चौथा अक्षर संवाददाता/ उरई
उत्तर प्रदेश के जालौन में संयुक्त मजिस्ट्रेट (एस.डी.एम. न्यायिक, उरई) के पद पर तैनात आई. ए.एस. रिंकू सिंह राही एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार जेम पोर्टल के जरिए हो रही आउटसोर्सिंग की पोल खोलते हुए परिवहन विभाग में चल रहे खेल का खुलासा किया है। उनका कहना है कि मैं भ्रष्टाचार एकदम रोक नहीं सकता हूं तो उजगार करके ऑन द रिकॉर्ड तो ला ही सकता हूँ । उन्होंने व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग के साथ ही पूरे मामले को एक ‘केस स्टडी’ बनाकर पूरे प्रदेश स्तर पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था का परीक्षण करने की मांग की ।
गौरतलब है कि अब से 16 बरस पहले पीसीएस अधिकारी रहते हुए समाज कल्याण विभाग में फैले घोटाले का पर्दाफाश करने के चलते उन पर लगातार सात गोलियां बरसाई गई थीं तब वे 7 गोलियां खाकर सुर्खियों में आए थे वही रिंकू सिंह राही ने अब आईएएस बनने के बाद परिवहन विभाग में आउटसोर्सिंग के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल को पकड़ा है। जालौन में संयुक्त मजिस्ट्रेट (एस.डी.एम. न्यायिक, उरई) के पद पर तैनात रिंकू सिंह ने एक तरह से सरकारी कार्यालयों में टेंडर व्यवस्था के नाम पर चल रहे संगठित भ्रष्टाचार की कलई खोल दी है। जिस जेम पोर्टल से टेंडरिंग को सरकार की तरफ से बेहद पारदर्शी व्यवस्था बताई जाती है उसका भी एक तरह से मखौल ही उड़ा दिया है।


रिंकू सिंह को आउटसोर्सिंग के तहत मिले शासकीय वाहन और चालक की नियुक्ति को लेकर पाई गई गंभीर अनियमितताओं पर परिवहन और श्रम विभाग के आयुक्तों को पत्र भेजा है। उन्होंने अपनी पीड़ा को और संकल्प को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी बयां किया है। कहा कि जहां देखो वहीं भ्रष्टाचार मौजूद है। यदि इसे एकदम रोक नहीं सकता तो उजागर करके ऑन द रिकॉर्ड ला ही सकता हूं। शायद इसे रोकने की स्थिति में बैठे जिम्मेदारों को थोड़ी सी शर्म आए, या भ्रष्टाचार करने वालों में थोड़ा डर पैदा हो।
उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई में आने वाले खतरों से बेखौफ होकर एक बार फिर अपना पुराना मिजाज भी दोहराया है। कहा कि अपना क्या… जोखिम, लेकिन वही पुराना राग- सब कुछ लुटाने की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जेम पोर्टल के जरिए भी टेंडरिंग के बाद भी इतने बड़े भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
श्रम आयुक्त और परिवहन आयुक्त को भेजे गए पत्र में रिंकू सिंह ने खुलासा किया कि जेम (GeM) पोर्टल से मैनपुरी की एजेंसी ‘हनी इंटरप्राइजेज’ के जरिए उन्हें जो बोलेरो गाड़ी आवंटित की गई थी, वह निजी नंबर (सफेद प्लेट) की है। पीली नंबर प्लेट वाली कामर्शियल वाहन को सरकारी कार्य में नहीं लगाना सीधे तौर पर परिवहन नियमों और टेंडर की शर्तों का उल्लंघन है। उन्होंने लिखा कि आपत्ति जताने और गाड़ी बदलने के निर्देश के बावजूद एजेंसी ने दोबारा वही गाड़ी भेज दी है।
उन्होंने पत्र में लिखा कि सरकारी कार्यालयों की मिलीभगत से पसंदीदा वेंडर को टेंडर दिलाने के लिए जानबूझकर नाममात्र की दरें भरवाई जाती हैं। फिर कागजी कोरम पूरा कर घटिया सेवा ली जाती है। ठेकेदार कामर्शियल गाड़ी के बजाय निजी गाड़ियों को सरकारी काम में लगा देते हैं और मोटा कमीशन वसूलते हैं। रिंकू सिंह ने आउटसोर्सिंग के तहत गाड़ी पर कार्यरत ड्राइवरों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम देने का आरोप लगाया। कहा कि चालक को केवल 6000 प्रतिमाह दिया जाता है। यह भुगतान भी कई-कई महीनों तक अटका कर रखा जाता है। किसी अधिकारी के साथ मौजूद वाहन चालक को जब नाम मात्र का वेतन मिलेगा और वह भी महीनों तक नहीं मिलेगा तो वह भ्रष्टाचार के साथ अवैध वसूली की कोशिश करेगा।
उन्होंने कहा कि कलक्ट्रेट जैसे मुख्य प्रशासनिक केंद्रों में चल रहा यह शोषण और भ्रष्टाचार सुशासन की नींव को खोखला कर रहा है। जो अधिकारी नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराना चाहता है, उन्हें व्यवस्था के खिलाफ जाकर व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रिंकू सिंह राही ने व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग के साथ ही पूरे मामले को एक ‘केस स्टडी’ बनाकर पूरे प्रदेश स्तर पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था का परीक्षण करने की मांग की.
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखते हुए आरोप लगाया है कि मेरे कार्यों का कार्य बहिष्कार हुआ है.
आईएएस रिंकू सिंह राही ने एक्स पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट करते हुए लिखा-आज पता चला है कि तहसील उरई के लेखपालों ने दिनांक 21.08.2026 से उपजिलाधिकारी (न्यायिक) उरई के न्यायालय यानि मेरे कार्यों का कार्यबहिष्कार किया हुआ है. जिसकी न तो मुझे सूचना दी गई और नाही कोई निर्देश/सलाह कि क्या गलत किया जा रहा है, जो मुझे नहीं करना चाहिए.”



उन्होंने आगे लिखा-“पहले से ही अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार कर रखा है. कोई भी समझ सकता है कि इसमें किस स्तर की शह होगी? मतलब पूरी कोशिश है कि सिद्ध कर दिया जाए कि मैं न्यायिक कार्यों के लिए उपयुक्त ही नहीं हूं. एक छोटी सी भूल और काम तमाम, जबकि पूरी सक्रियता से कार्य करेंगे तो भूलचूक तो हो ही सकेगी.” ठीक है – तैयार हूं मैं अपना काम तमाम करवाने को, बस लगातार कोशिश है कि कोई भूलचूक तक हो लेकिन यदि हो भी तो बिना कुमंशा वाली ही छोटी मोटी ही भूलचूक हो.”
वे लिखते हैं कि -आज एक वरिष्ठ शुभचिंतक से बात हुई, उन्होंने बड़े अचंभे वाली बातें बताईं। जिले के मेरे बॉस ने मेरे खिलाफ एकदम पूरी ताकत लगा दी है मुझे बर्बाद करने के लिए, लखनऊ तक भी। वह तो शुक्र है कि सोशल मीडिया आदि का, जिसका डर है सभी को, अन्यथा अब तक कोई बहुत बड़ी घटना घटित हो जाती मेरे साथ। शायद मेरी वजह से बॉस भी परेशानी में आ गाए हैं, अभी तक उनकी इमेज नंबर वन वाली थी, लेकिन मेरे आने के बाद, हकीकत सामने आने से उनके खुद के चमकते कैरियर पर भी प्रश्नचिन्ह आ गया है। लखनऊ में मिलने/बुलाने के बाद तो उनकी पूरी कोशिश है कि मुझे सरकार और राजनैतिक पार्टी (सत्ता में) का घुरविरोधी सिद्ध कर दें कैसे भी/कितना भी झूठ बोलकर/बुलवाकर भी। उन शुभचिंतक को स्वंय ही इस बात पर बहुत ज्यादा ही आश्चर्य था कि आखिर कैसे – ऊपर से नीचे तक सभी लोग या तो मेरे खिलाफ उनका साथ देने को तैयार हो गए हैं या फिर एकदम उदासीन हो गए हैं… कुछ ईमानदार नामचीन लोग भी, जानते हुए भी “सही को सही” कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। क्यों? इसका जवाब तो उनके पास भी नहीं है। हालांकि हंसते हुए मेरे लिए तो राय दी कि यदि मैंने बॉस से यह मैनेजमेंट सीख लिया तो एकदम सफलता की सीढ़ियां चढूंगा। हालांकि इसमें शर्त है कि गिरने की कोई हद नहीं रखनी होती है। लेकिन मुझे आगाह किया है कि आने वाले समय में कुछ बड़े झटके झेलने के लिए मुझे खुद को तैयार कर लेना चाहिए। बॉस मेरे इस X की प्रत्येक पोस्ट को बहुत ही गहनता से follow करते हैं। इसलिए उन्हें पढ़ाने के लिए, इस वार्ता को पोस्ट करने के लिए मुझसे काफी आग्रह भी किया गया है। इसके होते हुए भी उन सहित अन्य कई शुभचिंतकों ने भी समान राय दी है कि जितना अधिक पारदर्शी बना रहूंगा उतना ही safe रहूंगा, वरना अब तक बहुत कुछ हो गया होता। बाकी अपना तो ….. फिर से…वही घिसीपिटी लेकिन दिल की बात… सब कुछ लुटाने की तमन्ना, अब हमारे दिल में है, *** देखते हैं क्या हो सकते हैं – आने वाले झटके?

उन्होंने लिखा कि -मेरे द्वारा कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद, जनपद प्रशासन, जालौन द्वारा उपजिलाधिकारी (न्यायिक) उरई न्यायालय के लिए अधिवक्ताओं की हड़ताल/कार्यबहिष्कार की सूचना तक सचिव, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, प्रयागराज को नहीं दी जा रही है। जनपद प्रशासन, जालौन द्वारा मेरे विरुद्ध किस हद तक खुलेआम षड्यंत्र किए जा रहे हैं, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। अति शर्मनाक स्थिति।
गौरतलब है कि आईएएस बनने से पहले रिंकू सिंह पीसीएस अफसर थे। 2009 में मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी रहने के दौरान उन्होंने 100 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप घोटाले का भंडाफोड़ किया। फर्जी खातों में चेक जमा करके पैसा निकाला जा रहा था। एक दिन बैडमिंटन खेलते समय दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस हमले में उनको सात गोलियां लगीं। चेहरा बिगड़ गया, कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी। मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में एक महीने तक उनका इलाज चला था। कई सर्जरी के बाद वह जिंदा बच गए थे। इस हमले में चार आरोपियों को 10-10 साल की सजा हुई थी, लेकिन बाकी बच गए थे।






