चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, अनुसंधान एवं नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (NCSC) के अंतर्गत दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जिला स्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन श्री अरविंदो कॉलेज में किया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों से आए बाल वैज्ञानिकों ने अपने वैज्ञानिक प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए और अपनी प्रतिभा एवं रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया। दक्षिणी दिल्ली जिले के कार्यक्रम में लगभग 40 प्रतिभागियों ने जबकि दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिले के कार्यक्रम में लगभग 65 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विज्ञान एवं अनुसंधान से जुड़े विभिन्न विषयों पर तैयार किए गए अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन उन्होंने अपने प्रोजेक्ट के उद्देश्य, कार्यप्रणाली, निष्कर्ष तथा समाज एवं दैनिक जीवन में उनकी उपयोगिता के बारे में विशेषज्ञों के समक्ष विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकारसे वैज्ञानिक डॉ. पुष्प सेन सत्यार्थी एवं वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार राय विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक परियोजनाओं का अवलोकन किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाल वैज्ञानिकों के साथ संवाद करते हुए उनके प्रोजेक्ट के संबंध में प्रश्न पूछे और उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और अपने विचारों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का अवसर मिला। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को यह समझने के लिए प्रेरित किया कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे आसपास मौजूद समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
• दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के लगभग 105 प्रतिभागियों ने लिया भाग ,• बाल वैज्ञानिकों ने दिखाया अपना हुनर , ये भविष्य के वैज्ञानिक हैं – प्रोफेसर सुमन
अरविंदो कॉलेज के प्राचार्य प्रो.अरुण चौधरी ने दोनों दिनों कार्यक्रम में उपस्थित होकर सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करते हुए इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ आत्मविश्वास, प्रस्तुतीकरण कौशल एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम की NCSC स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. अनुपमा ने पूरे आयोजन की निगरानी एवं समन्वय किया। उनके मार्गदर्शन में दोनों दिनों की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित एवं सुचारु रूप से संचालित किया गया। उन्होंने कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों, जिला समन्वयकों, प्रतिभागियों एवं अन्य सदस्यों के साथ निरंतर समन्वय करते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दक्षिणी दिल्ली के जिला समन्वयक डॉ. संयम गुप्ता ने दो दिवसीय कार्यक्रम में जिला स्तरीय कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जिला समन्वयक डॉ. महेश सिंह ने आयोजित कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान दिया। दोनों जिला समन्वयकों ने अपने-अपने जिलों से आए प्रतिभागियों एवं शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित कराया। कार्यक्रम के संयोजक के रूप में डॉ. संयम गुप्ता ने दोनों दिनों के आयोजन की व्यवस्थाओं एवं विभिन्न गतिविधियों के समग्र समन्वय को सुनिश्चित किया। उनके नेतृत्व में प्रतिभागियों के पंजीकरण, प्रोजेक्ट प्रस्तुति, मूल्यांकन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया।
अरबिंदो कॉलेज के मीडिया संयोजक प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने , रचनात्मकता , शोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए इन विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए , विज्ञान के प्रति रुचि दिखाई दी और उनमें बड़े वैज्ञानिकों जैसा बनने का जुनून है । मेरा मानना है कि ये बड़े वैज्ञानिक बनेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे । उन्होंने कहा कि इस तरह की वर्कशॉप / सेमिनार से पता चलता है कि हम विज्ञान के क्षेत्र में कितनी तरक्की कर रहे हैं । आने वाले समय में ये युवा वैज्ञानिक विकसित भारत का सपना पूरा करेंगे , साथ ही उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि विद्यालय स्तर पर युवाओं को युवा वैज्ञानिक अवॉर्ड देने की आवश्यकता है ताकि विज्ञान के क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त हो । ये भविष्य के वैज्ञानिक हैं।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के शिक्षक एवं मार्गदर्शक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने बाल वैज्ञानिकों को अपने प्रोजेक्ट तैयार करने एवं प्रस्तुत करने में मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के बीच हुआ संवाद विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इससे विद्यार्थियों को अपने वैज्ञानिक विचारों को और बेहतर ढंग से समझने तथा उनमें सुधार करने का अवसर मिला। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, रचनात्मकता, अनुसंधान की प्रवृत्ति और नवाचार की भावना को विकसित करना है। जिला स्तरीय कार्यक्रम इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण मंच है, जहां विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझते हैं और उनके समाधान के लिए अपने विचार एवं परियोजनाएं प्रस्तुत करते हैं। अरविंदो कॉलेज में आयोजित इन दोनों जिला स्तरीय कार्यक्रमों में लगभग 105 बाल वैज्ञानिकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष रूप से सफल बनाया। विद्यार्थियों के उत्साह, उनके वैज्ञानिक प्रोजेक्ट और विशेषज्ञों के साथ संवाद ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बनाया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने और भविष्य में देश के वैज्ञानिक विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना रहा।






