भारत में लाखों घरों में सोना सालों से अलमारी या बैंक लॉकर में रखा रहता है। यह सोना इमरजेंसी में तो काम आता है, लेकिन जब तक यह यूं ही पड़ा रहता है तब तक इससे कोई कमाई नहीं होती। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme – GMS) शुरू की थी। इस स्कीम का उद्देश्य लोगों के निष्क्रिय सोने को बैंकिंग सिस्टम में लाकर उस पर ब्याज दिलाना और देश में सोने के आयात को कम करना है।
गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत आप अपने पास मौजूद सोने को बैंक में जमा कर सकते हैं। सबसे पहले आपको सरकार द्वारा अधिकृत प्योरिटी टेस्टिंग सेंटर (BIS Center) जाना होता है, जहां आपके सोने की शुद्धता की जांच की जाती है। जांच के बाद सोने का वजन और कैरेट तय किया जाता है और फिर बैंक में जमा करने की प्रक्रिया पूरी होती है। इसके बदले बैंक आपको Gold Deposit Certificate जारी करता है।
इस स्कीम में निवेश करने पर आपको ब्याज मिलता है, जो बैंक और अवधि के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। यह ब्याज सोने के ग्राम में भी मिल सकता है या रुपये में भी, यह बैंक की शर्तों पर निर्भर करता है। निवेश अवधि मुख्य रूप से शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म में होती है।
मैच्योरिटी पर क्या मिलेगा?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि मैच्योरिटी के समय आपको वही पुराने गहने वापस नहीं मिलते। क्योंकि बैंक सोने को पिघलाकर गोल्ड बार या कॉइन में बदल देता है। मैच्योरिटी पर आपको सोने के वजन के अनुसार सोना या उसकी कीमत मिलती है। इसलिए यदि किसी के लिए भावनात्मक रूप से जुड़ी ज्वेलरी महत्वपूर्ण है तो उसे यह स्कीम सोच-समझकर चुननी चाहिए।
मान लीजिए आपने 100 ग्राम सोना जमा किया और बैंक ने 2.5% सालाना ब्याज दिया। तो एक साल बाद आपका सोना लगभग 102.5 ग्राम के बराबर हो जाएगा। यानी बिना कुछ किए आपका सोना बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो सोने को सिर्फ निवेश के रूप में देखते हैं और उसे सुरक्षित रखकर उस पर ब्याज कमाना चाहते हैं। यह स्कीम घर में पड़े निष्क्रिय सोने को कमाई का साधन बना सकती है।






