back to top

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में 150 करोड़ से अधिक की चंदा चोरी- शह या साजिश

Must Read

अब तो गजनवी भी नहीं है,फिर इन मंदिरों को आखिर कौन लूट रहा है..?

श्याम लाल शर्मा / चौथा अक्षर /अयोध्या

जो सोचा भी नहीं जा सकता था वह हुआ. ध्यान देने की बात तो यह है कि अब तो कोई गजनवी भी नहीं है तो फिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास  का प्रतीक अयोध्या के राम मंदिर से 150 करोड़ से भी ज़्यादा दान की रकम चोरी कैसे हो गई ? राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और हेराफेरी को लेकर बवाल मचा हुआ है. राम मंदिर में दान की चोरी को लेकर एक तरफ़ जहाँ राजनीतिक माहौल गर्म है वहीं दूसरी तरफ़ इस मामले को लेकर विपक्ष ने केंद्र और राज्य की सरकार के साथ -साथ मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है | राम मंदिर की दान राशि में गबन के मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में  लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर  को पकड़ा गया है | अब तक हुई रिकवरी भी इन्हीं पांचों ने कराई है और चोरी कुबूल भी की है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इस दान की चोरी और हेराफेरी में  नीचे से लेकर ऊपर तक किसी  न किसी की शह और शाजिश के तहत ही ऐसा हुआ है | क्योंकि इतने संवेदनशील जगह से रकम पार करते रहना  और पकड़े न जाना कई तरह के सवाल खड़े करता है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों से करोड़ों रुपये के कथित गबन मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की पड़ताल में अब इस पूरे प्रकरण के पीछे एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका गहराती जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह किसी एक कर्मचारी की व्यक्तिगत करतूत नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया ऐसा खेल था, जिसमें शामिल लोगों की भूमिकाएं पहले से तय थीं। सूत्रों के मुताबिक, दानपात्रों से चढ़ावे की रकम एकमुश्त नहीं निकाली जाती थी। शक से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके से धीरे-धीरे धनराशि बाहर की जाती थी, ताकि लंबे समय तक किसी को गड़बड़ी का आभास न हो। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह में यह तय रहता था कि कौन रकम निकालेगा, कौन उसे सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाएगा और किस स्तर पर उसका बंटवारा किया जाएगा।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि चोरी की गई रकम को सीधे इस्तेमाल में नहीं लाया जाता था। पहले उसे एक गोपनीय स्थान पर छिपाया जाता और बाद में अयोध्या के कौशलपुरी इलाके में स्थित एक कथित सीक्रेट ठिकाने पर उसका आपसी बंटवारा किया जाता था। इस ठिकाने की भूमिका को लेकर एसआईटी गंभीरता से पड़ताल कर रही है। मामले में अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ा दिया गया है। एसआईटी संदिग्ध ट्रस्ट कर्मियों के साथ-साथ उनके परिवारों और करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, हालिया निवेश, बीमा पॉलिसियों और खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों की भी जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि कथित तौर पर गबन की गई बड़ी रकम को रिश्तेदारों के खातों और संपत्तियों के जरिए खपाने की कोशिश की गई।

जांच एजेंसियों को अब तक अनुमानित गबन राशि का केवल एक छोटा हिस्सा ही बरामद हो सका है। इस तथ्य ने जांचकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है और यह सवाल भी खड़ा किया है कि बाकी रकम आखिर कहां गई। इसी के साथ एसआईटी का फोकस इस पहलू पर भी है कि क्या संदिग्ध कर्मचारियों को ट्रस्ट के किसी प्रभावशाली पदाधिकारी का मौन संरक्षण प्राप्त था। यदि ऐसा हुआ है तो जांच की आंच ट्रस्ट से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंच सकती है।

उल्लेखनीय है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें मंदिर प्रबंधन के सामने आई थीं। राम मंदिर के पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज महिपाल सिंह ने दावा किया था कि दान संग्रह में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही थीं और जब उन्होंने इस पर आवाज उठाई, तो उन्हें पद से हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया  कि चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड और जमा राशि में गड़बड़ियां हुई हैं। इन शिकायतों के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच की मांग उठी थी।

दिलचस्प बात यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि हम ट्रस्ट फंड का नियमित ऑडिट करते हैं और इसमें किसी भी तरह की विसंगति या गबन नहीं मिला है वहीं ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास महाराज ने भी आरोपों को निराधार बताया। सवाल यह उठता है कि जब कोई विसंगति है तो राम मंदिर की दान राशि में गबन के मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी कैसे की गई | उधर राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास महराज ने कहा कि ये जो हल्ला मचा रहे हैं, ये कौन से दूध के धुले हैं,  तो वहीं बीजेपी नेता बृजभूषण सिंह ने कहा कि यदि मैं सत्य बोल दूंगा तो परेशानी में आ जाऊंगा।राम मंदिर जैसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र से जुड़े इस कथित घोटाले ने व्यापक चर्चा छेड़ दी है। एसआईटी की जांच अब केवल दानपात्र से गायब हुई रकम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश कर रही है, जिसने कथित तौर पर आस्था के नाम पर चढ़ाई गई धनराशि को सुनियोजित ढंग से ठिकाने लगाया।

राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के लिए कुल 50 कर्मचारियों की मौजूदगी उस गुप्त कमरे में रहती थी जहां गिनती होती थी। ये कर्मचारी 3 तरह के हैं-

  1. 24 कर्मचारी: नोट गिनकर उनके बंडल बनाते हैं। ये कर्मचारी प्राइवेट एजेंसी के जरिए ट्रस्ट ने रखे हैं।
  2. 12 कर्मचारी: ये ट्रस्ट के हैं, जो इन 24 कर्मचारियों पर नजर रखते हैं। यानी 1 कर्मचारी के हिस्से में निगरानी के लिए 2 कर्मचारी थे।
  3. 14 कर्मचारी : इनमें SBI के कर्मचारी और TCS की ऑडिट टीमों के सदस्य होते हैं।

अब ये सभी 50 कर्मचारी और इनको नियुक्त करने वाले जांच के दायरे में हैं। चोरी की रकम अब 200 करोड़ तक बताई जा रही।

राम मंदिर में जिन 5 लोगों से पूछताछ चल रही है, उसमें टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव भी शामिल हैं, मनीष भी रुपए की गिनती करता था। स्वर्गद्वार इलाके में पुश्तैनी घर में रहता था। चर्चा है कि उसकी बताई जगह से 36 लाख रुपए कैश मिला है। राम मंदिर में दान में चढ़ने वाले सोनेचांदी के जेवरों को केडी तिवारी संभालते हैं,वह भी अब संदेह के घेरे में हैं। इन्होंने 1.5 करोड़ की जमीन खरीदी है, ये भी जांच के दायरे में है। आरोप यह भी है कि केडी तिवारी ने 5 करोड़ रुपए की संपत्ति जुटाई है।

- Advertisement -spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_imgspot_img
Latest News

आइए, मिलकर एक ऐसी हुंकार बनें जिसे अनसुना करना नामुमकिन हो, 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली-राहुल gandhi

चौथा अक्षर संवाददाता/ कोटा राजस्थान  कल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी छात्रों और युवाओं के साथ NEET 2026 पेपर लीक तथा...
- Advertisement -spot_imgspot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_imgspot_img