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‘..योगी जी ! तो अब’ न्यायालयों के दरवाजे बन्द कर दीजिए!

योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस रफ्तार से प्रदर्शनकारियों के घरों पर बुलडोजर चलवा रही है - वह अंग्रेज़ी राज से बुरा है. शुक्रवार को प्रदर्शन होता है और रविवार को घरों पर बुलडोज़र चलवा दिए जाते हैं. यह किस तरह का न्याय है, किस तरह की व्यवस्था है? मान लेते हैं कि यही व्यवस्था सही है तो फिर यह सबके लिए लागू होनी चाहिए न? हर अपराधी के घर गिराए जाने चाहिए चाहे वो हिंदू या मुसलमान. पर मकसद व्यवस्था कायम करना या कानून का राज स्थापित करना नहीं है. यह हम सब जानते हैं. मकसद एक समुदाय में भय और खौफ पैदा करना है. उन्हें जलील करना है.

श्याम लाल शर्मा / नई दिल्ली

प्रयागराज में बीते सप्ताह जुमे की नमाज़ के बाद हुए पथराव और हिंसा के मामले में पुलिस ने जावेद मोहम्मद को मुख्य अभियुक्त बताते हुए गिरफ़्तार किया और फिर रविवार को प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने उनके घर को ढहा दिया. प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने कहना है कि जावेद मोहम्मद का घर अवैध तरीके से बनाया गया था और उन्हें मई महीने में ही इस सिलसिले में नोटिस भेजा गया था. अब प्रयागराज विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर लोग अलग-अलग सवाल खड़े कर रहे हैं. जब यह मकान जावेद की पत्नी परवीन फात्मा के नाम है तो प्राधिकरण ने जावेद के नाम नोटिस चस्पा कर मकान कैसे तोड़ दिया? अगर पति आरोपी हैं तो क्या पत्नी की प्रॉपर्टी पर इस तरह की कार्रवाई करना जायज है? दूसरा सवाल, अगर मकान पहले से अवैध था तो दो दशकों से नगर निगम इस मकान पर हाउस और पानी का टैक्स कैसे वसूल कर रहा था? जावेद मोहम्मद की छोटी बेटी सुमैया और परिवार के वकील केके रॉय कहते हैं कि घर उनके पिता नहीं बल्कि मां परवीन फ़ातिमा के नाम है.“ और उनका परिवार बीते 20 सालों से उस घर में रह रहे हैं.

अपने पिता को प्रयागराज हिंसा का सूत्रधार बताए जाने के पुलिस के दावे पर सुमैया ने कहा, “ये हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि हमारे अब्बा को फंसाया जा रहा है. उनका इस चीज़ में कोई हाथ नहीं था. उनका आखि़री फ़ेसबुक पोस्ट देखेंगे तो उसमें भी वो अमन और चैन की बात कर रहे हैं. जो इंसान अमन और चैन की बात कर रहा था, और जो हमेशा प्रशासन के साथ सहयोग करता रहा है, वो अचानक से रातोंरात मास्टरमाइड कैसे बन गया?“

जावेद मोहम्मद को लेकर किए गए पुलिस के आरोपों पर सुमैया ने कहा, “इस प्रदर्शन में उनका कोई हाथ नहीं था, ना ही उन्होंने किसी को बुलाने की कोशिश की थी, अगर पुलिस आरोप लगा रही है तो वो किस आधार पर लगा रही है, वो हमारे सामने पेश क्यों नहीं कर रही है. सच बात तो ये है कि मेरे पिता लोगों को प्रदर्शन में आने से मना कर रहे थे. उन्होंने अपने आखि़री पोस्ट में भी यही अपील की थी कि अगर किसी को प्रदर्शन करना है तो वो प्रशासन के पास जाए, इस तरह से सड़क पर हो-हल्ला न करे.“

सुमैया ने बताया कि करीब साढ़े आठ बजे पुलिस उनके पिता को बातचीत के नाम पर लेकर गई. इसके चार-पाँच घंटे बाद पुलिस सुमैया और उनकी माँ परवीन फ़ातिमा को भी बातचीत के नाम पर ही साथ लेकर गई. उन्होंने कहा, “हमें झूठ बोलकर ले जाया गया. हमें बोला गया जहाँ अब्बू है, वहीं लेकर जाया जा रहा है लेकिन हमें महिला थाने ले गए. पहले हमसे नाम पूछा गया और ये भी कि अब्बू घर में किस तरह की बातें करते हैं. रात के समय हमें कहा गया कि हम फ़ोन कर के घर ख़ाली करवाएं.“


सुमैया ने कहा, “पहले पुलिस का बर्ताव हमारे साथ ठीक था. लेकिन एक-एक कर के सारी महिला कॉन्सटेबल आईं और अजीब बातें करने लगीं, हमें धमकाने लगीं. उसके बाद एक पुरुष कॉन्स्टेबल आए और मेरी अम्मी को गाली दी हिंदी में. हम शुक्रवार और शनिवार रात वहीं रहे. इसके बाद रविवार को हमें एक रिश्तेदार के यहाँ छोड़ा गया. इसके कुछ ही देर बाद हमारे घर को तोड़ दिया गया.“ ज़मीन की मिल्कियत के सवाल पर सुमैया ने कहा, “ये ज़मीन मेरी अम्मी की है. उन्हें हमारे नाना ने ये तोहफ़े में दी थी. हमारे पास सारे कागज़ हैं. हम जो वॉटर और हाउस टैक्स भरते थे वो भी अम्मी के नाम आता था, क्योंकि ज़मीन अम्मी के नाम पर थी.“

ये पूछे जाने पर कि ऐसी कौन सी वजह थी जिसके लिए घर को ढहाने की कार्रवाई की गई, सुमैया ने बताया, “प्रयागराज विकास प्राधिकरण से नक्शा पास नहीं था. उसकी वजह थी. कई बार हमारे घर में इसपर बात हुई, अब्बू चिंतित थे कि घर का नक्शा पास नहीं हुआ. लेकिन उसके लिए कम से कम 25-30 लाख रुपये लग रहे थे.“ उन्होंने कहा कि प्रयागराज में कई घर हैं जिनके नक्शे पास नहीं हुए हैं.
जावेद मोहम्मद के घर से अवैध असलहे और आपत्तिजनक सामग्री मिलने के पुलिस के दावे पर उनकी बेटी ने कहा, “जब हमारा घर गिराया जा रहा था तो उसकी लाइव रिकॉर्डिंग हो रही थी. अंदर से जो सामान निकल रहा था, वो दिख रहा था. सबने देखा. उस वक्त हमारे घर से न तो हथियार मिला और न कुछ और…जब घर टूट गया उसके बाद उन्हें हथियार मिल रहे हैं.“ सुमैया ने ये भी बताया कि उनके पिता के पास एक लाइसेंसी बंदूक है लेकिन चुनाव के समय ये भी प्रशासन के पास जमा कर दी गई थी और अब तक समय ही नहीं मिल सका है कि हम बंदूक वापस घर ले आएं.उन्होंने कहा कि घर तो दोबारा बन जाएगा लेकिन अब एक परिवार दोबारा नहीं बन पाएगा. उन्होंने एक परिवार को तोड़ दिया है.


वहीं परिवार के वकील केके रॉय ने भी यही बात दोहराई और कहा कि घर की मालिक परवीन फ़ातिमा हैं न कि जावेद मोहम्मद. उन्होंने कहा, “बुलडोज़र पॉलिसी ख़ुद में कानून और संविधान के विरुद्ध की गई कार्रवाई है. इस मामले में तो दोहरी गलती हुई है. पहले तो उन्होंने एलान किया कि वो जावेद मोहम्मद का घर ध्वस्त करेंगे लेकिन जिस घर को उन्होंने गिराया वो जावेद मोहम्मद का नहीं था.“
उन्होंने कहा कि पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और 9 जून को चस्पा किया उसमें जिस मई के नोटिस का हवाला दिया गया, सब मैन्युफैक्चरड डॉक्यूमेंट हैं. एक दिन का समय भी न देकर घर गिरा दिया गया. रॉय ने ये भी कहा कि भले ही नक्शा पास न हो फिर भी उत्तर प्रदेश अर्बन डेवलेपमेंट एक्ट में घर गिराने का प्रावधान नहीं है. वो घर सील कर सकते थे. केके रॉय ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में भी इस ध्वस्तीकरण के ख़लिफ़ याचिका दायर करेंगे. जावेद मोहम्मद की बीवी और बच्चों को जो अवैध तरीके से हिरासत में रखा गया वो मामला हम अलग से हाई कोर्ट में उठाएंगे.

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