बुंदेलखंड की धरती से एक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है। सुमेरपुर ब्लॉक क्षेत्र के बंडा गांव की बेटी नैंसी ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 34वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार, गांव और जिले को गर्व से भर दिया है। जैसे ही इस उपलब्धि की खबर गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर और एक-दूसरे को बधाई देकर इस सफलता का जश्न मनाया।
नैंसी के पिता चेतराम अहिरवार सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी बेटी की इस सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि नैंसी बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेहनती और अनुशासित रही है। उन्होंने बताया कि नैंसी ने हमेशा बड़े लक्ष्य तय किए और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की। परिवार ने भी हर कदम पर उसका साथ दिया और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
नैंसी की शुरुआती पढ़ाई लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) से हुई है। वहीं से उसने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्राप्त की। स्कूल के समय से ही नैंसी पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी सक्रिय रूप से भाग लेती रही। इसके बाद उसने कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उसने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और उसी दिशा में अपनी तैयारी शुरू कर दी।
नैंसी ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए एक सख्त दिनचर्या अपनाई। वह रोजाना कई घंटे पढ़ाई करती थी और विषयों की गहराई से समझ विकसित करने पर ध्यान देती थी। नैंसी का मानना है कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने के लिए निरंतरता, अनुशासन और धैर्य बेहद जरूरी होते हैं। उसने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया और अन्य व्यर्थ गतिविधियों से दूरी बनाए रखी और पूरी तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रही।
इससे पहले वर्ष 2024 में भी नैंसी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। उस समय उसका चयन भारतीय रेल प्रबंधन सेवा (Indian Railway Management Service) में हुआ था। हालांकि नैंसी का सपना सिविल सेवा में उच्च रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा में जाना था, इसलिए उसने अपनी तैयारी जारी रखी और एक साल बाद शानदार सफलता प्राप्त की।
नैंसी की इस उपलब्धि से बंडा गांव और आसपास के इलाकों में गर्व का माहौल है। गांव के लोगों का कहना है कि अब वे गर्व से कह सकते हैं कि उनके गांव की बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास कर दिखाया है। ग्रामीणों का मानना है कि नैंसी की सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और गांव के बच्चे भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित होंगे।
नैंसी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों को दिया है। उसने कहा कि परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन के बिना यह सफलता संभव नहीं थी। नैंसी का कहना है कि यदि किसी के पास स्पष्ट लक्ष्य हो और वह पूरे समर्पण के साथ मेहनत करे, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
आज नैंसी की सफलता न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गर्व की बात बन गई है। उसकी उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि लगन और मेहनत हो तो छोटे गांवों से निकलकर भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचा जा सकता है।






