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‘वो गुंडा, दंगाई और लम्पट जो खुद को योगी कहता है, वो क्या शिक्षा देगा यूपी को?- नेहा बोरा

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श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली

23 दिनों तक जंतर मंतर पर छात्रों और काकरोच जानता पार्टी द्वारा आयोजित आंदोलन में  भूख हड़ताल पर बैठने वाली जेएनयू की छत्रा और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कमाल कर दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके ‘घर’ गोरखपुर में जाकर जिस साहस के साथ, जिस आक्रामक अंदाज़ में और जिन शब्दों में ललकारा है, वह बेमिसाल है। ऐसा साहस आज तक कोई नेता नहीं दिखा पाया। इन दिनों वे देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर छात्रों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठा रही हैं। इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दिए गए उनके एक बयान ने अब राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अपने बयान में नेहा बोरा ने मुख्यमंत्री के लिए “दंगाई” और “लंपट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वे उत्तर प्रदेश के छात्रों को अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते। खबर है कि उत्तर प्रदेश प्रशासन में खलबली मची हुई है और इस छात्र नेता नेहा बोरा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को लेकर विचार विमर्श शुरू हो गया है। लेकिन प्रशासन को यह भी अहसास है कि मुकदमा दर्ज करना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा जंतर मंतर पर छात्रों और काकरोच जानता पार्टी द्वारा आयोजित आंदोलन के बाद पूरे देश में घूम घूम कर जेन जी राइजिंग महाजुटान यात्रा के आयोजनों में हिस्सा ले रही हैं और छात्रों  के मुद्दों को उठा रही हैं। इसी दौरे में उनकी यात्रा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और गोरखपुर में हुई जो चर्चा का विषय बन गई। हुआ कुछ यूँ कि  बेबाकी के साथ अपनी राय रखने वाली नेहा बोरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर कुछ ऐसा बोल दिया जिसके चलते बड़ा विवाद खड़ा हो गया। नेहा बोरा ने प्रयागराज और गोरखपुर के कार्यक्रमों में योगी सरकार की बुलडोज़र कार्रवाई को उत्तर प्रदेश पर एक धब्बा बताया और इसे दलितों व अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यूपी को ‘बाबा’ योगी के बजाय डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों से चलाया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि  गोरखपुर में भाषण देते हुए आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर कहा, ‘वो गुंडा, दंगाई और लम्पट जो खुद को योगी कहता है, वो क्या शिक्षा देगा यूपी को? नेहा ने आगे कहा, ‘योगी ने गोरखपुर को दंगे और हिंसा की धरती बना दिया गया है. सड़कों पर नमाज पढ़ने में दिक्कत है. लेकिन जब थाने में जन्माष्टमी के नाम पर हुड़दंग मचाया जाता है तब कोई सवाल नहीं करता ‘। उन्होंने कहा जेन जी, जेन अल्फा और गोरखपुर का नागरिक समाज एकजुट होकर शिक्षा की बदहाली और लोकतंत्र पर चलते बुलडोजर के खिलाफ संघर्ष के लिए तैयार है। गोरखपुर की पहचान क्रांतिकारी, समता और पाखंड विरोधी रही है। यह जुटान सांप्रदायिक,जातिवादी और फासीवादी शक्तियों को स्पष्ट संदेश है आने वाला समय उनके सत्ता और समाज से उखाड़कर इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिए जाने का समय हैं। नेहा बोरा का यह बयान सामने आने के बाद लेफ्ट विंग से जुड़े लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं, जबकि राइट विंग के लोग उनके बयान को लेकर उन्हें घेर रहे हैं।

नेहा बोरा ने गोरखपुर में भाषण देते हुए आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने सीएम योगी को लेकर कहा, ‘वो गुंडा, दंगाई और लम्पट जो खुद को योगी कहता है, वो क्या शिक्षा देगा यूपी को? नेहा ने आगे कहा, ‘योगी ने गोरखपुर को दंगे और हिंसा की धरती बना दिया गया है. सड़कों पर नमाज पढ़ने में दिक्कत है. लेकिन जब थाने में जन्माष्टमी के नाम पर हुड़दंग मचाया जाता है तब कोई सवाल नहीं करता ‘इसी बात को लेकर मंगलवार को ओबीसी पार्टी (वन भारत सिटीजन पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष काली शंकर यदुवंशी, कार्यकर्ताओं के साथ कैंट थाने पहुंचे और तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उनका आरोप है कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के विरुद्ध आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही गोरखपुर की ऐतिहासिक भूमि को लेकर भी अभद्र टिप्पणी की गई। कार्रवाई न होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी। इसी मामले में विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष जनार्दन मिश्रा जे.डी. के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कैंट प्रभारी को शिकायत दी। साथ ही अधिवक्ताओं ने भी सीओ कैंट के पास शिकायत की है। संगठन ने भाषण को अभद्र और भड़काऊ बताते हुए उपलब्ध वीडियो की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की। उधर, भाजपा युवा मोर्चा पीपीगंज मंडल के अध्यक्ष आदर्श सिंह ने पीपीगंज थाने में तहरीर दी है।

जंतर मंतर पर बीस दिनों से अधिक समय तक अनशन पर बैठने वाले मनीष कुमार और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा की आवाज धीमी नहीं पड़ी है । नई पीढ़ी के इन नेताओं से आज फैजाबाद प्रेस क्लब में जिस तरह सुचिंतित और व्यवहारिक रूप से अपनी बातें रखीं उससे पता चलता है कि इनके पास भविष्य के जन संघर्षों की व्यापक कार्ययोजना है । नई पीढ़ी को रोकना अब संभव नहीं । गोरखपुर में प्रशासन ने जिस तरह नेहा और उनकी टीम को परेशान किया वह अब चलने वाला नहीं । फैजाबाद में सब कुछ शांति से हुआ । सदबुद्धि जितनी जल्दी आए उतना ही अच्छा है । राजनैतिक विकल्प के अभाव में भविष्यहीन युवा आंदोलन निहिलिज्म और अराजकता के गर्त में भी गिर सकता है । जंतर मंतर पर जुटी युवाओं की भीड़ के विवेक का काम विचारों से लैस नेहा और मनीष जैसे युवा ही कर रहे थे ।बेहतर होगा सरकारें इन युवाओं से संवाद करें दमन नहीं

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने मंगलवार को फैजाबाद प्रेस क्लब में ‘जेन-जी महाजुटान यात्रा’ का आयोजन किया. इसमें शामिल होने के लिए आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी मंगलवार (15 सितंबर) को पहुंची. इस दौरान नेहा बोरा ने प्रदेश सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि धर्म और राम मंदिर के नाम पर फैलाए गए ‘डर, हिंसा और नफरत’ का सबसे अधिक नुकसान अयोध्या-फैजाबाद के आम लोगों को हुआ है.

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अनिल सिंह ने कहा -जंतर मंतर पर बीस दिनों से अधिक समय तक अनशन पर बैठने वाले मनीष कुमार और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा की आवाज धीमी नहीं पड़ी है । नई पीढ़ी के इन नेताओं से आज फैजाबाद प्रेस क्लब में जिस तरह सुचिंतित और व्यवहारिक रूप से अपनी बातें रखीं उससे पता चलता है कि इनके पास भविष्य के जन संघर्षों की व्यापक कार्ययोजना है । नई पीढ़ी को रोकना अब संभव नहीं । गोरखपुर में प्रशासन ने जिस तरह नेहा और उनकी टीम को परेशान किया वह अब चलने वाला नहीं । फैजाबाद में सब कुछ शांति से हुआ । सदबुद्धि जितनी जल्दी आए उतना ही अच्छा है । राजनैतिक विकल्प के अभाव में भविष्यहीन युवा आंदोलन निहिलिज्म और अराजकता के गर्त में भी गिर सकता है । जंतर मंतर पर जुटी युवाओं की भीड़ के विवेक का काम विचारों से लैस नेहा और मनीष जैसे युवा ही कर रहे थे ।बेहतर होगा सरकारें इन युवाओं से संवाद करें दमन नहीं ।

फैजाबाद प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोरा ने कहा कि 1990 के दशक में शुरू हुआ ‘नफरत का अभियान’ अयोध्या को डर का केंद्र बना गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने बच्चों और युवाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया, वो आज उत्तर प्रदेश में सत्ता में हैं. बोरा ने राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक और आर्थिक लाभ के लिए किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा धर्म या मंदिरों के बजाय सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंच रहा है.

आइसा  राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दिए गए तीखे बयानों और ‘जेन-जी महाजुटान’ के दौरान की गई टिप्पणियों ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है।

मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित टिप्पणियों को लेकर गोरखपुर में एक स्थानीय राजनीतिक दल  के नेता द्वारा नेहा बोरा के खिलाफ पुलिस थाने में तहरीर (शिकायत) दी गई है, जिससे यह मामला और बढ़ गया है

वैसे इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। फिलहाल इतना जरूर है कि नेहा बोरा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में युवा और छात्र उनके कार्यक्रमों में पहुंच रहे हैं। अब देखना होगा कि इस विवाद का अगला कदम क्या होता है।

दरअसल, आइसा अध्यक्ष अयोध्या में संगठन के उत्तर प्रदेश में चल रहे ‘जेन-जी महाजुटान’ अभियान के तहत पहुंची थीं. अभियान के तहत बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय और सरकारी भर्ती परीक्षाओं तथा नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठाया जा रहा है. आइसा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष ने बताया कि अभियान बुधवार को लखनऊ पहुँचा  जहां संवाददाता सम्मेलन के बाद रायबरेली और अलीगढ़ का दौरा किया जाएगा.

उन्होंने उत्तर प्रदेश की ‘बुलडोजर न्याय’ व्यवस्था की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि जिन लोगों के घर गिराए गए, उनमें गरीब, दलित और मुस्लिम परिवारों समेत आम लोग शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ‘सत्ता का प्रतीक’ बना बुलडोजर प्रदेश के लोगों की बेबसी का भी प्रतीक है. बोरा ने कहा कि अयोध्या के लोग ‘हिंसा, नफरत और लूट’ से छुटकारा चाहते हैं.

फैजाबाद प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोरा ने कहा कि 1990 के दशक में शुरू हुआ ‘‘नफरत का अभियान’’ अयोध्या को डर का केंद्र बना गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान का नेतृत्व करने वाले लोग आज सत्ता में हैं और युवा पीढ़ी का भविष्य खराब कर रहे हैं. उन्होंने किसी संगठन या व्यक्ति का नाम लिए बिना कहा, “जिन लोगों ने आपके बच्चों को डर के अभियान का हिस्सा बनाया, वो आज आपके राज्य में सत्ता में बैठे हैं और उन्हीं बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं.”

बोरा ने आरोप लगाया कि जब भी अयोध्या और धर्म के नाम पर हिंसा व नफरत को बढ़ावा दिया गया, तब सबसे ज्यादा नुकसान फैजाबादअयोध्या के आम निवासियों को उठाना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण और राजनीतिक सत्ता हासिल करने की प्रक्रिया में जिन लोगों के घर ढहाए गए और दुकानें तोड़ी गईं, वो भी इसी शहर के आम निवासी थे.बताया जाता है कि नेहा को जान से मारने की धमकी दी गई है इस पर नेहा बोरा ने कहा जान से मारने की धमकियों के बाद हमने साफ़ कर दिया है—डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं और चुप नहीं बैठेंगे।अगर किसी ने लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों की आवाज़ उठाने वाली नेहा बोरा को धमकाया है, तो कानून अपना काम करे। धमकी देने वालों की पहचान हो, FIR दर्ज हो और नेहा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।ये सिर्फ नेहा बोरा की लड़ाई नहीं है—ये हर उस छात्र की आवाज़ की लड़ाई है जो अपने हक़ के लिए सवाल पूछता है। धमकी देने वालों को जवाब कानून देगा, और हम अपनी आवाज़ बुलंद रखेंगे। धमकियों से छात्र आंदोलन की आवाज़ नहीं दबेगी!

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