नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महानदी बेसिन में प्राकृतिक गैस की खोज को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत गैस मिलने के बाद ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) अब इस क्षेत्र में और कुओं की ड्रिलिंग करने की तैयारी में है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि घरेलू स्तर पर तेल और गैस की खोज को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पुरी ने ‘13वां वार्षिक फोरम 2026 : इंडिया 3.0 – एंगेजिंग फॉर ग्रोथ इन ए डिसरप्टेड वर्ल्ड’ के दौरान मीडिया से बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। उन्होंने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए घरेलू हाइड्रोकार्बन खोज के साथ-साथ जैव ईंधन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
महानदी बेसिन से बढ़ी उम्मीद ?
महानदी बेसिन में प्राकृतिक गैस की खोज को देश के घरेलू ऊर्जा संसाधनों के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ONGC द्वारा आगे और कुओं की ड्रिलिंग किए जाने से इस क्षेत्र में उपलब्ध गैस संसाधनों की बेहतर जानकारी मिल सकती है। यदि भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन की संभावनाएं मजबूत होती हैं, तो इससे देश की घरेलू गैस आपूर्ति को बढ़ावा मिल सकता है प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, औद्योगिक गतिविधियों और विभिन्न अन्य क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।
20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य जारी ?
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य पर कायम रहेगा। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर दबाव कम करने के साथ-साथ घरेलू जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। एथेनॉल मुख्य रूप से कृषि आधारित स्रोतों से तैयार किया जाता है। इसके उत्पादन और उपयोग में वृद्धि से किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार होने के साथ देश के ऊर्जा मिश्रण में जैव ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ग्रीन हाइड्रोजन पर भी जोर ?
भारत की ऊर्जा रणनीति में ग्रीन हाइड्रोजन को भी अहम स्थान दिया जा रहा है। सरकार का जोर इसके उत्पादन की लागत कम करने और इसे अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर है। लागत में कमी आने पर ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल परिवहन, उद्योग और अन्य ऊर्जा-गहन क्षेत्रों में बढ़ाया जा सकता है। महानदी बेसिन में ONGC की आगे की ड्रिलिंग, पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर भारत की बहुआयामी ऊर्जा रणनीति को दर्शाता है। घरेलू तेल-गैस उत्पादन के साथ वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने की कोशिश आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा जरूरतों और आयात निर्भरता को प्रभावित कर सकती है।






