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46 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 6481 पद खाली पड़े हुए हैं, विश्वविद्यालयों द्वारा स्क्रीनिंग होने के बावजूद इन्हें भरा नहीं गया -डा. हंसराज सुमन

’ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री द्वारा राज्य सभा में दिया बयान । केंद्रीय विश्वविद्यालयों में विशेष अभियान और मिशन मोड तरीके से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के निर्देश संसद में एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा ।

चौथा अक्षर संवाददाता, नई दिल्ली-
आल इंडिया यूनिवर्सिटीज एंड कालेजिज एससी /एसटी , ओबीसी टीचर्स एसोसिएशन के चेयरमैन डा. हंसराज सुमन ने बताया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री डा. सुभाष सरकार ने राज्य सभा में 46 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की रिक्तियों का ब्यौरा देते हुए बताया है कि शिक्षा मंत्रालय ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को विशेष अभियान और मिशन मोड तरीके से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के निर्देश संसद में एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा है । केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने 9 फरवरी 2022 को राज्य सभा में संसद सदस्य श्री नीरज शेखर के अतारांकित प्रश्न संख्या-828 के उत्तर में 46 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 6481 पद खाली पड़े हुए है । डा. सुमन का कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लंबे समय से प्रोफेसर , एसोसिएट प्रोफेसर व सहायक प्रोफेसरों के पद खाली पड़े है । इन पदों को भरने के लिए कई बार विज्ञापन भी जारी हो चुके है , विश्वविद्यालयों द्वारा स्क्रीनिंग होने के बावजूद इन्हें भरा नहीं गया ।

डा. सुमन ने बताया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद के संबंध में माननीय संसद सदस्य श्री नीरज शेखर द्वारा दिनांक 9 फरवरी 2022 को पूछे गए राज्य सभा अतारांकित प्रश्न संख्या -828 में खाली पड़े पदों के विषय में जानकारी दी गई है । विश्वविद्यालयों ने विभागों में खाली पड़े पदों का ब्यौरा दिया है , इसमें संबंधित कालेजों के आंकड़े नहीं है । डा. सुमन के अनुसार जिन विश्ववविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पद है उनमें दिल्ली विश्वविद्यालय – 859 , इलाहाबाद विश्वविद्यालय- 611 , बनारस हिंदू विश्वविद्यालय – 499 , अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय- 359 , जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ( जेएनयू )- 317 , डा.हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय- 230 , हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय – 230 , जामिया मिलिया इस्लामिया – 211 , पुदुचेरी विश्वविद्यालय- 199 , विश्व भारती (पश्चिम बंगाल )- 191 , पूर्वाेत्तर पर्वर्तीय विश्वविद्यालय – 175 , हैदराबाद विश्वविद्यालय – 153 , इग्नू -148 , त्रिपुरा विश्वविद्यालय-143 , उड़ीसा केंद्रीय विश्वविद्यालय – 137 , हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय-129 , गुरु घासीदास विश्वविद्यालय -124 , मणिपुर विश्वविद्यालय-119 , राजस्थान विश्वविद्यालय -100 , हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय- 97 , कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय -91 , राजीव गांधी विश्वविद्यालय ( अरुणाचल प्रदेश )- 89 , पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय – 89 , मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय- 86 , केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय – 81 , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय-80 , नागालैंड विश्वविद्यालय -80 , असम विश्वविद्यालय-78 , सिक्किम विश्वविद्यालय-73 , गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय -68 , झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय -61 , दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय -58 , जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय -58 , मिजोरम विश्वविद्यालय -58 शिक्षकों के पद खाली है । उन्होंने बताया है कि 6481 रिक्तियों की संख्या 1 अक्टूबर 2021 तक की है ।

     

डा. सुमन ने बताया है कि इससे पहले भी शिक्षा मंत्रालय के सचिव श्री अमित खरे ने एससी/एसटी/ओबीसी शिक्षकों के बैकलाग पदों को भरने के लिए 24 अगस्त 2021 को एक सर्कुलर जारी करते हुए सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों/ उच्च शिक्षण संस्थानों को यह निर्देश दिए थे कि बैकलाग पदों को किलियर करने के लिए 5 सितंबर 2021 से 4 सितंबर 2022 तक मिशन मोड़ में एक साल की अवधि के भीतर भर दिया जाना चाहिए । डा.सुमन का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने रिक्त पदों का ब्यौरा देते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में 6259 पद खाली बताए थे लेकिन अब बढ़कर –6481 हो गए हैं । इसमें अनुसूचित जाति की- 1012 वैकेंसी है जबकि अनुसूचित जनजाति की- 592 , ओबीसी की 1767 , ईडब्ल्यूएस की- 805 , दिव्यांगों की -350 वैकेंसी है। उनका कहना है कि ये वैकेंसी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विभागों की है जबकि उससे सम्बद्ध कालेजों में हजारों पद शिक्षकों के रिक्त पड़े हुए है जिसे भरा नहीं गया । डा. सुमन ने बताया है कि शिक्षा मंत्रालय के सर्कुलर से पहले यूजीसी विश्वविद्यालयों/कालेजों को स्थायी नियुक्ति संबंधी कई बार सर्कुलर जारी कर चुका है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने यूजीसी के निर्देशों का पालन करते हुए अपने विभागों और कालेजों ने लगभग 5000 पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाले थे लेकिन लगभग 150 पदों पर नियुक्ति करने के बाद यह प्रक्रिया बंद कर दी गई । उनका कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों और कालेजों में 5000 से अधिक वैकेंसी है जिसे लंबे समय से नहीं भरा गया ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने से पूर्व शिक्षकों के पद भरे जाए –

डा. हंसराज सुमन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मांग की है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने से पूर्व देशभर के केंद्रीय , राज्यों व मानद विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पड़े पदों को भरने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों / कुलसचिवों को सर्कुलर जारी किया जाए जिसमें इन पदों को भरने की समय सीमा निश्चित की जाए तथा जो विश्वविद्यालय इन नियमों का पालन न करें उन विश्वविद्यालयों का अनुदान बंद करें ।

उन्होंने बताया है कि शिक्षा मंत्रालय की नीति व उसके द्वारा जारी सर्कुलर तथा यूजीसी के निर्देशों से एडहाक टीचर्स व अभ्यर्थियों को बार-बार आशा की किरण दिखलाई जाती है किंतु उसका कोई सुखद परिणाम देखने को नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि केंद्रीय राज्यमंत्री ने 46 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्तियों का होना और उन्हें भरना एक सतत प्रक्रिया है । इसलिए शिक्षा मंत्रालय ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को विशेष अभियान और मिशन मोड तरीके से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के निर्देश जारी किए हैं ।उन्होंने जल्द से जल्द आरक्षित वर्गाे का बैकलाग किलियर करने की मांग करते हुए स्थायी शिक्षकों के पदों को भरने की मांग की है ।

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