• प्रयागराज के फूलपुर में नीलगायों ने रौंदी खून-पसीने की कमाई, फसल बचाने की जंग हार रहे किसान, रूदापुर, फूलपुर: खेत में मचान बनाकर फसल की रखवाली करता किसान।
प्रयागराज से पुष्पेंद्र यादव की रिपोर्ट-
प्रयागराज। दिन-रात मेहनत से लहलहाती गेहूं और सरसों की फसलें अब किसानों के लिए चिंता और डर का कारण बन गई हैं। फूलपुर विकासखंड के बिगहिया, रूदापुर और आसपास के गांवों में नीलगायों और आवारा गोवंश का आतंक इतना बढ़ गया है कि किसान रात-दिन खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही नीलगायों के झुंड खेतों की ओर बढ़ने लगते हैं। फसल बचाने के लिए किसान टॉर्च, डंडा और ढोल लेकर खेतों में डटे रहते हैं, लेकिन थकान और डर के बीच उनकी कोशिशें अक्सर नाकाम हो जाती हैं।
बिगहिया, फूलपुर: गेहूं की फसल बर्बाद करते नीलगायों का झुंड।
राम चंद्र यादव, राधेश्याम, पंकज शर्मा और गुलाब सिंह यादव जैसे किसानों का कहना है कि कई बार नीलगाय या आवारा पशु भगाने पर आक्रामक हो जाते हैं और दौड़ पड़ते हैं। “डर लगता है कि कहीं जान न चली जाए, लेकिन फसल बचाना भी जरूरी है,” उन्होंने कहा। किसान बताते हैं कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर लगाया गया पैसा रातों-रात बर्बाद हो जाता है। कई किसानों के सामने अब परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
क्षेत्र के मैलहन, वरुणा बाजार, लतीफपुर, सांवडीह, पूरेभुलई, पाली, रूदापुर, करुआडीह, प्रतापपुर, उग्रसेनपुर, फतेहपुर माफी, देवली, अमोलवा, महजुदवा और बौडई गांवों में यह समस्या गंभीर बनी हुई है। किसान यह भी बताते हैं कि खेतों के आसपास से गुजरने वाले राहगीर भी नीलगायों के झुंड देखकर सहम जाते हैं।
किसानों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो गोवंश पकड़ने की व्यवस्था की गई और न ही फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए गए।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नीलगायों और आवारा गोवंश पर काबू पाने, गोशालाओं की क्षमता बढ़ाने और खेतों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था लागू करने में तुरंत कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें फिर से चैन की नींद मिल सके।






