चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
जैसा कि आमतौर पर होता है पहले आपको किसी चीज की लत लगायी जाती है, आपको फ्री का चस्का लगाया जाता है और जब आप उसके आदी हो जाते हैं और उसकी कमाई का मजबूत जरिया बन जाते हैं तो वह कमाई करना शुरू कर देता है। इस भाजपा सरकार के साथ भी कुछ ऐसा ही है। कुछ समय पहले जब यह खबर आई थी कि सरकार यू.पी.आई. पर टैक्स लगाने जा रही है तब सरकार ने इसको अफवाह बताया था और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन खत्म होने के बाद कल रात वित्त मंत्रालय की मुखिया निर्मला सीतारमण अचानक एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि अब 2000/- रुपए तक यू.पी.आई. करने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. मतलब उसके ऊपर के ट्रांजक्शन पर अतिरिक्त धन देना पड़ेगा.
दरअसल, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी व्यापारी हैं पहले फ्री दो फिर वसूली करो, वसूली करना प्रधानमंत्री की आदत है, वो जैसे ही लोगों को खर्च करते हुए देखते हैं, वसूली करने पहुंच जाते हैं।यू.पी.आई. के प्रयोग में भी यही हुआ।नरेंद्र मोदी ने पहले लोगों से कहा- यू.पी.आई. ट्रांजक्शन फ्री है खूब करो, लेकिन अब उसी पर टैक्स लगा रहे हैं।ये दिखाता है कि इनकी नीयत में ही खोट है। इन्हें जनता की कोई चिंता नहीं है। रात के अंधेरे में एक और डिजिटल लूट की पटकथा लिख दी गई है। मोदी जी और निर्मला सीतारमण का नया नोटिफिकेशन कहता है: ₹2,000 तक यू.पी.आई. पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, मतलब ₹2000 के ऊपर हर एक ट्रांजेक्शन पर अब डकैती होगी। पैसा आपका होगा, जेबें सरकार की भरेंगी।पिछली बार जब ये ख़बर आई थी तो थोक भाव से खंडन किया गया था और अब रातो रात सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी ।

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार “बैंक 2,000 रुपए तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यू.पी.आई.) लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगा सकते. सरकार की ओर से जारी गजट अधिसूचना में रूपे डेबिट कार्ड से ₹2,000 तक के भुगतान पर भी किसी तरह का शुल्क लगाने पर रोक लगाई गई है.”अधिसूचना के मुताबिक़, “कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर कोई शुल्क नहीं ले सकता.” सरकार ने यह अधिसूचना पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत जारी की है.
अब तक यूपीआई से किसी भी किसी पेमेंट करने पर यूज़र से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाता था.ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि क्या नई अधिसूचना का मतलब यह है कि सरकार ने 2000 रुपए से ज़्यादा के यूपीआई पेमेंट पर भविष्य में चार्ज लगाने का रास्ता खोल दिया है?यह आशंका पूरी तरह बेबुनियाद भी नहीं है, क्योंकि नई अधिसूचना में साफ तौर पर 2000 रुपए तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन को नो-चार्ज कैटेगरी में रखा गया है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इससे ज़्यादा के यूपीआई पेमेंट पर अभी कोई चार्ज लगा दिया गया है. सरकार ने इस बारे में साफ़ तौर पर कुछ भी नहीं कहा है.
कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर जनता से यूपीआई पेमेंट के ज़रिए वसूली की तैयारी करने का आरोप लगाया है.पार्टी ने दावा किया है कि सरकार 2,000 रुपये से अधिक के हर यूपीआई पेमेंट पर 0.5 प्रतिशत चार्ज लगाने की योजना बना रही है.कांग्रेस का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो 5,000 रुपये के यूपीआई पेमेंट पर 25 रुपये का अतिरिक्त चार्ज देना होगा. कांग्रेस ने एक्स पर लिखा है “नरेंद्र मोदी जनता से वसूली का नया प्लान लाए हैं. अब 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई पेमेंट पर सरकार वसूली करेगी. प्लान है कि ₹2,000 से ऊपर के हर यूपीआई पेमेंट पर 0.5% चार्ज वसूला जाए. इसका मतलब है कि अगर आपने 5,000 रुपये की खरीदारी की तो 25 रुपये का चार्ज लगेगा. अगर 10,000 रुपये की खरीदारी की तो 50 रुपये वसूला जाएगा.” कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा पिछले साल 2025-26 में टोटल यूपीआई ट्रांजेक्शन था- ₹314 लाख करोड़ , जिसका 66% मतलब ₹207 लाख करोड़ ₹2000 वाले ट्रांजेक्शन से ज़्यादा था ।सरकार ने अगस्त 2026 में भी कहा था कि आम यूज़र्स के लिए यूपीआई पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा और पीटूपी (पर्सन टू पर्सन) ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे. सरकार ने यह भी कहा था कि अगर भविष्य में एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लाया जाता है तो वह सीमित संख्या में मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा.
सबसे बड़ा सवाल इस पूरे मामले का यही है कि यूपीआई पेमेंट पर कितना शुल्क लगेगा, कब लगेगा या लगेगा भी या नहीं, इसकी कोई दर इस अधिसूचना में तय नहीं की गई है.अगस्त में सरकार ने कहा था कि पीटूपी ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे.






