रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में बैंक की Fixed Deposit यानी FD कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए एक उपयोगी विकल्प हो सकती है। एकमुश्त रकम जमा करके निवेशक तय अवधि तक ब्याज कमा सकता है और बैंक के नियमों के अनुसार मासिक, तिमाही या सालाना ब्याज लेने का विकल्प चुन सकता है। अगर लक्ष्य FD से हर महीने करीब ₹10,000 की कमाई करना है, तो जरूरी निवेश राशि ब्याज दर पर निर्भर करेगी। उदाहरण के लिए 8% सालाना ब्याज की दर पर ₹15 लाख की FD से सालाना करीब ₹1.20 लाख ब्याज बन सकता है, यानी औसतन ₹10,000 प्रति माह की सकल ब्याज आय। हालांकि वास्तविक भुगतान बैंक की गणना और चुने गए पेआउट विकल्प के अनुसार अलग हो सकता है।
₹10,000 मासिक ब्याज के लिए कितना निवेश जरूरी?
हर निवेशक के लिए जरूरी रकम ब्याज दर के हिसाब से बदलती है। यदि FD पर 6% ब्याज मिलता है, तो सालाना ₹1.20 लाख ब्याज कमाने के लिए करीब ₹20 लाख निवेश की जरूरत होगी। वहीं 7% ब्याज पर लगभग ₹17.14 लाख और 8% ब्याज पर करीब ₹15 लाख की जमा राशि पर्याप्त हो सकती है। इससे पता चलता है कि ब्याज दर जितनी ज्यादा होगी, उतनी ही कम पूंजी से समान ब्याज आय हासिल की जा सकती है। हालांकि केवल अधिक ब्याज दर देखकर FD चुनने के बजाय बैंक की विश्वसनीयता, अवधि और समय से पहले पैसा निकालने के नियमों को भी देखना चाहिए। FD की सबसे बड़ी खासियत इसका अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर निवेश होना है। शेयर बाजार की तरह इसमें रोजाना कीमतों में उतार-चढ़ाव नहीं होता। यही कारण है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित कैश फ्लो चाहने वाले लोग FD को पसंद करते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को कई बैंक सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज भी देते हैं, जिससे उनकी ब्याज आय कुछ ज्यादा हो सकती है। हालांकि अलग-अलग बैंकों की दरें और शर्तें अलग होती हैं।
FD पर टैक्स और TDS का भी रखें ध्यान ?
FD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। लागू आयकर नियमों के अनुसार ब्याज आय पर टैक्स लग सकता है और कुछ परिस्थितियों में बैंक TDS भी काट सकता है। इसलिए ₹10,000 मासिक ब्याज को पूरी तरह हाथ में मिलने वाली रकम नहीं मानना चाहिए। निवेश से पहले अपनी कुल आय और लागू टैक्स नियमों को ध्यान में रखकर वास्तविक रिटर्न का अनुमान लगाना जरूरी है। इसके अलावा महंगाई को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज ₹10,000 की मासिक आय पर्याप्त लग सकती है, लेकिन समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमत बढ़ने पर इसकी खरीद क्षमता कम हो सकती है। इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग में पूरी रकम सिर्फ FD में लगाने के बजाय अपनी जरूरत, जोखिम क्षमता और भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर संतुलित रणनीति बनाना बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, 8% ब्याज दर पर ₹15 लाख की FD से करीब ₹10,000 मासिक सकल ब्याज आय संभव है, लेकिन अंतिम आय टैक्स, TDS और बैंक की भुगतान शर्तों पर निर्भर करेगी।






