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दिल्ली विश्वविद्यालय के नए कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कार्यभार ग्रहण किया

डीटीए ने नए कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह के कार्यभार ग्रहण करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी

चौथा अक्षर संवाददाता
नई दिल्ली

Yogesh Singh

दिल्ली विश्वविद्यालय के नए वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश सिंह ने शुक्रवार को अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन ( डीटीए ) के अध्यक्ष डा. हंसराज सुमन ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी है ।उन्होंने आशा व्यक्त की है कि वह शिक्षकों ,कर्मचारियों व छात्रों के लंबित मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने की कोशिश करेंगे । उन्होंने बताया है कि प्रोफेसर सिंह इससे पहले एनएसआईटी के डायरेक्टर और तीन बार विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर रह चुके हैं । उनका शैक्षिक जगत में काफी योगदान रहा है । वे लंबे समय से शिक्षा और उसमें होने वाले बदलावों में अपना सहयोग देते रहे है । उच्च शिक्षा में नए-नए प्रयोगों को पाठ्यक्रमों में शामिल करने ,शिक्षण संस्थानों में सुधार करने में अहम भूमिका निभाई है ।

विज्ञान एवं तकनीकी विषय में एक्सपर्ट प्रोफेसर योगेश सिंह विज्ञान की शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही आशा है कि वैज्ञानिक सोच को भी विश्वविद्यालय में और मजबूत करेंगे । दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन उनको शुभकामनाएं देता है तथा उम्मीद करता है कि पेंडिंग पड़ी हुई नियुक्तियों को पुनः गति प्रदान करेंगे और जल्द से जल्द उन तमाम एडहाक शिक्षकों को परमानेंट करें जो पिछले एक दशक से बिना किसी स्थायी नियुक्ति को भी विश्वविद्यालय की शिक्षा के स्तर को बचाने में काफी सफल रहे है और कोरोना जैसी महामारी में भी अथक परिश्रम करते हुए विश्वविद्यालय के छात्र /छात्राओं के मनोबल को नीचे नहीं गिरने दिया , उनके अविश्वमरणीय योगदान के कारण ही हम देख रहे है कि आन लाइन क्लास होने के बावजूद आज यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं में भी छात्रों ने टापरैंक प्राप्त करके विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया।

प्रोफेसर सिंह के कार्यभार ग्रहण करने के बाद डा.हंसराज सुमन ने बताया है कि प्रोफेसर सिंह अपने ऊर्जावान और कर्मठ व्यक्तित्व के लिए हमेशा से जाने जाते है । दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर का पदभार ग्रहण करने से पहले ये तीन बार वीसी रह चुके है । उनका यह अनुभव दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थान के लिए जहाँ लाखों लोग शिक्षण और शिक्षा से जुड़े हुए हो उसकी बागडोर लाजमी है कि कुशल प्रशासक के हाथ में जाए । उनका कहना है कि पिछले कुलपतियों की निराशाजनक उपलब्धियां इसकी गवाह है कि विश्वविद्यालय में अनेक परियोजनाएं ठप्प पड़ गई और नियुक्तियों से लेकर अनेक ऐसे भविष्योन्मुखी कार्य योजनाएं ठंडे बस्ते में दब गई जिन्हें भविष्य के अकादमिक विकास के लिए पुनः आरम्भ करना नए वाइस चांसलर के लिए बड़ा उत्तरदायित्व और चुनौती दोनो है । साथ ही यह आशा व्यक्त की है कि प्रोफेसर योगेश सिंह के डीयू कुलपति बनने से एडहाक शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की राह आसान होगी । इसके साथ ही शैक्षिक व गैर शैक्षिक कर्मचारियों की लंबे समय से रुकी हुई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई है ।

डा. हंसराज सुमन का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में और कुलपति के रूप में प्रोफेसर सिंह का लंबा अनुभव है जो डीयू के लिए अच्छा संकेत है । उनका कहना है कि वे ऐसे समय में डीयू की बागडोर संभाल रहे हैं जब नई शिक्षा नीति को लागू किया जा रहा है । उन्होंने आशा जताई है कि वे यहाँ के छात्रों के लिए शिक्षकों के साथ मिलकर ऐसा पाठ्यक्रम तैयार कराएंगें जिसे पूरा करने के बाद छात्रों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे । डा. सुमन ने बताया है कि डीटीयू में उन्होंने शिक्षा को रोजगार से जोड़कर छात्रों को अपने पैरों पर खड़ा किया । शिक्षा ग्रहण करने के बाद यदि रोजगार नहीं है तो वह खुद अपना रोजगार स्थापित कर सकें ।

डा. सुमन ने प्रोफेसर सिंह से मांग की है कि जिस तरह से कालेज और विभागों के शिक्षकों की प्रमोशन जारी है वह उसी तरह से जारी रहे ,प्रमोशन के बाद शिक्षा मंत्रालय व यूजीसी द्वारा जारी सर्कुलर को लागू करते हुए मिशन मोड़ में एससी/एसटी/ओबीसी व ईडब्ल्यूएस शिक्षकों के बैकलाग पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकलवाएं । उन्होंने बताया है कि डीयू में शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कई बार विज्ञापन निकाले जा चुके हैं ,उन विज्ञापनों की समय सीमा समाप्त हो चुकी है ।

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