चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली,
विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (RIS) ने “ बहुपक्षवाद पर बढ़ते दबाव ” विषय पर एक उच्च-स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया तथा अपनी प्रमुख रिपोर्ट वर्ल्ड ट्रेड एंड डेवलपमेंट रिपोर्ट (WTDR) 2026 जारी की। इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, अर्थशास्त्रियों और विद्वानों ने भाग लिया, जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आगामी 14 वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) से पूर्व आयोजित किया गया।
भारत की व्यापार नीति की रणनीतिक दिशा -अपने मुख्य वक्तव्य के दौरान डॉ. अरविंद विरमानी, सदस्य, नीति आयोग, ने भारत की व्यापार रणनीति के लिए एक दूरदर्शी रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने दो प्रमुख वैश्विक प्रवृत्तियों—कुछ अर्थव्यवस्थाओं में विनिर्माण का बढ़ता संकेन्द्रण तथा जनसांख्यिकीय लाभों में बदलाव पर प्रकाश डाला और कहा कि भारत वैश्विक मानव पूंजी आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरने की विशिष्ट स्थिति में है। डॉ. विरमानी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की व्यापार नीति को विकसित भारत की दीर्घकालिक दृष्टि के अनुरूप प्रतिस्पर्धात्मकता, गुणवत्ता और पैमाने पर आधारित होना चाहिए । उन्होंने रेखांकित किया कि विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने और निवेश आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण हैं, जबकि औद्योगिक नीति उपायों को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता निर्माण के लिए संक्रमणकालीन साधन के रूप में देखा जाना चाहिए।
वैश्विक दक्षिण और बहुपक्षवाद एक निर्णायक मोड़ पर — इस सत्र के विशेष संबोधन में एंबेसेडर सुधाकर दलेला, सचिव (आर्थिक संबंध), विदेश मंत्रालय ने WTO से संबंधित चर्चाओं को एक बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य—जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान और तकनीकी परिवर्तन शामिल है, के संदर्भ में प्रस्तुत किया। बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में विश्वास की कमी पर बल देते हुए उन्होंने विश्वसनीय, समावेशी और विकासोन्मुख WTO सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया ।

बहुपक्षीय सिद्धांतों और विकास के नीति-क्षेत्र की रक्षा पर अपना वक्तव्य वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए WTO में भारत के राजदूत डॉ. सेंथिल पांडियन सी. ने उभरती चुनौतियों के बीच नियम-आधारित बहुपक्षीय प्रणाली के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने MFN सिद्धांत, सर्वसम्मति-आधारित निर्णय-प्रक्रिया तथा विकास-उन्मुख प्रावधानों जैसे WTO के मूल सिद्धांतों के क्षरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष एवं भिन्न उपचार (S&DT) को सुदृढ़ करने, विवाद निपटान तंत्र को पुनर्स्थापित करने तथा समावेशी और सदस्य-आधारित सुधार प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विकासशील देशों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली का दृष्टिकोण : दबाव में बहुपक्षवाद पर अपने स्वागत वक्तव्य में प्रो. सचिन कुमार शर्मा, महानिदेशक, RIS ने कहा कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली वर्तमान में बाहरी चुनौतियों—जैसे भू–राजनीतिक विखंडन, औद्योगिक नीति प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान तथा आंतरिक चुनौतियों जैसे वार्ताओं में गतिरोध और निष्क्रिय विवाद निपटान तंत्र—का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि MC14 विकास एजेंडा को पुनर्स्थापित करने, विकासशील देशों के नीति–क्षेत्र को संरक्षित करने और बहुपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। ज्ञातव्य है कि प्रो. शर्मा कैमरून में आयोजित होने वाले WTO के चौदहवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेंगे। उन्होंने नीति निर्माण में RIS की साक्ष्य–आधारितअनुसंधानऔर






