इंडोनेशिया अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार ने देश में एथेनॉल उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गन्ने की खेती का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की योजना बनाई है। यह कदम भविष्य में पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इंडोनेशिया में फिलहाल E20 कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में कम से कम 20 प्रतिशत पौधों से निर्मित एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार अब इससे आगे बढ़कर अधिक एथेनॉल मिश्रण की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में E50 जैसे उच्च ब्लेंडिंग लक्ष्य पर भी चर्चा हो रही है।
गन्ने की खेती बढ़ाने पर जोर !
इंडोनेशिया के खाद्य मामलों के समन्वय मंत्री जुलकिफ्ली हसन के मुताबिक, देश में एथेनॉल की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए गन्ने का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। मौजूदा गन्ना उत्पादन केवल गन्ने पर आधारित एथेनॉल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। सरकार इसलिए नए क्षेत्रों में गन्ने की खेती बढ़ाने और मौजूदा बागानों की उत्पादकता सुधारने पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य एथेनॉल उद्योग को घरेलू स्तर पर स्थिर कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
सिर्फ गन्ने पर निर्भर नहीं रहेगा देश ?
एथेनॉल उत्पादन के लिए इंडोनेशिया केवल गन्ने पर निर्भर रहने की योजना नहीं बना रहा है। मंत्री ने कसावा (Cassava) जैसी दूसरी फसलों के इस्तेमाल की संभावना भी बताई है। कसावा कई देशों में एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रमुख फसलों में शामिल है। इससे इंडोनेशिया के पास एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के कई विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं और किसी एक फसल पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सकती है।
E50 लक्ष्य क्यों महत्वपूर्ण है?
E20 का मतलब है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित किया जाता है। इसी तरह E50 में पेट्रोल के साथ 50 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य होगा। यदि इंडोनेशिया भविष्य में इस स्तर तक पहुंचता है, तो एथेनॉल की मांग मौजूदा स्तर की तुलना में काफी बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में गन्ने और अन्य एथेनॉल-उत्पादक फसलों का उत्पादन बढ़ाना सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो जाएगा। साथ ही किसानों, चीनी उद्योग और जैव ईंधन क्षेत्र के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गन्ने का रकबा बढ़ाने की योजना से कृषि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसके साथ जमीन के इस्तेमाल, खाद्य फसलों की उपलब्धता, पानी की जरूरत और किसानों को उचित कीमत जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे।
सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के साथ खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों के बीच संतुलन कायम रखा जाए।
इंडोनेशिया का E20 से आगे बढ़कर ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग की दिशा में सोचना उसकी ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। घरेलू स्तर पर कच्चा माल तैयार होने से देश आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर सकता है। गन्ने का विस्तार, कसावा जैसी वैकल्पिक फसलों का इस्तेमाल और एथेनॉल उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी—ये तीनों कदम इंडोनेशिया की भविष्य की बायोफ्यूल रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से बन सकते हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि देश E20 से आगे बढ़कर E50 जैसे उच्च ब्लेंडिंग लक्ष्य को किस गति से लागू करता है।






