भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर दुकानदारों और ग्राहकों की राय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लोकलसर्कल्स के एक सर्वे के मुताबिक, 83% दुकानदार 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित UPI चार्ज का भुगतान करने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं, बड़ी संख्या में ग्राहकों ने भी संकेत दिया है कि अगर यह अतिरिक्त खर्च सीधे उन पर डाला गया, तो वे UPI से भुगतान करना कम या बंद कर सकते हैं। सर्वे के अनुसार, 86% ग्राहकों ने कहा कि अगर दुकानदार UPI भुगतान का चार्ज उनसे वसूलते हैं, तो वे UPI का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इससे छोटे दुकानदारों और डिजिटल पेमेंट पर निर्भर कारोबारियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
दुकानदारों पर बढ़ेगा खर्च ?
UPI ने पिछले कुछ वर्षों में छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए भुगतान लेना काफी आसान बना दिया है। ग्राहक मोबाइल से कुछ सेकंड में भुगतान कर देते हैं और दुकानदार को नकदी संभालने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क कारोबारियों के लिए लागत बढ़ा सकता है।
लोकलसर्कल्स के सर्वे में शामिल दुकानदारों के बड़े हिस्से का कहना है कि वे इस अतिरिक्त लागत को अपने ऊपर लेने के लिए तैयार नहीं हैं। खासकर कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भुगतान शुल्क का असर अधिक महसूस हो सकता है।
ग्राहकों पर खर्च डालना भी आसान नहीं ?
दूसरी तरफ दुकानदार यदि UPI चार्ज ग्राहकों से वसूलने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें ग्राहकों की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। सर्वे में 86% लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में वे UPI के बजाय नकद या भुगतान के किसी दूसरे विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका सीधा असर डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या पर पड़ सकता है। सर्वे के अनुमान के मुताबिक, कुल लेन-देन के मूल्य में करीब 10% तक और भुगतान की संख्या में लगभग 4% तक कमी आ सकती है।
छोटे कारोबारियों के लिए अहम मुद्दा ?
UPI की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुविधा और व्यापक स्वीकार्यता है। चाय की दुकान से लेकर किराना स्टोर, मेडिकल शॉप, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों तक, QR कोड के जरिए भुगतान लेना आम हो चुका है। ऐसे में भुगतान से जुड़ा कोई भी अतिरिक्त खर्च सीधे कारोबारी के मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, सर्वे के आंकड़े लोगों की राय और संभावित व्यवहार को दर्शाते हैं। वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि शुल्क की व्यवस्था किस रूप में लागू होती है और दुकानदार तथा ग्राहक उसे किस तरह अपनाते हैं।
UPI के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?
भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार तेजी से हुआ है और UPI ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर शुल्क को लेकर दुकानदारों और ग्राहकों के बीच असहमति बढ़ती है, तो नकद भुगतान या दूसरे डिजिटल विकल्पों की ओर कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण संकेत यही है कि दुकानदार अतिरिक्त खर्च उठाने को लेकर असहज हैं, जबकि ग्राहक भी UPI के लिए अलग से शुल्क देने के इच्छुक नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में UPI भुगतान की लागत और उसका बोझ किस पर पड़ेगा, यह कारोबारियों और ग्राहकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।






