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भारत में E100 की दिशा में बढ़ता कदम, फीडस्टॉक की चुनौती भी बढ़ी ?

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नई दिल्ली: भारत पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने के बाद अब अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में 100% एथेनॉल यानी E100 पर चलने वाली कार को लेकर चर्चा तेज हुई है। अक्टूबर में टोयोटा की इनोवा के संभावित लॉन्च की खबरों के बाद भारत में E85 और E100 ईंधन को लेकर नई संभावनाओं पर बहस शुरू हो गई है।

भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण यानी E20 को बढ़ावा देकर एथेनॉल के लिए एक बड़ा घरेलू बाजार तैयार किया है। इससे गन्ने और अन्य कृषि स्रोतों से बनने वाले एथेनॉल की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है। अब सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों का फोकस इससे आगे के मिश्रण पर हो सकता है।

E85 और E100 क्या है?

E85 ईंधन में करीब 85% एथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है, जबकि E100 में पूरी तरह एथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, ऐसे ईंधन का उपयोग करने के लिए सामान्य पेट्रोल वाहनों की तुलना में अलग तकनीकी जरूरतें होती हैं।

अगर भारत में E85 या E100 को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो केवल ईंधन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए ऐसे वाहन, इंजन तकनीक, स्टोरेज सिस्टम और फ्यूल स्टेशन नेटवर्क की जरूरत होगी जो ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन को संभाल सकें।

सबसे बड़ी चुनौती होगी एथेनॉल की उपलब्धता ?

एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के साथ सबसे बड़ा सवाल इसकी पर्याप्त उपलब्धता का है। E20 के मुकाबले E85 या E100 के लिए कहीं अधिक मात्रा में एथेनॉल की जरूरत पड़ेगी।

एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के अलावा मक्का, टूटे चावल और अन्य फीडस्टॉक का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में मांग बढ़ने पर पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।

फीडस्टॉक की उपलब्धता सीधे कृषि उत्पादन, पानी की जरूरत, खाद्य उपयोग और किसानों की आय जैसे मुद्दों से भी जुड़ी हुई है। इसलिए एथेनॉल की मांग बढ़ने के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने के अलावा टिकाऊ फीडस्टॉक व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी होगा।

वाहनों और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बदलाव जरूरी ?

भारत में E100 की दिशा में आगे बढ़ने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल और एथेनॉल-अनुकूल वाहनों की संख्या बढ़ानी होगी। साथ ही पेट्रोल पंपों पर ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी।

ऑटो कंपनियों के लिए भी इंजन तकनीक, माइलेज, प्रदर्शन और वाहन की कीमत के बीच संतुलन बनाना एक अहम मुद्दा रहेगा। E20 ने भारत में एथेनॉल के लिए एक मजबूत बाजार बनाने में भूमिका निभाई है। लेकिन E85 से E100 तक पहुंचने के लिए केवल लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं होगा। एथेनॉल उत्पादन, फीडस्टॉक, वाहन तकनीक, फ्यूल स्टेशन और उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता—इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।

भारत के लिए अधिक एथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू कृषि संसाधनों के उपयोग का एक रास्ता हो सकता है। हालांकि, इसके विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश बढ़ती एथेनॉल मांग के लिए पर्याप्त और टिकाऊ आपूर्ति किस तरह सुनिश्चित करता है।

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