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इंसानियत को झकझोर देने वाली निशा विश्वकर्मा के साथ हुई दर्दनाक घटना,पुलिस प्रशासन दबंगों के साथ, ग्रामप्रधान की गुंडागर्दी , पत्थर बाजी से पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा सहित तमाम लोग घायल

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चौथा अक्षर संवाददाता/ गाजीपुर

गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के धर्मपुर कटरिया गाँव में निशा विश्वकर्मा के साथ हुई इंसानियत को झकझोर देने वाली दर्दनाक घटना जहाँ  विश्वकर्मा समाज की एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की निशा विश्वकर्मा को ब्रह्मणों के दबंग मनचले लड़कों हरिओम पांडेय , अभिषेक पाण्डेय  और उसके साथियों ने उसको घर से उठा लिया और सबने मिल कर पहले उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर उसकी लाश को गंगा नदी के किनारे फेंक दिया | घटना के बाद दबंगों ने 5 दिनों तक पुलिस में प्राथमिकी FIR तक नहीं दर्ज होने दी | परिवार और अन्य लोगों के तमाम कोशिशों के बाद पांचवें दिन जाकर पुलिस ने प्राथमिकी FIR दर्ज की और उसमे भी लीपापोती करनी शुरू कर दी | बताया जाता है कि बेहद दुखद और चिंताजनक बात यह है कि रात 10 बजे पुलिस प्रशासन पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर न्याय दिलाने के बजाय समझौता करने का दबाव बना रहा था। इस मामले में स्थानीय ग्राम प्रधान आशु सिंह ने अपराधियों को बचाने और मामले को दबाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया और  मुनादी कर दी की गांव में पीड़ित परिवार से मिलने आने वाले प्रतिनिधि को बलात्कार जैसे शब्द नहीं लिखने होंगे तभी उसे गाँव में घुसने दिया जाएगा|  इसी घटना के संदर्भ में जब  पीड़ित परिवार से मिलने गए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा एवं प्रतिनिधि मंडल पर वहां के प्रधान आशु सिंह और उसके समर्थकों द्वारा पुलिस की मौजूदगी में  पथराव कर दिया जिससे  राम आसरे विश्वकर्मा सहित तमाम लोग घायल हो गए |

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पोस्टमार्टम होने के बावजूद 5 वें  दिन जाकर मुकदमा दर्ज  हुआ, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है — क्या इस बेटी को भी न्याय मिलेगा, या यह मामला भी दबा दिया जाएगा? जिस तरह की लीपा पोती की जा रही है बार बार तहरीर को बदलवाया जा रहा है यहाँ तक कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के भी बदले जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है क्यों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है

अब निशा विश्वकर्मा को न्याय मिलेगा या नहीं न्याय मिलेगा यह तो मामला अदालत पर हो गया है। यही नहीं सामाजिक रूप से तमाम लोग अब घटना को अलग दिशा में ले जाने का काम कर रहे हैं  कोई सरकार के ईसारे पर काम कर रहा है कोई तलवे चाटने के रूप में काम कर रहा है , कोई समाज की बेटी में ही कमी निकाल रहा है, बेशर्मी की हद पार हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि पुलिस भी अपराधियों की हाँ में हाँ मिला रही है पुलिस की मौजूदगी में ही पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे लोगों के साथ हाथापाई, मारपीट हो रही है और अह सब वहाँ का स्थानीय प्रधान आशु सिंह करा रहा है. बताया जाता है कि आशु सिंह का भाजपा में वरिष्ठ लोगों से घनिष्ठ संबंध है |

यही नहीं उसने पहले से ही पुलिस को तहरीर दे रखी है कि विभिन्न दलों के लोगों को गाँव में आने से रोका जाय  उसका कहना है कि पीड़ित परिवार भी प्रशासन की कार्यवाही से संतुष्ट है । जब की ऐसा बिल्कुल नहीं है | पीड़ित परिवार बहुत दबाव में है |

जिस समय इस घटना की कवरेज बसावन इंडिया का  एक स्थानीय पत्रकार कर रहा था उसपर मुकदमा दर्ज कर लिया गया| ऐसे संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सपा प्रतिनिधिमंडल पर सत्ता संरक्षित गुंडों द्वारा पथराव होना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। इस हमले में पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा सहित कई लोगों का घायल होना साफ दर्शाता है कि प्रदेश में कानूनव्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं बची है। जब न्याय की आवाज उठाने वालों को ही हिंसा का सामना करना पड़े, तो यह सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

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