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पीलीभीत सदर विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी , ई.पी.आई.सी. नंबर वही हैं, लेकिन नाम बदल दिए गए

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चौथा अक्षर संवाददाता/लखनऊ

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी  राजेंद्र पाल गौतम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए कहा कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि 804 नाम सूची से हटा दिए गए।उन्होंने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के इपीआईसी नंबर और सीरियल नंबर वही रहने के बावजूद उनके नाम बदल दिए गए. उन्होंने इसको लेकर दस्तावेज़ भी दिखाए. इससे पहले लगातार समाजवादी पार्टी मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रही थी. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बदलने के इस कथित खेल से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इस बाबत कांग्रेस ने प्रदेश कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन किया जिसमे उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम,प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, मीडिया विभाग के अध्यक्ष कुंवर सिंह निषाद, वाइस चेयरमैन प्रियंका गुप्ता और प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी भी मौजूद रहे.

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के ई.पी.आई.सी. नंबर और क्रम संख्या समान रखते हुए उनके नाम बदल दिए गए। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस की मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने इन आरोपों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट से एस.आई.आर. की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और जहां-जहां यह प्रक्रिया पूरी हुई है, वहां इसकी समीक्षा कर इसे खारिज करने की मांग की है। उन्होंने मतदाताओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और सरकारी अधिकारियों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और लोगों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है।

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों में एस.आई.आर. की प्रक्रिया पूरी की और 10 अप्रैल को अंतिम ड्राफ्ट सूची जारी की गई. उनके मुताबिक, मतदाता सूची में अपना नाम, वर्तनी और ई.पी.आई.सी. नंबर सही देखकर मतदाता आश्वस्त हो गए थे कि उनकी जानकारी ठीक है. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसके बाद जुलाई से सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के आंकड़ों में बदलाव किए गए. उन्होंने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 नाम बदले गए, 804 नाम हटा दिए गए और करीब 2,600 ऐसे नाम जोड़े गए, जिनके बारे में पार्टी का दावा है कि संबंधित लोग वहां नहीं रहते. राजेंद्र पाल गौतम ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में मतदाता का ई.पी.आई.सी. नंबर और सूची में क्रम संख्या पहले जैसी ही रही, लेकिन नाम बदल दिया गया। उन्होंने दावा किया कि ड्राफ्ट सूची में किसी मतदाता का नाम रशीद था, लेकिन बाद में उसे बदलकर रफीक या अब्दुल कर दिया गया. ऐसी स्थिति में मतदाता अपने पहचान पत्र के साथ मतदान केंद्र पहुंचने पर परेशानी का सामना कर सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पहचान पत्र और सूची में दर्ज नाम का मिलान नहीं हुआ, तो संबंधित व्यक्ति अपने मताधिकार का इस्तेमाल कैसे करेगा.राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि पार्टी ने ऐसे मामलों की सूची तैयार की है, जिसमें बूथवार नाम बदलने के कथित मामलों का विवरण है. उन्होंने आशंका जताई कि अगर मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियां हुई हैं, तो इसका असर चुनाव पर पड़ सकता है. कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी है.

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और पीलीभीत सदर से विधायक संजय गंगवार का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि गंगवार पिछला विधानसभा चुनाव 6,930 वोटों के अंतर से जीते थे, जबकि कांग्रेस के दावे के मुताबिक, इसी विधानसभा क्षेत्र में 16 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम से जुड़ा मामला सामने आया है. श्रीनेत ने इस संदर्भ में मतदाता सूची में बदलाव के कथित मामलों को गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए, ताकि मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रह सकें.

सॉफ्टवेयर और डेटा एक्सेस को लेकर सुप्रिया श्रीनेत ने सीमा खन्ना का जिक्र करते हुए मतदाता सूची में बदलाव के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारियों ने शिकायत की थी कि उनके पास सॉफ्टवेयर का पर्याप्त एक्सेस नहीं है. श्रीनेत के मुताबिक, अधिकारियों ने नाम जोड़ने से जुड़े काम पूरे होने की जानकारी देने के बावजूद कुछ नामों को सूची में शामिल नहीं किए जाने की बात कही थी. कांग्रेस ने इस पूरे मामले में सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और डेटा में बदलाव की प्रक्रिया की जांच की मांग की.

कांग्रेस नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से SIR की प्रक्रिया पर संज्ञान लेने और इसे रोकने की मांग की. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से एक व्यक्ति, एक वोट के लोकतांत्रिक अधिकार पर असर पड़ सकता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाए. कांग्रेस ने मांग की कि मतदाता सूची में हुए कथित बदलावों की जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे.वहीं कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक फोटो दिखाते हुए कहा कि “ये संजय गंगवार हैं, ये पीलीभीत सदर से विधायक हैं और योगी सरकार में मंत्री हैं. इन्होंने 2022 का चुनाव सिर्फ 6,930 वोटों के अंतर से जीता था. मैं आपको इनकी तस्वीर इसलिए दिखा रही हूँ क्योंकि विधानसभा क्षेत्र संख्या 127, पीलीभीत सदर में सामने आई कथित गड़बड़ियाँ इन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ी हैं. इन्होंने चुनाव केवल 6,930 वोटों से जीता था, जबकि, जैसा कि प्रभारी ने बताया है, इस कथित हेरफेर में 16,000 से ज्यादा वोट शामिल थे.

उत्तर प्रदेश में तीन करोड़ से अधिक नाम हटने का दावा किया. सुप्रिया श्रीनेत ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में दो करोड़ चार लाख नहीं, बल्कि तीन करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में 15 करोड़ 41 लाख मतदाता होने का आंकड़ा भी पेश किया. इन आंकड़ों और नाम हटाने के दावों की पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों से मिलान जरूरी है.सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि इन गड़बड़ियों पर चर्चा करने से पहले मैं आपको दो और तस्वीरें दिखाना चाहती हूँ. ये सीमा खन्ना हैं।, ये चुनाव आयोग में टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर विभाग की प्रमुख हैं. किसी को नहीं पता कि आजकल ये कहाँ हैं. आप सभी ने ऐसी रिपोर्टें देखी होंगी जिनमें आरोप लगाया गया है कि सॉफ्टवेयर के जरिए लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, जोड़े जा रहे हैं और बदले जा रहे हैं. इसके साथ ही अन्य तरह की गड़बड़ियाँ भी हो रही हैं. आपने ऐसी रिपोर्टें भी देखी होंगी जिनमें DM, SDM, ADM और ERO ने बार-बार कहा है कि उनके पास इस सॉफ्टवेयर का एक्सेस नहीं है. वे लगातार सीमा खन्ना को एक बार में 16 या 17 ईमेल भेज रहे थे, जिसमें लिखा था, ‘हमने गोवा में इन मामलों का सत्यापन (वेरिफिकेशन) कर लिया है; कृपया इन लोगों को सूची में जोड़ दें.’ हालाँकि उन नामों को नहीं जोड़ा गया क्योंकि कथित तौर पर सीमा खन्ना ने सॉफ्टवेयर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था.”

आराधना मिश्रा बोलीं- कानूनी लड़ाई लड़ेगी कांग्रेस: कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि पार्टी की ओर से पेश किए गए मामले गंभीर हैं और मतदाता सूची में नाम काटने या बदलने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में कानूनी राय लेगी. उनके मुताबिक, राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी पहले भी मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाती रही है और इस मामले में भी विरोध जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर अपनी लड़ाई आगे बढ़ाएगा.

कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने पीलीभीत के पार्टी कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने मतदाता सूची का बारीकी से अध्ययन किया है. उनके मुताबिक, कार्यकर्ताओं की ओर से जुटाई गई जानकारी से कथित गड़बड़ियों को सामने लाने में मदद मिली है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को अदालत में भी उठाएगी. मसूद ने कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा जरूरी है और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

अखिलेश यादव ने भी चुनावी धांधली का आरोप लगाया

इस बीच, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर भाजपा और सरकारी अधिकारियों पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बेईमानी और चुनावी हेरफेर के बिना चुनाव नहीं जीत सकती। अखिलेश यादव के मुताबिक, सरकार ने अधिकारियों, विशेषकर शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को जिस तरह जिम्मेदारियां सौंपी हैं और कथित तौर पर उनका इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है, वह चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों और क्षेत्रों में चुनाव होने वाले हैं, वहां बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) मोबाइल फोन तथा फोन कॉल के माध्यम से लोगों पर दबाव बना रहे हैं। अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी चुनावी अनियमितताओं में शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ ऐसे तथ्य और सबूत जुट सकते हैं जिनके आधार पर उन्हें जेल भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तरह व्यवहार करने के बजाय निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।

अखिलेश यादव ने चुनाव आयुक्त और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे चुनावी प्रक्रिया की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि मतदाता सूची में हेरफेर या वोट चोरी न हो। उनका कहना था कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होने चाहिए तथा सरकारी अधिकारियों को किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम नहीं करना चाहिए। समाजवादी पार्टी पहले भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। कांग्रेस के ताजा आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा एक बार फिर विपक्षी राजनीति के केंद्र में आ गया है।

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का यह विवाद केवल नाम जोड़ने या हटाने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध मतदाताओं की पहचान, उनके मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया पर जनता के भरोसे से है। यदि किसी मतदाता का EPIC नंबर सही होने के बावजूद उसके सामने गलत नाम दर्ज होने की शिकायत प्रमाणित होती है, तो यह गंभीर प्रशासनिक मामला होगा। इसी तरह, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसे मतदान से वंचित होने का जोखिम हो सकता है।

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