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रामनगरी अयोध्या  के राजघाट क्षेत्र में ‘श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ’ के विशाल पंडाल में भीषण आग लगी

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उमाकांत विश्वकर्मा/ अयोध्या

रामनगरी अयोध्या  के राजघाट क्षेत्र में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब बाटी वाले बाबा घाट के निकट आयोजित ‘श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ’ के विशाल पंडाल में अचानक भीषण आग लग गई। यह महायज्ञ उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की अध्यक्षता में और स्वामी जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हो रहा था। आग इतनी तेजी से फैली कि लगभग एक एकड़ में फैला पंडाल देखते ही देखते जलकर खाक हो गया। फिलहाल, आग लगने का सही कारण स्पष्ट नहीं है..! दमकल कर्मियों ने आग बुझाने का काम शुरू कर दिया।मौके पर इस समय कई दमकल गाड़ियां मौजूद हैं। दमकल कर्मी आग बुझाने में पूरी सिद्दत से जुटे हुए हैं,

प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ’ स्वामी जियरजी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा था और यह भव्य समारोह एक दिन पहले ही संपन्न हुआ। इस अग्निकांड में लाखों रुपये की संपत्ति के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, आशंका जताई जा रही है कि इस घटना में 3-4 लोग झुलस गए हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, इस जानकारी की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, 108-वेदी (कुंडीय) महायज्ञ के समापन के बाद लगी इस आग ने आयोजन स्थल के तीन अलग-अलग हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया था। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। आग बुझाने के अभियान के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक (SP) भी मौके पर मौजूद रहे।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जिसके चलते प्रशासन को उस इलाके को खाली कराना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हवन (यज्ञ समारोह) के दौरान तेज़ हवाओं के कारण चिंगारियां उड़ीं, जिससे आग लग गई।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि नौ दिनों का यज्ञ (यज्ञ समारोह) आयोजित किया गया था, जिसका समापन समारोह (पूर्णाहुति) घटना से डेढ़ घंटा पहले ही संपन्न हो चुका था। घटना का सटीक कारण अभी पता नहीं चल पाया है, हालांकि, जब यज्ञशाला (समारोह स्थल) में आग लगी, तब तक उस जगह को खाली करा लिया गया था।  परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि लगभग 700 मीटर दूर एक दूसरी जगह पर भी आग लगी थी, और यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि वहां आग कैसे लगी। उन्होंने कहा कि किसी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

जिस वक्त यह हादसा हुआ, प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह भी यज्ञ स्थल पर ही मौजूद थे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने तुरंत स्थिति को संभाला और राहत कार्य में जुट गए। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से ही आसमान में काला धुआं देखा जा सकता था।

अयोध्या के ज़िलाधिकारी निखिल टिकाराम फुंडे ने कहा कि कोई हताहत नहीं हुआ है और सभी लोग सुरक्षित हैं। अग्निशमन दल के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की एक टीम भी इस समय घटनास्थल पर मौजूद है। इस बीच, घटनास्थल पर मौजूद लोगों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे उस जगह को खाली कर दें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। ज़िलाधिकारी ने दोहराया कि यज्ञ पहले ही संपन्न हो चुका था, और घटना के समय यज्ञशाला पूरी तरह खाली थी।

अयोध्या के SSP डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि इस घटना के संबंध में अलर्ट जारी कर दिया गया है। अग्निशमन दल के साथ-साथ पुलिसकर्मियों को भी तैनात कर दिया गया है। पिछले नौ दिनों से इस क्षेत्र में सरयू नदी के तट पर धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे; आज यज्ञ के समापन के बाद आग तेज़ हो गई, और यज्ञशाला से उड़कर फैली चिंगारियों के कारण पास में बनी गौशाला की छत में आग लग गई। आग पर अब काबू पा लिया गया है, और कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई है।

राजघाट जैसे संवेदनशील और वीवीआईपी क्षेत्र में हुए इस हादसे ने सुरक्षा और फायर सेफ्टी के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

धार्मिक अनुष्ठान के बीच हुए इस हादसे से श्रद्धालु और स्थानीय निवासी गहरे सदमे में हैं।

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