते हैं. नवरीत के दादा, डिबडिबा ने हमें 29 जनवरी को एक साक्षात्कार में बताया कि एक गोली जबड़े के पास से नवरीत के चेहरे में घुसी, खोपड़ी को छेदते हुए उसके दाहिने कान के पीछे से निकली. डिबडिबा ने यह भी कहा कि पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने उनके सामने माना था कि चोटें गोली के कारण लगी हैं लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण यह दर्ज नहीं किया गया है.

नवरीत के चाचा इंद्रजीत सिंह ने हमें बताया कि उन्होंने नवरीत की खोपड़ी का एक एक्स-रे देखा है जिसमें उसके सिर से एक बुलेट घुसने का सुराख दिखता है. परिवार के सदस्यों ने कहा कि रामपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुबोध शर्मा ने उन्हें एक्स-रे की प्रति उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया. डिबडिबा ने कहा कि वह एक्स-रे की एक प्रति पाने और साथ ही पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग को सुरक्षित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. हमने सीएमओ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी, डिप्टी सीएमओ मनोज शुक्ला और पैनल के एक डाक्टर से बात की. सभी ने टिप्पणी करने से मना कर दिया. “हम केवल अदालत में बोलने के लिए जवाबदेह हैं,“ सीएमओ ने हमें अपने कार्यालय में बताया.

प्रत्यक्षदर्शी, हरमनजीत सिंह और बलविंदर सिंह जो उत्तर प्रदेश के किसान हैं ने कहा कि वे गाजीपुर सीमा पर चल रहे धरने से नवरीत के साथ मध्य दिल्ली के आईटीओ आए थे. नवंबर 2020 के अंत से नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध में बैठे हैं. किसान समूहों ने गणतंत्र दिवस पर राजधानी में एक ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया था. हरमनजीत और बलविंदर ने कहा कि नवरीत अपने ट्रैक्टर को राजधानी में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर चला रहा था जब पुलिस ने उस पर गोली चलाई जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई और उसका ट्रैक्टर पलट गया. जिस स्थान पर नवविवाहित की मौत हुई उसके बगल की इमारत की बाउंड्री वाल के साथ लगी ग्रिल्स की ओर इशारा करते हुए कहा, “कुछ पुलिस वाले उस तरफ से आए थे- उनमें से तीन या चार लोग यहां थे-उन्होंने गोली चला दी.“ हरमनजीत ने भी पुलिस पर नवरीत की हत्या का आरोप लगाया.

नवरीत की मौत के कुछ ही घंटों के भीतर कई पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने एक छोटी क्लिप प्रकाशित की, जो कथित तौर पर दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर लगे सीसीटीवी फुटेज की थी. क्लिप की रिकार्डिंग को एक डिवाइस की स्क्रीन से लिया गया है जो सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रही है. घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर दर्ज की गई क्लिप में एक ट्रैक्टर पुलिस बैरिकेड से टकराता और पलटता दिखाया गया है. सीसीटीवी वीडियो की शुरुआत में ट्रैक्टर पलटने से पहले क्लिप कुछ सेकंड जल्दी से आगे बढ़ जाती है.

विभिन्न पत्रकारों और समाचार रिपोर्टों ने इस वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि ट्रैक्टर दुर्घटना के परिणामस्वरूप नवरीत की मृत्यु हुई लेकिन वीडियो यह निर्धारित नहीं करता है कि कोई भी गोली नहीं चलाई गई थी. वास्तव में, वीडियो की गति बढ़ाई गई है जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि प्रसारण होने से पहले इसे संपादित किया गया था.

कई समाचार संगठनों ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने मौत को एक दुर्घटना बताया है और सीसीटीवी फुटेज के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया. फिर भी पुलिस ने खुद वीडियो जारी करने की पुष्टि नहीं की है या सीसीटीवी फुटेज की प्रामाणिकता की भी पुष्टि नहीं की है. वीडियो प्राप्त करने वाले एक पत्रकार ने हमें बताया कि यह आयुक्त कार्यालय द्वारा उसे भेजा गया था लेकिन उसे इसके बारे में नहीं बताने के लिए कहा गया था. “उन्होंने कहा कि मैं इसे केवल सामान्य रूप से दिल्ली पुलिस के हवाले से दिखा सकता हूं.“ वीडियो के बारे में पुलिस से पूछे गए सवालों का हमें जवाब नहीं मिला.

दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों ने गणतंत्र दिवस के लिए ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया था. दिल्ली पुलिस ने रैली को राजधानी के बाहरी इलाके तक सीमित करने की मांग की थी और निर्धारित मार्ग पर चल कर किसान यूनियन के कई नेताओं पुलिस का सहयोग किया. लेकिन दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर किसान कैडर रैली का संचालन करने के लिए उत्सुक थे. विरोध प्रदर्शनों में कम से कम एक प्रमुख संगठन किसान मजदूर संघर्ष समिति ने 25 जनवरी को घोषित किया था कि वह निर्धारित मार्ग का पालन नहीं करेगी.

26 जनवरी को हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी किसानों ने मार्च किया और अपने ट्रैक्टरों को मध्य दिल्ली में उतार दिया, जिसमें सैकड़ों किसान पैदल भी लाल किले तक पहुंचे. किसानों की रैली में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसूगैस के गोले दागने की कई घटनाओं के साथ-साथ किसानों द्वारा पुलिस बैरिकेड और पुलिस पर हमले भी देखे गए. प्रदर्शनकारी किसान लगभग मध्य दोपहर को दिल्ली के आईटीओ क्षेत्र में पहुंचे जहां इसी तरह के टकराव हुए. लगभग 2.30 बजे, जब हम आईटीओ पहुंचे तब तक नवरीत की मृत्यु हो चुकी थी और उसका शरीर राष्ट्रीय ध्वज के साथ लिपटा हुआ चौराहे की क्रासिंग के बीच में पड़ा था. एक दर्जन से अधिक किसान उसके चारों ओर गोला बनाकर बैठ गए.

हरमनजीत सिंह नवरीत के शव के बगल में बैठे थे. वह मेरठ से गाजीपुर बार्डर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे. अन्य लोगों की तरह, जब उनसे मौत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने आईटीओ में पुलिस के साथ अपने टकराव की घटनाओं का वर्णन करना शुरू कर दिया. हरमनजीत ने कहा, “उन्होंने हम पर आंसू गैस के गोले फेंके … उन्होंने ट्रैक्टर चलाने वालों पर पत्थर फेंके.“ उन्होंने हमें बताया कि जब गोली मारी गई थी तो नवरीत ट्रैक्टर चला रहा था. “उन्होंने ग्रिल्स की तरफ से उसे गोली मारी … गोली लगने के बाद, ट्रैक्टर पलट गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई .“ हरमनजीत ने कहा, “तब उन्होंने शव को जब्त करने की कोशिश की. उन्होंने हमें लाठी और पत्थरों से पीटा लेकिन हमने उन्हें शव नहीं लेने दिया. अगर वे शव ले जाने में कामयाब हो जाते, तो वे सारे सबूत खत्म कर देते. उन्होंने इसे एक दुर्घटना या इसी तरह पेश किया, इससे उन्हें फर्क भी क्या पड़ता है? “

उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले एक बुजुर्ग चश्मदीद बलविंदर सिंह ने भी इसी तरह की बात की. बलविंदर भी गाजीपुर विरोध स्थल से आए थे, उनसे हम वहां भी मिले जहां नवरीत की मौत हो गई थी. बलविंदर ने आंध्रा एजुकेशन सोसायटी की बाउंड्री वाल के एक हिस्से की ओर इशारा किया, जिसमें ग्रिल लगी थी. बलविंदर ने कहा कि पुलिस अधिकारी वहां तैनात थे. “फायरिंग के बाद ट्रैक्टर को नियंत्रित नहीं किया जा सका और वह ऊपर चढ़ गया. जब वह गिरा, तो उन्होंने फिर से गोली मार दी.”

“गोली चलने के बाद मैं चिल्लाया, ‘हमारे भाई को मार दिया, हमारे भाई को मार दिया, भागो. ’फिर लोग भागने लगे,“ उन्होंने आगे कहा. “फिर उन्होंने आंसू गैस के गोले दागे. फिर वहां से, लगभग छह, सात, आठ पुलिसवाले, उसका शव लेकर जाने लगे.” इसे देखते हुए, बलविंदर ने कहा कि किसानों का एक समूह पुलिसकर्मियों की ओर दौड़ा. उन्हें रोकने के लिए अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना. “हमें वैसे भी मरना है,“ उन्होंने कहा. “मैंने उसकी पैंट नहीं छोड़ी, और दो अन्य ने उसकी शर्ट.“ अंततः और भी किसान उनकी सहायता के लिए आए, जिससे पुलिस भागने पर मजबूर हो गई. किसान नवरीत के शव को आंध्रा एजुकेशन सोसायटी की इमारत से लगभग दो सौ मीटर दूर आईटीओ चौराहे पर ले आए. वे शरीर के चारों ओर घेरा बनाकर बैठ गए, जैसे कि उसकी रखवाली कर रहे हो.

घटनास्थल पर कई लोगों ने हमें बताया कि पुलिस अधिकारी आंध्रा एजुकेशन सोसायटी के पीछे के गेट से भाग गए थे. एक पुलिसकर्मी जो गेट के पास अभी भी खड़ा था, ने इसकी पुष्टि की. घबराए हुए, उसने किसानों से कहा कि उसके बाकी साथी “डर के मारे भाग गए”. तब उसने किसानों से कहा कि वह उनकी तरफ है और उनके साथ खड़ा रहेगा. (कारवां पुलिस अधिकारी का नाम जाहिर नहीं कर रहा है.)

घटना के बाद के कुछ घंटों तक दिल्ली पुलिस घटनास्थल से गायब थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुलिस फायरिंग का समय 26 जनवरी को दोपहर 1.30 बजे के आसपास का था. कारवां के पत्रकार घटनास्थल पर 2.30 बजे पहुंचे और लगभग 3 घंटे तक वहीं थे. उस वक्त नवरीत की हत्या की जगह पर किसी प्रकार की सुरक्षा नहीं थी. जब हम घटनास्थल पर पहुंचे तो नवरीत का ट्रैक्टर सड़क पर पड़ा था. सड़क पर खून जमा था और आसपास खून के छींटे थे. खून सना एक कंबल, जिसमें छेद थे और बाकी सामान ट्रक से गिर कर बिखरा हुआ था.

करीब दो दर्जन किसान आंध्रा एजुकेशन सोसायटी के परिसर में जमा थे. उन्होंने हमें बताया कि सबूतों से छेड़छाड़ न हो यह सुनिश्चित करने के लिए वे वहां हैं. लेकिन लग रहा था जैसे पुलिस घटनास्थल के प्रति लापरवाह है. जिन 3 घंटों तक हम वहां थे, हमने एक दर्जन पुलिस वालों से घटनास्थल को सुरक्षित करने का अनुरोध किया. कुछ पुलिस वालों ने हमें बताया कि वे कहीं और तैनात हैं और एक पुलिस अधिकारी जो सादी वर्दी में था, उसने सलाह दी कि हम 100 नंबर पर डायल कर सूचना दे दें. जब हमने कहा कि वह खुद 100 नंबर डायल कर दे तो उसने कहा, “मैं अपने नंबर से काल करना नहीं चाहता.”

एआईएस बिल्डिंग का द्वार चार मेहराबों वाला एक भव्य आर्क है और आर्क के साथ वाली बाउंड्री में दो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. ये कैमरे इस तरह लगे हैं कि नवरीत की मौत से जुड़ी घटना कैद कर सकते हैं. वहां मौजूद किसान आंदोलनकारियों ने कहा कि वे सीसीटीवी फुटेज देखना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उन्हें मिटाया नहीं गया है. शाम 4 बजे उन लोगों ने ड्यूटी पर तैनात गार्ड को बेसमेंट ले चलने के लिए मना लिया जहां सीसीटीवी रिकार्डिंग रखी जाती हैं और ठीक उसी वक्त आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्टर वहां आ गया और देरी के लिए किसानों से माफी मांगने लगा. फिर हम लोग किसानों और पुलिस अधिकारी के साथ बेसमेंट में गए.

लगभग आधे घंटे तक किसानों ने पुलिस अधिकारी के सामने सीसीटीवी फुटेज देखने का प्रयास किया. एक तकनीशियन को बुलाया गया लेकिन वह नहीं बता पाया कि सीसीटीवी फुटेज कैसे चलाई जाए. इसके बाद तकरीबन 20 दंगा रोधी जवान परिसर में आ गए. उनका नेतृत्व तिलक नगर संभाग के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त एचएसपी सिंह कर रहे थे. एसीपी बिल्डिंग के बाहर इंतजार करने लगे और अन्य पुलिस वाले बेसमेंट में आ गए. पुलिस के हावभाव आक्रमक लग रहे थे. वे किसानों को कमरे से बाहर भगाने लगे. उन्होंने एक किसान का कालर पकड़ लिया और उसे झाड़ने लगे. एक पुलिस वाले ने सीसीटीवी फुटेज का हार्ड डिस्क निकाल लिया और उसे अपने पास रख कर बाहर चला गया. बाकी पुलिस वाले उसके पीछे चले गए.

पुलिस अधिकारी ने हमसे बात करने से इनकार कर दिया, यहां तक कि उन्होंने अपनी पहचान भी नहीं बताई और यह भी नहीं बताया कि वह किस पुलिस स्टेशन से आए हैं. हमने उनसे पूछा कि घटना के बाद यहां आने में उन्हें तीन घंटे क्यों लगे तो उन्होंने कहा कि वे लोग लंबी ड्यूटी करने के बाद दिन का भोजन कर रहे थे. उन्होंने इस बात का भी जवाब नहीं दिया कि कथित अपराध स्थल को सुरक्षित क्यों नहीं किया और क्यों पुलिस अधिकारी पहले नहीं पहुंचे ताकि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जा सकें. फिर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वह आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन से है लेकिन इसके अलावा उसने कोई जानकारी नहीं दी. पीछे के दरवाजे से बाहर निकलने से पहले एचएसपी सिंह मुड़े और उन्होंने कहा, “यदि आप यह जानना चाहते हैं कि सच में क्या हुआ है तो टाइम्स नाउ के पत्रकार से पूछ लें.” सिंह ने उनकी ओर कैमरा न करने के लिए भी हमें चेताया.

नवरीत के दादा डिबडिबा के अनुसार नवरीत के शव को बाद में आईटीओ से गाजीपुर बार्डर ले जाया गया. डिबडिबा स्वयं नवंबर से नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. 26 जनवरी को वह राजस्थान सीमा पर पहुंचे थे जहां कुछ सप्ताह पहले विरोध शुरू हुआ था. उस दिन दोपहर को उनके भतीजे ने उन्हें फोन पर नवरीत की मौत की खबर दी थी. खबर सुनने के बाद वह गाजीपुर बार्डर आ गए.

डिबडिबा ने गाजीपुर में बताया कि वह शव के साथ क्या करना चाहते हैं. “मैंने कहा कि अब नवरीत का शव आंदोलन की संपत्ति है. लेकिन वहां मौजूद कोई नेता नवरीत के शव की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुआ” और इसलिए परिवार वालों के कहने पर शव को उत्तर प्रदेश की उत्तरी सीमा पर स्थित उनके गांव डिबडिबा ले जाया गया.

उनका यह गांव राजपुर जिले में आता है और यहां गेहूं, सरसों, गन्ना और धान की फसलें पोपलर वृक्षों की कतार वाले खलियानों में बड़ी मात्रा में उगाई जाती हैं. हम डिबडिबा से 29 जनवरी को उनके एक माले वाले घर में मिले जहां नवरीत का बचपन गुजरा था. डिबडिबा ने कहा कि उन्हें अपने पोते की शहादत पर गर्व है और आंदोलन में सिर्फ दूसरों के बच्चे ही बलीदान करें ऐसी सोच सही नहीं है. “देखिए जब हम देश भर के नौजवानों को आंदोलन में शामिल होने को कह रहे हैं तो हमारे बच्चों को इससे बाहर नहीं रख सकते. यह अनैतिक बात होगी. हमें औरों के बच्चों को अपने बच्चों की तरह समझना होगा. उन्होंने बताया कि उन्होंने नवरीत के शव को देखा है. फिर अपनी ठोड़ी की ओर दिखाते हुए, आंखों में आंसू लिए कहा, “उसके इधर छेद था.“

नवरीत के शव के साथ गांव पहुंचने से पहले डिबडिबा रामपुर में पोस्टमार्टम के लिए रुके. उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में पोस्टमार्टम करवाना चाहते थे क्योंकि उत्तर प्रदेश में “बीजेपी सरकार है और हमें पता है कि गड़बड़ी हो सकती है.” उन्होंने कहा, “डाक्टरों ने हमसे कहा कि वह हमसे सहमत हैं कि नवरीत की मौत गोली लगने से हुई होगी लेकिन हम इसे लिख नहीं सकते. “डाक्टरों को हमारे रामपुर पहुंचने से पहले ही फोन आ गया होगा.” डिबडिबा ने बताया कि परिवार के लोगों ने उनसे कहा कि उन्होंने गाजीपुर से ही रामपुर प्रशासन के लोगों से बात कर ली थी और उन्होंने उन्हें कहा था कि वह पोस्टमार्टम का इंतजाम करवा देंगे.

रामपुर जिले के जिला मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह ने हमें बताया कि उनके कार्यालय को “स्थानीय गुप्तचर इकाइयों” ने मौत के बारे में सचेत किया था. उन्होंने बताया कि ऐसा किया जाना ऐसे मामलों की प्रक्रिया का हिस्सा है और उनका कार्यालय पोस्टमार्टम की तैयारी में तुरंत जुट गया. कुमार सिंह ने यह भी कहा कि डिबडिबा और उनके साथी इंद्रजीत सिंह पोस्टमार्टम नहीं होने देना चाहते थे और उन्होंने इसके महत्व के बारे में उन्हें समझाया था.

डिबडिबा और इंद्रजीत ने मजिस्ट्रेट के इस दावे से इनकार किया. इंद्रजीत ने हमें कहा कि “हमने उन्हें एक बार भी नहीं कहा कि हम पोस्टमार्टम नहीं चाहते. हम दिल्ली में पोस्टमार्टम करवाना चाहते थे लेकिन क्योंकि वहां नहीं हो पाया इसलिए रामपुर में ही किया जाना था.” हमने कुमार सिंह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आवश्यक जानकारियां न होने के संबंध में परिवार के आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का उन्हें अधिकार नहीं है.” जब हमने उनसे कहा कि क्या हम डाक्टरों या सीएमओ से इस संबंध में पूछ सकते हैं तो उन्होंने कहा हमारा ऐसा करना प्रक्रिया के खिलाफ होगा.

कुमार सिंह ने हमसे कहा कि पोस्टमार्टम होने से पहले ही डिबडिबा ने स्थानीय मीडिया के सामने दावा कर दिया था कि पुलिस की वर्दियों में आरएसएस के लोगों ने नवरीत पर गोली चलाई और मार दिया. अपने इस दावे के समर्थन में कुमार सिंह ने डिबडिबा का एक वीडियो क्लिप भी हमें भेजा. हमने वीडियो में डिबडिबा को ऐसा कोई दावा करते नहीं सुना बल्कि मीडिया से बात करते हुए डिबडिबा कह रहे हैं कि पुलिस ने उनके पोते पर गोली चलाई और उसे मार दिया और उसकी हत्या के लिए सरकार जिम्मेदार है. जब पत्रकार उनसे पूछते हैं कि उनके पोते को किसने मारा तो डिबडिबा जवाब देते हैं, “हम सिर्फ यही कह सकते हैं कि पुलिस ने मारा है. हमें यह नहीं पता कि वे लोग कौन थे या पुलिस की वर्दी में आरएसएस या बीजेपी के लोग थे. हमें यह बताना सरकार की जिम्मेदारी है.” उन्होंने यह भी कहा कि अगर नवरीत की मौत दुर्घटना थी तो शव तीन घंटे तक सड़क पर क्यों पड़ा रहा? पुलिस शव को अस्पताल क्यों नहीं ले गई और उनके पोते को प्राथमिक चिकित्सा क्यों नहीं दी गई?

नवरीत की मौत वाले दिन मौत के बारे में दिल्ली पुलिस ने कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया था लेकिन शाम आते-आते मुख्यधारा का मीडिया नवरीत की मौत को दुर्घटना बताने लगा. उसने दावा किया कि पुलिस ने कहा है कि नवरीत की मौत ट्रैक्टर पलटने से हुई है. मीडिया यह दावा एक छोटे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कर रहा था जिसमें ट्रैक्टर बैरिकेड से टकराकर पलटता दिखाई पड़ रहा है. लेकिन इस वीडियो की प्रमाणिकता स्पष्ट नहीं है और दिल्ली पुलिस ने औपचारिक रूप से इसे जारी नहीं किया था ना ही इसे मान्यता दी है.

और तो और यह सीसीटीवी फुटेज प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार के आरोपों का भी खंडन नहीं करता है. बलविंदर ने जिस स्थल से गोली चलाने का आरोप पुलिस पर लगाया है वह वीडियो में दिखाई नहीं देता. इसके अलावा ट्रैक्टर के पलट जाने से प्रत्यक्षदर्शियों का बयान खारिज नहीं हो जाता. वीडियो में ट्रैक्टर का सामने वाला हिस्सा ही दिखाई दे रहा है और वह एक ही दिशा से रिकार्ड हुआ है और उसमें ट्रैक्टर के पलट जाने का कारण प्रमाणिक रूप से साफ नहीं होता.

जिन मीडिया संस्थाओं ने वह वीडियो क्लिप जारी की थी उन्होंने इस बात की संभावना पर गौर नहीं किया की ट्रैक्टर नवरीत को गोली लगने के बाद भी पलट सकता था. उस शाम कई पत्रकारों ने यह फैसला सुना दिया कि किसानों के आरोप झूठे हैं. टाइम्स आफ इंडिया के पत्रकार राजेश शेखर झा उन पहले लोगों में से थे जिसने सीसीटीवी क्लिप ट्वीट किया था. शाम 6 बज कर 11 मिनट पर उन्होंने एक कैप्शन लगाकर वीडियो ट्वीट किया, “दिस इज हाऊ दि मैन ट्राइड टू ब्रेक दि बैरिकेड एट ए हाई स्पीड एंड क्रैज्ड हिज ट्रेक्टर. डाइड एट दि स्पोट.” (“देखिए, ऐसे इस आदमी ने तीव्र गति में बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और ट्रैक्टर भेड़ दिया. मौके पर उसकी मौत हो गई.”)

इसके कुछ ही क्षणों बाद वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया कि “वाइल दि फार्म प्रोटेस्टर्स क्लेम दैट दि डिसीस्ड नवनीत सिंह वाज शाट एट वाइ दिल्ली पुलिस वाइल आन ए ट्रैक्टर, दिज वीडियो क्लियरली शोज दैट दि ट्रैक्टर ओवरटंर्ड वाइल ट्राइंग टू ब्रेक दि पुलिस बैरिकेड्स. दि फार्म प्रोटेस्टर्स एलिगेशंस डोंट स्टैंड. पोस्टमार्टम अवेटेड.”

(आंदोलनकारी दावा कर रहे हैं कि मृतक नवनीत सिंह को दिल्ली पुलिस ने तब गोली मारी जब वह ट्रैक्टर पर था, यह वीडियो साफ दिखाता है कि पुलिस बैरिकेडों को तोड़ने की कोशिश में ट्रैक्टर पलट गया. कृषि आंदोलनकारियों के आरोपों में दम नहीं है. पोस्टमार्टम का इंतजार.”)

शाम 7ः08 बजे पर समाचार एजेंसी न्यूज एशियन इंटरनेशनल ने ट्वीट किया, “देखिए, आईटीओ पर एक आंदोलनकारी किसान का ट्रैक्टर बैरिकेड से टकराया और पलट गया : दिल्ली पुलिस.” आडियो में आज कोलन दिल्ली पुलिस. एएनआई ने न्केवल दिल्ली पुलिस की खानी को प्रचारित करने में मदद की बल्कि दिल्ली पुलिस का श्रेय देते हुए तवीत किया, “सीसीटीवी विजुअल्स : दिल्ली पुलिस.” शाम 7ः34 पर एनडीटीवी ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसका शीर्षक था, “आन कैमरा एक्सीडेंट डेट लेफ्ट फार्मर डे ड्यूरिंग प्रोटेस्ट.”

यह स्पष्ट नहीं है कि कैसे इन पत्रकारों ने किसानों के आरोपों पर ध्यान नहीं दिया. सरदेसाई और एनडीटीवी ने माना कि किसानों ने आरोप लगाए हैं इसके बावजूद बिना किसी तर्क के मौत के लिए दुर्घटना को जिम्मेदार बताया. रात 2.51 को सरदेसाई ने ट्वीट किया, “45 साल के नवरीत कथित रूप से आईटीओ में पुलिस की गोली से मारा गया. किसानों ने मुझे बताया कि यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा üग्राउंड जीरो.” इसके बाद उन्होंने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया और सीसीटीवी क्लिप ट्वीट किया. क्लिप को पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “आंदोलनकारी किसानों द्वारा आईटीओ और लाल किला इलाके में भारी उकसावट के बावजूद दिल्ली पुलिस ने संयम दिखाया है. उन्होंने आंसू गैस चलाए लेकिन गोली चलाने का कोई सबूत नहीं है, हालांकि किसान इसका दावा कर रहे हैं. आरोपों और प्रति आरोपों के बीच पुलिस की कार्रवाई प्रशंसनीय है.”

हमने इन सभी मीडिया संस्थानों से यह पूछने के लिए संपर्क किया कि उन्हें यह सीसीटीवी वीडियो क्लिप कैसे मिली? इसकी प्रमाणिकता की जांच कैसे की और इस एकमात्र क्लिप के आधार पर प्रत्यक्षदर्शी के आरोपों को पोस्टमार्टम से पहले ही खारिज कैसे कर दिया? रिपोर्ट में शामिल एक एनडीटीवी पत्रकार ने शाम को अपने चैनल पर खबर के शीर्षक को यह दावा करते हुए सही ठहराया कि यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि नवरीत की मौत कैसे हुई क्योंकि दिल्ली पुलिस ने अनौपचारिक रूप से उन्हें यह जानकारी दी है कि उसकी मृत्यु दुर्घटना के कारण हुई थी. जारी की गई रिपोर्ट में पुलिस द्वारा फायरिंग के आरोप का भी उल्लेख किया गया और यह भी बताया गया कि शव का पोस्टमार्टम नहीं किया गया था, हमने उनसे पूछा कि उन्होंने मौत के कारण का कैसे पता लगाया क्योंकि इसे खबर के शीर्षक में एक सच्चाई के रूप में पेश किया गया था. पत्रकार ने जवाब दिया, “हम सभी जानते हैं कि एक शीर्षक क्या होता है और एक रिपोर्ट क्या होती है? कृपया अपने मालिकों को आपको समझाने के लिए कहें. अगर आप यह समझ जाएंगे तो आप ऐसे मूर्खतापूर्ण सवाल नहीं पूछेंगे.” पत्रकार ने इसके बाद फोन काट दिया. एनडीटीवी की उस रिपोर्ट के संपादक चंद्रशेखर श्रीनिवासन और रिपोर्टर सुनील प्रभु ने उन्हें भेजे गए आधिकारिक सवालों का जवाब नहीं दिया. एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश, सरदेसाई, शेखर झा ने भी उनके ट्वीट को लेकर पूछे गए आधिकारिक सवालों का जवाब नहीं दिया.

मृत्यु के बाद से ही नवरीत की मौत के कारण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उनके परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर कई अन्य मीडिया चैनलों ने खबरें चलाई हैं. 29 जनवरी को, टाइम्स आफ इंडिया के बरेली ब्यूरो ने “यूपी फार्मर्स आटोप्सी फाइंड्स ब्रेन मैटर स्पिल्ड आउट आफ अवर्टेड वूंड,” शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की. अखबार के लेख में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के विवरण के साथ-साथ रिपोर्ट को लेकर परिवार के आरोपों के बारे में बताया गया है. इसमें नवरीत के चाचा इंद्रजीत ने कहा कि “हमें एक डाक्टर ने बताया था कि गोली लगने का निशान दिखाई दे रहा है. पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद, हमने शांतिपूर्वक शव का अंतिम संस्कार किया. हमने कभी नहीं सोचा था कि हमें धोखा दिया जाएगा.“

परिवार द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर लगाए आरोपों पर 30 जनवरी को द वायर ने भी एक खबर प्रकाशित की. नवरीत के पिता विक्रमप्रीत सिंह ने द वायर को बताया, “उसके शव को देखने वाले हर व्यक्ति ने बताया कि उस पर गोली का घाव था. पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों में से एक डाक्टर ने कहा कि वह गोली का घाव है लेकिन वह इसे लिख कर नहीं दे सकता.” द वायर की रिपोर्ट में, यह बताते हुए कि चोट का निशान गोली से लगा घाव हो सकता है, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि, “ऐसा लगता है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बड़ी सावधानी से गोली की चोट की खबर को छुपाने के लिए तैयार किया गया है.“

नवरीत की मृत्यु के अगले दिन 27 जनवरी को राजस्थान के मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता अशोक गहलोत ने डिबडिबा को अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए पत्र लिखा. “मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि 26 जनवरी 2021 को दिल्ली में किसानों की रैली के दौरान गोली लगने के बाद आपके पोते श्री नवरीत सिंह जी की मृत्यु हो गई.“ उन्होंने आगे लिखा कि, “उनकी यह शहादत हमेशा याद रखी जाएगी.“

1 फरवरी को आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर पंजाबी एकता पार्टी बनाने वाले सुखपाल सिंह खैरा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर नवरीत की मौत की न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए खैरा ने लिखा कि यह “रिपोर्ट गोली के कारण उसकी मौत की ओर इशारा करता है.“ खैरा ने हमसे कहा, “मेरा मानना है कि यह एक हत्या है और इसकी न्यायिक जांच की जरूरत है. दिल्ली सरकार इसकी जांच के आदेश दे सकती है.” उन्होंने आगे कहा, “इस बात की भी पूरी संभावना है कि पहले उसे गोली मारी गई हो और फिर उसका ट्रैक्टर बैरिकेड से टकराकर पलट गया हो. अगर हम जांच करते हैं, तो हमें पता चल जाएगा कि यह मौत दुर्घटना से हुई थी या गोली से.“

26 जनवरी को शाम 4.9 बजे कारवां ने नवरीत की मौत के चश्मदीद गवाह हरमनजीत को लेकर कई ट्वीट किए थे. शाम तक सीसीटीवी फुटेज के पुलिस द्वारा अपने अनुसार व्याख्या करने को लेकर कारवां ने अपने ट्विटर अकाउंट पर रिपोर्टें प्रकाशित करना जारी रखा. तब से अब तक कारवां के संपादक और मालिक के साथ-साथ अन्य पत्रकारों के खिलाफ दस एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. मध्य प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में छह और नोएडा, भोपाल, गुड़गांव, बेंगलुरु और दिल्ली में चार एफआईआर दर्ज की गई हैं. शिकायत में कांग्रेस नेता शशि थरूर, पत्रकार मृणाल पांडे, जफर आगा और सरदेसाई और कारवां के प्रकाशक परेश नाथ, प्रधान संपादक अनंत नाथ और कार्यकारी संपादक विनोद के जोस समेत कुल सात लोगों पर आरोप लगाया गया है. यद्यपि प्रत्येक शिकायत अलग-अलग लोगों ने दर्ज कराई है लेकिन सभी ने शिकायत समान लोगों के खिलाफ ही दर्ज कराई है, जिसमें कहा गया है कि कारवां और अन्यों ने नवरीत की मौत पर ट्वीट और रिपोर्ट के माध्यम से हिंसा भड़काने का प्रयास किया. शिकायतों में कई प्रकार के आरोप लगाए गए हैं, जिनमें राजद्रोह, दुश्मनी को बढ़ावा देना, धार्मिक भावनाओं को भड़काना और आपराधिक धमकी देना शामिल है.

हमने पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव और दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी ईश सिंघल को कई विस्तृत प्रश्न भेजे. सिंघल ने हमें मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह से बात करने को कहा. हमने परिवार और चश्मदीदों के आरोपों और सीसीटीवी क्लिप को लेकर डीसीपी से कई सवाल पूछे. हमारे सवालों का जवाब दिए बिना डीसीपी ने कहा, “आईपी एस्टेट के पुलिस थाने में आपके आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा भ्रामक और गलत सूचना फैलाने पर एफआईआर दर्ज की गई है. आपके इरादे बहुत कुछ बताते हैं…. आप चीजों को एक अलग मोड़ देना चाहते थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण साफ तौर पर बताया गया है.“

हमने डीसीपी को बताया कि कारवां ने प्रत्यक्षदर्शी के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष को ही ट्वीट किया था. फिर हमने मामले पर पुलिस से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए अपने सवालों को दोहराया. डीसीपी ने जवाब दिया, “हम अदालत में भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत सभी जरूरी सबूत पेश करेंगे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ तौर मौत का कारण बताया गया है कि उस पर कोई गोली नहीं चलाई गई थी.” उन्होंने आगे कहा, “आप उन चीजों की कल्पना कर रहे हैं जो कभी नहीं हुईं.“

अगर पुलिस 26 जनवरी को आंध्रा एजुकेशन सोसायटी में हिरासत में ली गई सीसीटीवी क्लिप को जारी कर देती या फिर मीडिया चैनलों द्वारा चलाई जा रही वीडियो क्लिप का स्त्रोत बात देती, तो नवरीत की मौत से जुड़ी कई अटकलें दूर हो जातीं. द गार्जियन से बात करने वाले ब्रिटिश चिकित्सक सहित दो शव परीक्षण विशेषज्ञों द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर की गई विवेचना, पुलिस से नवरीत की मौत पर स्पष्टीकरण की मांग को और बढ़ाया है. पुलिस ने कारवां को किसी भी तरह का स्पष्टीकरण देने से इनकार कर दिया. यदि पुलिस की तरफ से ऐसा कोई स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो हम इस रिपोर्ट के अगले भाग में जरूर बताएंगे.

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