लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ी पहल हो रही है। बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की इकाई में करीब ₹3,080 करोड़ की लागत से देश का पहला बड़े पैमाने का एकीकृत PLA बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए बेल्जियम से मंगाया गया लगभग 200 टन वजनी विशेष साइक्लाइजेशन रिएक्टर कुंभी चीनी मिल परिसर में पहुंच चुका है। इस परियोजना से न केवल पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि लखीमपुर खीरी और आसपास के जिलों में रोजगार, परिवहन, तकनीकी सेवाओं और सहायक उद्योगों के विकास के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
बेल्जियम से कैसे पहुंचा 200 टन का विशाल रिएक्टर?
बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए तैयार किया गया भारी-भरकम रिएक्टर बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा के पारादीप बंदरगाह लाया गया। इसके बाद विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रेलर की मदद से सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी तक पहुंचाया गया।
इस विशाल मशीन को सुरक्षित पहुंचाने के लिए परिवहन के दौरान विशेष इंतजाम करने पड़े। भारी ट्रेलर के रास्ते में आने वाली बिजली की लाइनों, सड़क संकेतकों और अन्य बाधाओं को ध्यान में रखते हुए मार्ग की व्यवस्था की गई। मशीन का सुरक्षित परिवहन परियोजना के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण रहा। यह रिएक्टर प्लांट की महत्वपूर्ण मशीनों में से एक है। इसकी मदद से लैक्टाइड को पॉलीलैक्टिक एसिड यानी PLA में बदलने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
गन्ने से तैयार होगा पर्यावरण के अनुकूल बायोप्लास्टिक ?
इस प्लांट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गन्ने से मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल करके बायोप्लास्टिक तैयार किया जाएगा। उत्पादन की प्रक्रिया में गन्ने की शर्करा के किण्वन से लैक्टिक एसिड बनाया जाएगा। इसके बाद उसे आगे की रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजारकर PLA के दानों में बदला जाएगा।
इस प्रकार तैयार PLA का इस्तेमाल कई उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है, जैसे:
- कप, प्लेट और गिलास
- चम्मच, कांटे और खाद्य पैकेजिंग सामग्री
- कैरी बैग और कुछ प्रकार की बोतलें
- अन्य पैकेजिंग तथा उपभोक्ता उत्पाद
PLA एक जैव-आधारित प्लास्टिक है। इसके कुछ उत्पाद निर्धारित औद्योगिक कंपोस्टिंग परिस्थितियों में जैविक रूप से विघटित हो सकते हैं। हालांकि, सभी PLA उत्पाद सामान्य मिट्टी में समान समय के भीतर नहीं गलते; इसके लिए सामग्री और निपटान की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।
सालाना 80 हजार टन उत्पादन की योजना ?
परियोजना की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता करीब 80,000 टन PLA प्रतिवर्ष है। लगभग ₹3,080 करोड़ की लागत से विकसित हो रहा यह प्लांट करीब 135 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य गन्ने से प्राप्त कच्चे माल को अधिक मूल्य वाले औद्योगिक उत्पाद में बदलना है। इससे कृषि आधारित उद्योगों को नई दिशा मिल सकती है। गन्ने और चीनी उद्योग से जुड़े कच्चे माल का उपयोग करके बायोप्लास्टिक बनाने से पारंपरिक प्लास्टिक के कुछ विकल्पों के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
आसपास विकसित हो सकता है औद्योगिक हब ?
बायोप्लास्टिक प्लांट के साथ कुंभी के आसपास औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की भी योजना है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 200 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक हब विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके आसपास उत्पाद निर्माण से जुड़ी कई इकाइयां स्थापित होने की संभावना जताई गई है। यदि यह औद्योगिक क्षेत्र विकसित होता है, तो पैकेजिंग, तैयार उत्पादों के निर्माण, परिवहन, भंडारण, मशीनों के रखरखाव और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार को अवसर मिल सकते हैं इससे लखीमपुर खीरी के अलावा सीतापुर और शाहजहांपुर जैसे आसपास के जिलों के लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों की वास्तविक संख्या और उनसे पैदा होने वाली नौकरियों का अंतिम आंकड़ा परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
स्थानीय युवाओं को मिल सकते हैं रोजगार के अवसर ?
इस परियोजना में मशीन संचालन, रासायनिक इंजीनियरिंग, तकनीकी रखरखाव, गुणवत्ता जांच और औद्योगिक प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की जरूरत हो सकती है।
प्लांट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय युवाओं के लिए भर्ती के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इच्छुक उम्मीदवार बलरामपुर चीनी मिल्स के आधिकारिक करियर पेज पर रिक्तियों की जानकारी लेकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, प्लांट के आसपास सहायक कारोबार बढ़ने से वाहन चालकों, लॉजिस्टिक्स कर्मचारियों, निर्माण श्रमिकों और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए भी अवसर बन सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को मिल सकती है गति
कुंभी में स्थापित हो रहा यह प्लांट कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और आधुनिक विनिर्माण तकनीक के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। गन्ने जैसे स्थानीय कृषि संसाधन से उच्च मूल्य वाला बायोप्लास्टिक तैयार करने की योजना से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, परियोजना का वास्तविक आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कब शुरू होता है, संयंत्र कितनी क्षमता से चलता है और तैयार PLA के लिए बाजार में कितनी मांग रहती है। कुंभी का करीब ₹3,080 करोड़ का बायोप्लास्टिक प्रोजेक्ट लखीमपुर खीरी के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक पहल है। बेल्जियम से 200 टन के विशेष रिएक्टर का पहुंचना परियोजना की प्रगति का अहम पड़ाव है। आने वाले समय में उत्पादन शुरू होने और आसपास औद्योगिक हब विकसित होने से क्षेत्र में रोजगार तथा कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।





