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बांदा जिला अधिवक्ता संघ के डी सिंह को जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान से सम्मानित किया 

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चौथा अक्षर संवाददाता/ बांदा 

बकौल सुधीर सिंह आज एक खुशनुमा दिन था जब हमारे प्रिय के डी सिंह को बांदा जिला अधिवक्ता संघ की ओर से जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान से सम्मानित किया गया । केदार जी ने जिस कचहरी परिसर में 60 साल अपनी जीविका वकालत के पेशे से पाई उसी जिला अधिवक्ता संघ के सभागार में अधिवक्ताओं एवं स्थानीय साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति में के डी सिंह को समारोहपूर्वक सम्मानित किया गया।

यह देखना भी गजब था कि वकील साहब लोगों ने जो केवल फीस लेने के लिए ही जाने जाते हैं उन्होंने बकायदे अधिवक्ता संघ की ओर से 11 हजार रुपए का चेक भी के डी सिंह को प्रदान किया। वरिष्ठ कवि केशव तिवारी एवं जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष द्वारिकेश यादव मंडेला तथा एल्डर कमेटी के अध्यक्ष राकेश सिन्हा के द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया । इस सम्मान की घोषणा गत वर्ष की गई थी आज लेखक की उपलब्धता पर यह सम्मान उन को प्रदान किया गया।

इस अवसर पर जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्षगण रणवीर सिंह चौहान, शंकर सिंह गौतम, अवधेश कुमार गुप्ता,अशोक त्रिपाठी जीतू , आनंद सिन्हा के अलावा सैयद मंजर अली , अनिल शर्मा ,  गोपाल गोयल जवाहरलाल जलज , सुनील सिंह गौतम , संजय मिश्रा  और अपन ने भी संबोधित किया । सम्मान के बाद कृतज्ञता व्यक्त करते हुए केडी सिंह ने अपने पिता और अधिवक्ता स्वर्गीय रामगोपाल सिंह की स्मृति में इस परिसर से अपने संबंधों को रेखांकित किया और अपनी एक कविता का पाठ किया। वह कविता नोट नहीं कर सका लेकिन अच्छी लगी।

कवि केशव तिवारी ने इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा की बड़ा लेखक वह होता है जो अपने आसपास की  सामान्य चीजों से संदर्भ विकसित करके उसकी सार्वभौमिकता को स्थापित करता है। सम्मान के रूप में सम्मान राशि का चेक , मान पत्र अंग वस्त्रम केडी सिंह को प्रदान किया गया। संचालन श्री रोहन सिन्हा ने किया। यह देखना भी सुख देने वाला है कि अब तक के डी सिंह की प्रकाशित पुस्तकों में शेष अगले पृष्ठ पर ( व्यंग संस्मरण) ,  हाशिए पर ( व्यंग संग्रह), लिखना न था कुछ (कविता एवं गजल संग्रह),होते करते ( व्यंग) , एतद द्वारा (व्यंग), कंधे ( उपन्यास), अलकनंदा (उपन्यास), जब जिंदगी मुस्कुरा दी (संस्मरण),छलकत जाए घट (व्यंग),सड़क सुरक्षा : एक सामाजिक अध्ययन,अनहोनी होवे नहीं, होनी होय सो होय (जीवनी),जब मन होगा तब बोलूंगा ( कविता संग्रह),अगला पृष्ठ ( व्यंग संस्मरण), तिरहार (आंचलिक कथा संग्रह), दुनिया से आश्ना (यात्रा वृतांत) और भोला भेलपूरी (लघु उपन्यास) शामिल हैं। इन सभी में गजब की पठनीयता है जो साहित्य के बाहर की दुनिया के पाठकों को भी अपने साथ जोड़ती हैं।

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