चौथा अक्षर संवाददाता/ शाहजहापुर
शाहजहांपुर जिसे क्रांतिकारियों की भूमि कहा जाता है वहां आधी रात को महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह की प्रतिमाओं को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। रातों रात मलवा भी फेंक दिया गया। गौरतलब है . कल ही शहीद दिवस था। बुलडोजर चलाने पर खुश होने वाले देख लें कि अब वह शहीदों की प्रतिमाओं पर भी चलने लगा है।
शाहजहांपुर में देश के अमर क्रांतिकारियों ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकउल्ला खान और रामप्रसाद बिस्मिल तोमर जी की स्मृति से जुड़े चबूतरे को बुलडोजर से ढहाया जाना बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
ये केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं था, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और बलिदान की पहचान था। जिन वीरों ने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, उनके सम्मान के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता।




सरकार को चाहिए कि इस कृत्य पर तुरंत संज्ञान ले, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करे और इन महान क्रांतिकारियों के सम्मान में उस स्थल का पुनर्निर्माण कराए। देश के वीर सपूतों का अपमान, पूरे राष्ट्र का अपमान है, और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शहीदों के जीवन और दर्शन पर लगातार किताबें लिखने के लिए चर्चित सुधीर विद्रोही जी ने देर रात यह संदेश भेजा-“अभी–अभी बहुत दुखद और आहत करने वाली ख़बर मिली कि टाउन हॉल, शाहजहांपुर में 1972 में स्थापित शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्ला खां और रोशन सिंह की प्रतिमाएं आज प्रातः 3 बजे अंधेरे में बहुत अपमानजनक ढंग से बुल्डोजर से तोड़ कर गिरा दी गईं और मलवा भी बहुत जल्द हटाकर गायब कर दिया गया।..मलवा शहर के बाहर डम्पिंग ग्राउंड में फेंका देखा गया!”






