चौथा अक्षर संवाददाता /नई दिल्ली / छायाकार : आशीष कर
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरभ दास, विधि मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह और सीजेपी के स्वयंसेवक मंगलवार को नई दिल्ली में उच्चतम न्यायालय के लॉन में उस अदालती फैसले के बाद जश्न मनाते हुए, जिसमें पार्टी के प्रदर्शनों में भाग लेने वाले युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी (एफआईआर) रद्द कर दी गईं तथा 5 सितंबर को प्रस्तावित शांतिपूर्ण विरोध मार्च को रद्द करने की घोषणा की गई।
नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने संविधान में मिली अपनी खास ताकत यानी अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए सभी मामलों को एक साथ खत्म कर दिया। इससे एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर आर्टिकल 142 क्या है?
सुप्रीम कोर्ट को इससे कितनी ताकत मिलती है और अदालत कब इसका इस्तेमाल करती है? दरअसल, अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए जरूरी आदेश देने की विशेष शक्ति देता है।
NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच झड़प हुई थी और पुलिस की ओर से लाठीचार्ज भी किया गया था। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों की पहचान के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं। बाद में छात्र नेताओं की ओर से इन मामलों को वापस लेने की मांग उठी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां FIR खत्म करने को लेकर अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल की संभावना सामने आई।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि अगर छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने में कानूनी अड़चन आती है, तो अदालत अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल कर सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट से सभी संबंधित FIR को एक साथ खत्म करने की अपील की गई। अदालत ने अब अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों को रद्द कर दिया है।






