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तमिलनाडु गवर्नर के रवैये पर सवाल!

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आर के जैन 
टीवीके प्रमुख विजय ने गुरुवार सुबह गवर्नर राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की। विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करने की वजह से राज्यपाल के बर्ताव की आलोचना हो रही है।
वही दूसरी तरफ डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने साफ शब्दों में कहा है कि विजय की सरकार बनने दी जाए। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और तमाम विश्लेषकों ने राज्यपाल के रवैए पर हैरानी जताई है।
एआईएडीएमके ने अपने विधायकों को पुड्डुचेरी के एक रिसॉर्ट में भेज दिया है।
मिली सूचना के अनुसार, राज्यपाल ने विजय से शपथ ग्रहण से पहले 118 विधायकों का समर्थन पेश करने को कहा। सरकार की स्थिरता पर जोर दिया और यह सुनिश्चित करने की बात कही कि सरकार न गिरे। गवर्नर और विजय की मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली।
विजय को क्यों नहीं बुलाया जा रहाः एमके बेबी, सीपीआईएम महासचिव
CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी ने भी कहा है कि “टीवीके को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुना गया है। तमिलनाडु के राज्यपाल विजय को अपना दावा पेश करने के लिए क्यों नहीं बुला रहे हैं? इससे काफी संदेह पैदा होता है। तमिलनाडु के राज्यपाल को लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करना चाहिए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी टीवीके का समर्थन करेगी, तो उन्होंने कहा, “मेरी पार्टी डीएमके गठबंधन का हिस्सा है, और वे राय बनाने के लिए बैठक कर रहे हैं, जिस पर अगले 24 घंटों में फैसला लिया जाएगा।
वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने कहा है कि “राज्यपाल को विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से पहले उनसे 118 सीटों का पूर्ण बहुमत साबित करने के लिए कहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें पहले मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालना चाहिए, क्योंकि यह जनता का जनादेश है। उसके बाद विधानसभा में बहुमत साबित करना उनकी जिम्मेदारी बनती है।
पीटीआई के मुताबिक थिरुमावलवन ने कहा कि मैं राज्यपाल से अनुरोध करता हूं वे टीवीके अध्यक्ष जोसेफ विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें, क्योंकि यह जनता का जनादेश और उनका संवैधानिक अधिकार दोनों है।
विजय ने वीसीके और वामपंथी दलों से भी धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने में समर्थन देने का अनुरोध किया है। उनके अनुरोध के आधार पर, हम समर्थन देने के गुण-दोषों पर चर्चा करेंगे और फिर तय करेंगे कि उन्हें समर्थन देना है या नहीं। लेकिन मेरी राय में, चूंकि यह जनता का जनादेश है, इसलिए उन्हें सरकार का कार्यभार संभालना चाहिए।”
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने स्पष्ट रूप से कहा कि “विजय को सरकार बनाने दीजिए, हम कोई संवैधानिक संकट नहीं चाहते।” इस बीच डीएमके विधायकों की बैठक बुलाई गई है। जिसमें आगे की रणनीति तैयार होगी। डीएमके ने स्पष्ट कहा है कि वो सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाने को तैयार है।
राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर की विजय से मुलाकात के बाद, एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने भी उनसे मिलने का समय मांगा है। एआईएडीएमके ने टीवीके को दोपहर 1 बजे तक गठबंधन पर फैसला लेने का समय भी दिया है।
एआईएमडीएमके ने विजय को विकल्प दिया है कि वो सारे दलों को छोड़कर उसके साथ सरकार बनाए। लेकिन कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि अगर विजय ने बीजेपी की सहयोगी दल के साथ सरकार बनाई तो वो टीवीके से समर्थन वापस ले लेगी।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि टीवीके के 108 विधायक निर्वाचित हुए हैं और कांग्रेस के समर्थन से यह संख्या बढ़कर 113 हो जाएगी। राज्यपाल भाजपा के पूर्व नेता हैं और हम जानते हैं कि भाजपा विजय को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहती।
तमिलनाडु में टीवीके प्रमुख विजय द्वारा राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विजय ने बहुमत हासिल करने के लिए समय मांगा है। टीवीके के पास फिलहाल 108 विधायक हैं। कांग्रेस ने 5 विधायकों के साथ टीवीके को समर्थन दिया है। राजनीतिक अनिश्चितता ने सभी पार्टियों के बीच पर्दे के पीछे की बातचीत को तेज कर दिया है।
डीएमके की प्रमुख सहयोगी वीसीके गुरुवार शाम तक अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। दलबदल के डर से एआईएडीएमके के 15 से अधिक विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में ले जाया गया है। संख्या बल की लड़ाई जारी रहने के बावजूद, शुक्रवार को चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में विजय के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां चल रही हैं।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता पी. शषमुगम ने कहा कि विजय ने पार्टी का समर्थन मांगने के लिए पत्र भेजा है। उन्होंने बताया कि सीपीएम की तमिलनाडु राज्य समिति जल्द ही इस मुद्दे पर चर्चा करने और सरकार गठन के संबंध में अपना अंतिम निर्णय लेने के लिए बैठक करेगी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने और तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का अवसर देने का आग्रह किया है।
पार्टी ने कहा कि 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, टीवीके को सरकार बनाने का अवसर दिया जाना चाहिए, और इसके लिए उसने एस. आर. बोम्मई फैसले सहित सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला दिया।
तमिलनाडु में सरकार गठन पर वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंहवी ने कहा- “मुझे बड़े खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि राज्यपाल, जो संवैधानिक ज्ञान के भंडार माने जाते हैं, उनके पास तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है। वास्तव में, कानून, परंपरा, संवैधानिक संस्कृति और संवैधानिक स्वरूप के अनुसार, ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है। साथ ही, किसी अन्य दल ने तो दावा भी नहीं किया है।
सीटों की कमी केवल 7-8 सीटों की है, और राज्यपाल हमेशा यही कहते रहेंगे कि सदन में 10-12 दिनों में बहुमत साबित हो जाएगा। तो फिर समस्या क्या है? संवैधानिक मानदंडों और परंपराओं का इस तरह से उल्लंघन या उन्हें कमजोर करना बेहद निंदनीय है, और मैं यह बात बड़े खेद के साथ कह रहा हूं। यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था…।”
अब लग रहा है कि बीजेपी बैंक डोर से तमिलनाडु की सत्ता हासिल करने के चक्कर में है। विजय यदि बीजेपी की सहयोगी एआईएडीएमके से गठबंधन नहीं करता है तो फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाएगा और विजय के पीछे ED , CBI और इनकम टैक्स वालो को लगाया जाएगा । आखिर कब तक बचेगा ।
आर के जैन 
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