चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, जो सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर भी हैं, ने स्वदेश में निर्मित अपतटीय गश्ती पोत (आईएनएस सुमेधा) से बेड़े का निरीक्षण किया। इस अवसर पर आईएनएस सुमेधा को राष्ट्रपति नौका (Presidential Yacht) के रूप में नामित किया गया था। पोत को अशोक चिह्न से सजाया गया था तथा मस्तूल पर राष्ट्रपति का ध्वज फहराया गया।

150 कर्मियों की टुकड़ी द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर और 21 तोपों की सलामी के बाद माननीय राष्ट्रपति आईएनएस सुमेधा पर सवार हुईं और विशाखापत्तनम तट से दूर लंगर डाले 52 जहाजों के सुसज्जित बेड़े के सामने से नौकायन करते हुए उनका निरीक्षण किया।

इस बेड़ा समीक्षा में कुल 85 जहाजों ने भाग लिया, जिनमें 19 विदेशी युद्धपोत शामिल थे, जो समुद्री भागीदारी के व्यापक और विविध स्वरूप को दर्शाता है।

भारतीय बेड़े में भारतीय नौसेना के 60 जहाज, भारतीय तटरक्षक बल के चार पोत तथा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान का एक-एक पोत शामिल था।


समीक्षा में भारतीय नौसेना की तीन पनडुब्बियां, एक फ्रांसीसी अटलांटिक समुद्री गश्ती विमान तथा 60 से अधिक विमानों की भागीदारी भी रही, जो बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) परिचालन क्षमता और समन्वित समुद्री उपस्थिति को दर्शाती है।

माननीय राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना के वायु शाखा (Naval Air Arm) का भी निरीक्षण किया, जिसमें हेलीकॉप्टरों और फिक्स्ड-विंग विमानों की फ्लाई-पास्ट शामिल थी। इसके पश्चात युद्धपोतों और पनडुब्बियों की एक गतिशील स्तंभ (मोबाइल कॉलम) ने राष्ट्रपति नौका के सामने से गुजरते हुए सलामी दी। कार्यक्रम में ‘परेड ऑफ सेल्स’, खोज एवं बचाव (Search and Rescue) अभियान तथा हॉक विमानों द्वारा हवाई करतब जैसे समुद्री और तटीय प्रदर्शन भी शामिल रहे।

अपने संबोधन में माननीय राष्ट्रपति ने कहा, “आज इतने अधिक मैत्रीपूर्ण विदेशी देशों की भागीदारी से प्रदर्शित मित्रता की भावना इस सत्य को रेखांकित करती है कि समुद्र हमें विभाजित नहीं, बल्कि एकत्रित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों, विशेषकर समुद्री क्षेत्र में, भारत का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुंबकम’ अर्थात ‘संपूर्ण विश्व एक परिवार है’ की भावना से प्रेरित है। यह दृष्टिकोण इस ज्ञान को प्रतिबिंबित करता है कि वैश्विक सुरक्षा, विकास, स्थिरता और सतत प्रगति मित्रता के आधार पर निर्मित होती है।” उ

न्होंने आगे कहा, “यह समीक्षा भारत की ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) की परिकल्पना को भी आगे बढ़ाती है। ‘United Through Oceans’ का संदेश सामूहिकता की भावना को सुदृढ़ करता है। यह वैश्विक समुदाय के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि समुद्री चुनौतियों से निपटने में सामूहिक नौसैनिक शक्ति ही प्रभावी सिद्ध हो सकती है।”

अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 का सीधा प्रसारण Doordarshan के दूरदर्शन चैनलों (DD नेशनल और DD विजयवाड़ा) पर किया गया तथा भारतीय नौसेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म — यूट्यूब (@IndianNavyOfficial) और फेसबुक (@IndianNavy) — पर लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई, जिससे देश और विदेश के दर्शक इस भव्य आयोजन के साक्षी बन सके। कार्यक्रम की रिकॉर्डेड पुनर्प्रसारण सुविधा भी इन्हीं माध्यमों पर उपलब्ध है।

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 ने “United Through Oceans” थीम के अनुरूप भारत की समुद्री सहयोग, परस्पर संचालन क्षमता (Interoperability) और सामूहिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया, साथ ही भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता, पेशेवर दक्षता और समान विचारधारा वाले देशों की नौसेनाओं के साथ स्थायी साझेदारी को भी उजागर किया।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू समुद्री परंपराओं के प्रति राष्ट्रों की एकता, विश्वास और सम्मान को दर्शाती है। विभिन्न ध्वजों वाले जहाज और विभिन्न देशों के नाविक एकजुटता की भावना का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एकजुटता की यह भावना इस रिव्यू की थीम: यूनाइटेड थ्रू ओशंस में बखूबी समाहित है। यह वैश्विक समुदाय को एक सकारात्मक संदेश है कि इस सामूहिक नौसैनिक शक्ति की प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सामुद्रिक कार्य क्षेत्र सहित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के हमारे आदर्शों से प्रेरित है। यह दृष्टिकोण इस ज्ञान को दर्शाता है कि वैश्विक सुरक्षा और विकास, स्थिरता और स्थायित्व साझेदारी के माध्यम से ही संभव हैं। साझेदारी की यह भावना एक स्थायी वैश्विक व्यवस्था की आधारशिला है। इसलिए, भारत का मानना है कि एक सुदृढ़ समुद्री व्यवस्था समान विचारधारा वाले साझेदारों के बीच सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोगात्मक कार्रवाई पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह फ्लीट रिव्यू भारत के ‘महासागर’ के विज़न को भी आगे बढ़ाती है, जिसका अर्थ है ‘क्षेत्रीय स्तर पर सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति’।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय नौसेना भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और व्यापक समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में तत्पर है। क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना की इकाइयाँ समुद्र में उत्पन्न होने वाले खतरों और चुनौतियों के विरुद्ध प्रतिरोध और रक्षा के विश्वसनीय साधन के रूप में कार्य करती हैं। मानवीय संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के समय भारतीय नौसेना अक्सर सबसे पहले सहायता प्रदान करती है, करुणा और दक्षता के साथ त्वरित सहायता प्रदान करती है। भारतीय नौसेना विश्वभर की नौसेनाओं के साथ सद्भावना को बढ़ावा देने तथा विश्वास, भरोसे और मित्रता के सेतु बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राष्ट्रपति ने मित्र देशों की विदेशी नौसेनाओं के अधिकारियों और नौसैनिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे अपने-अपने देशों और सेवाओं की सर्वोत्तम परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका अनुशासन, समर्पण और सक्षमता वे आधारशिलाएं हैं जिन पर सामूहिक समुद्री सुरक्षा टिकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि फ्लीट रिव्यू में उनकी उपस्थिति ने हमारे विश्वास के बंधन को और मजबूत किया है और समुद्र में शांति, स्थिरता और सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस फ्लीट रिव्यू में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी नौसेनाएं मिलकर महासागरों को वैश्विक समुदाय के विकास, समृद्धि और समग्र कल्याण के द्वार के रूप में विकसित करने में योगदान देंगी।






