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फिर वही कहानी -डीयू के राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पदों पर  आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को किया गया नॉट फाउंड सूटेबल ( NFS )

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चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली    

      विश्वविद्यालय अनुदान आयोग व शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए पिछले तीन वर्षों से दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विभागों व कॉलेजों में  शिक्षकों की स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया चल रही है। बता दें कि यह नियुक्तियाँ विभिन्न विभागों / कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पदों पर  की जा रही हैं। कुछ विभागों में यूजीसी रेगुलेशन -2018 के नियमों के तहत योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को उस पद के योग्य स्वीकार नहीं किया गया है, उन्हें योग्य अभ्यर्थी नहीं के तौर पर नॉट फाउंड सूटेबल (एनएफएस ) किया गया। हाल ही में राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के 21 पदों में से 14 पदों पर नॉट फाउंड सूटेबल किया गया। इनमें सबसे अधिक एससी /एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी व अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार हैं। फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) के चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पदों पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नॉट फाउंड सूटेबल किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह से इसकी शिकायत भी की है साथ ही यह मांग की है कि आरक्षित पदों पर नॉट फाउंड सूटेबल किए जाने पर एक उच्च स्तरीय कमेटी बना कर इसकी जाँच करवाई जाए। कमेटी यह भी जाँच करें कि आरक्षित सीटों पर ही सर्वाधिक नॉट फाउंड सूटेबल क्यों किए गए।

         फोरम के चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों व विभागों में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति व पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। राजनीति विज्ञान विभाग ने अपने यहाँ 21 एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर  के पदों को भरने के लिए साक्षात्कार कराए थे। साक्षात्कार के बाद चयन समिति ने 21 पदों में से 14 पदों पर नॉट फाउंड सूटेबल कर दिया। एसोसिएट प्रोफेसर में ओबीसी कोटे के 5 पद थे जिसमें 1 उम्मीदवार का चयन किया गया, 4 उम्मीदवार को नॉट फाउंड सूटेबल कर दिया गया, इसी तरह से अनुसूचित जाति (एससी) के 3 पदों में से 1 पर चयन किया गया, 2 पदों पर नॉट फाउंड सूटेबल किए गए। अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 2 पदों में से सिर्फ 1 पद पर चयन किया और 1 पद नॉट फाउंड सूटेबल कर दिया गया। पीडब्ल्यूडी पद पर भी नॉट फाउंड सूटेबल किया गया जहाँ 1 पद आरक्षित श्रेणी से था। अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित प्रोफेसर का 1 पद था उस पर भी नॉट फाउंड सूटेबल कर दिया गया। बताया जा रहा है कि प्रोफेसर पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी का कोई उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हुआ। प्रोफेसर सुमन ने बताया कि इससे पहले भी ओबीसी कोटे के 2 सहायक प्रोफेसर के पदों पर नॉट फाउंड सूटेबल किया जा चुका है। प्रोफेसर सुमन ने बताया कि नियुक्तियों से पूर्व विश्वविद्यालय प्रशासन आये हुए आवेदन पत्र की जाँच पड़ताल करता है। इसके लिए स्क्रीनिंग व स्कूटनी की प्रक्रिया को अपनाया जाता है। जो अभ्यर्थी यूजीसी नियमानुसार योग्यता पूरी रखते हैं उन्हें ही साक्षात्कार में बुलाया जाता है। चयन समिति में सभी वर्गों के विषय विशेषज्ञों के अलावा एससी/एसटी/ओबीसी कोटे के ऑब्जर्वर को शामिल किया जाता है। इसके बावजूद आरक्षित श्रेणी एससी/एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी, अनारक्षित और ईडब्ल्यूएस के योग्य उम्मीदवारों को राजनीति विज्ञान विभाग के साक्षात्कार में को नॉट फाउंड सूटेबल किया गया।

       प्रोफेसर सुमन के अनुसार पिछले तीन वर्षों में  5200 स्थायी नियुक्तियाँ 23 हजार यूनिट प्रमोशन हो चुके हैं। इसमें 350 से अधिक एससी, एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी व ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को नॉट फाउंड सूटेबल किया गया। उन्होंने बताया है कि दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में अभी स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु नहीं हुई है। इन कॉलेजों में 1000 से अधिक स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है। इसी तरह कुछ कॉलेजों में ओबीसी कोटे के सेकेंड ट्रांच के पदों पर नियुक्ति की जानी है। यदि इसी तरह से आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नॉट फाउंड सुटेबल किया गया तो ये पद खाली ही पड़े रहेंगे। इन पदों पर बार-बार विज्ञापन देना तथा बार-बार बेरोजगार अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क लिया जाता रहेगा। जो उचित नहीं है। इसलिए नॉट फाउंड सूटेबल करने के ट्रेंड को रोका जाना बहुत जरूरी है।

    प्रोफेसर सुमन ने कुलपति को लिखें अपने शिकायती पत्र में यह भी जिक्र किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन यह पता लगाए कि राजनीति विज्ञान विभाग में अयोग्य घोषित करने (नॉट फाउंड सुटेबल) के पीछे वजह क्या थी? उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि यदि आरक्षित श्रेणी के ये उम्मीदवार योग्य नहीं थे तो उन्हें किस आधार पर साक्षात्कार में बुलाया गया ? साक्षात्कार से पूर्व  स्कूटनी व स्क्रीनिंग के पश्चात ही उनके नाम वेबसाइट पर डाले जाते है।

प्रोफेसर सुमन ने पत्र में यह भी लिखा है कि राजनीति विज्ञान विभाग के अलावा पिछले दिनों जिन विभागों / कॉलेजों में आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को नॉट फाउंड सूटेबल किया गया है उनकी भी जाँच कराने के लिए एक कमेटी गठित की जाए। कमेटी में दिल्ली विश्वविद्यालय के बाहर से  सेवानिवृत्त प्रोफेसर, यूजीसी और शिक्षा  मंत्रालय से एकएक सदस्य के अलावा डीओपीटी/लायजन ऑफिसर को शामिल किया जाना चाहिए। कमेटी यह भी जाँच करे कि इन पदों पर कितने उम्मीदवार साक्षात्कार के समय उपस्थित हुए, कितने अनुपस्थित, चयन समिति के मिनट्स में किस आधार पर इन अभ्यर्थियों को नॉट फाउंड सूटेबल किया गया है।साथ ही यह भी देखा जाए कि आरक्षित श्रेणी के ऑब्जर्वर ने इस पर अपना विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया।कमेटी के जाँच की रिपोर्ट मीडिया में भी दी जानी चाहिए जिससे कि नॉट  फाउंड सुटेबल की वास्तविक स्थिति की लोगों को जानकारी हो सके।

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