दृष्टिकोणपहला पन्नाहमारा- नज़रिया

संवेदनहीनता की पराकाष्ठा कहूं या एक मूर्ख तानाशाह का आत्मनिर्भर भारत

आज से चुनाव ख़त्म हो गया .. अब दो मई का इंतज़ार करने की जरूरत नहीं है....

श्याम लाल शर्मा /चौथा अक्षर


चारो तरफ हाहाकार मचा है , गलियां सूनी हो गयी हैं ,बाजार बंद पड़े हैं, अस्पतालों में बिना आक्सीजन के सांसों को गिनते मरीज और उनके परिजन चीत्कार कर रहे हैं , लाशों से श्मशान भरे पड़े हैं उनका अंतिम संस्कार करने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, पूरा देश त्राहि त्राहि कर रहा है और हमारे देश के प्रधान पहले उन्होंने कहा हम कोरोना की जंग जीत चुके हैं और वे अपने कुनबे के तमाम आला मंत्रियों , मुख्यमंत्रियों , सिपहसालारों , सीबीआई , इन्कमटैक्स , परवर्तन निदेशालय ई डी , चुनाव आयोग , प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया जैसी तमाम संस्थाओं को अपनी ग्रिफ़त में लेकर राज्यों की सत्ता हथियाने के लिए निकल पड़े ..! धनबल के आधार पर लाखों की रैलियां कर के लोकप्रियता दिखाना ज्यादा जरूरी था, भले ही उस चुनावी रैली में लोग बीमार हो जाएं .. मर भी जाएँ तो भी क्या ?


इस देश में सिर्फ चुनाव जरूरी है … रैलियां जरूरी हैं। बधाई हो प्रधान जी आपको ! एक बार फिर आप इस देश की जनता को मुर्ख बनाने में कामयाब हो गए ….आपके भक्तों को बधाई हो ! जिनके भाई, बंधू, नाते, रिश्तेदार, कोरोना की इस त्रासदी में लाशों में तब्दील होकर श्मशान घाटों में अपनों को दफ़नाने के लिए , चिताओं में जलाये जाने के लाइनों में लगे हैं लेकिन उनकी नजर में आप उनके मशीहा हैं ….आपकी इस व्यवस्था से घिन आ रही है लोग अपने बीमार लोगों को लेकर चीखते, चिल्लाते ,गिड़गिड़ाते, लाशों में तब्दील होते चार कंधे तो छोड़िए लोग ठेला, गाड़ी, साईकिल पर अपनों की लाशों को लेकर अंतिम संस्कार करने के लिए घूम रहे हैं लोगों को देखने की हिम्मत नहीं हो रही है लेकिन आप इस देश के मुखिया हैं, प्रधान हैं , प्रधानमंत्री हैं अगर आपकी आँखों में शर्म होती तो अबतक आप रातदिन एक कर देते लेकिन आप इस देश के प्रधान व्यापारी हैं सौदा करने में माहिर हैं हो सकता है आप देश की जनता के लाशों का सौदा कर रहे हों इसे आपके आलावा दूसरा नहीं जनता।

आज से चुनाव ख़त्म हो गया .. अब दो मई का इंतज़ार करने की जरूरत नहीं है…. अभी से ही इसके लिए आप सभी दलों के राजनेताओं को हार्दिक बधाइयां…. प्रधान जी ! आपको तो एहसास ही नहीं होगा कि आपकी इस दो मई की चिंता ने कितने गरीब मजदूर की दो जून की रोटी भी छीन ली। यह सब देख कर आपको अफ़सोस नहीं होता ? आप कितने क्रूर राजनेता हैं ? अगर आपकी पार्टी और आप विपक्ष में होते तो अबतक आप उस सरकार का जीना हराम कर देते।

आप खुशकिश्मत हैं कि आपको एक कमजोर, लाचार, बुजदिल विपक्ष और असहाय जनता मिली है जो ईंट से ईंट बजाना भूल गयी है तभी तो कहीं से भी एक भी आवाज नहीं आ रही है कि लाशों के ढ़ेर पर व्यापार और चुनाव जीतने की तमन्ना रखने वाले प्रधानमंत्री इस्तीफा दो ! प्रधानमंत्री जी ! इंसानों की लाशों के ऊपर बिछी इन कुर्सियों पर बैठ कर एक ट्वीट ज़रूर कर दीजियेगा .. दो गज दूरी मास्क है जरूरी !

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