भारत के लोकप्रिय यूट्यूबर सौरव जोशी ने हाल ही में अपनी लग्जरी कार की माइलेज और परफॉर्मेंस को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले उनकी मर्सिडीज कार लगभग 17 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती थी, लेकिन अब यह घटकर करीब 5 किलोमीटर प्रति लीटर रह गई है। सौरव ने इस गिरावट के पीछे इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को संभावित कारण बताया और कहा कि इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
सौरव जोशी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई लोगों ने उनके अनुभव का समर्थन किया, जबकि कुछ ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वाहन की माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करती। इंजन की स्थिति, ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, टायर प्रेशर, सर्विसिंग और मौसम जैसे कई अन्य कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। ऐसे में केवल इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को जिम्मेदार ठहराना तकनीकी रूप से उचित नहीं माना जा सकता।
क्या इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से सचमुच घटती है माइलेज?
विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। यही वजह है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से कुछ वाहनों में माइलेज में मामूली कमी देखी जा सकती है। हालांकि यह गिरावट आमतौर पर बहुत अधिक नहीं होती। यदि किसी वाहन की माइलेज अचानक 17 से घटकर 5 किलोमीटर प्रति लीटर हो जाए, तो इसके पीछे इंजन में खराबी, सेंसर की समस्या, फ्यूल सिस्टम में गड़बड़ी या अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वाहन की विस्तृत जांच कराना जरूरी होता है।
भारत सरकार लंबे समय से इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना है। वर्तमान में देश के कई हिस्सों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति की जा रही है। सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि आधुनिक वाहन निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किए जाते हैं और वे तय सीमा तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ सुरक्षित रूप से चल सकते हैं।
सौरव जोशी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय पर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ वाहन मालिकों ने भी माइलेज कम होने की शिकायतें साझा की हैं, जबकि कई लोगों ने बताया कि उन्हें इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि किसी वाहन की माइलेज में अचानक बड़ी गिरावट दिखाई दे, तो सबसे पहले अधिकृत सर्विस सेंटर में तकनीकी जांच करानी चाहिए। साथ ही वाहन निर्माता कंपनी की ईंधन संबंधी गाइडलाइन का पालन करना भी आवश्यक है। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चर्चा जारी है, लेकिन किसी एक अनुभव के आधार पर सभी वाहनों के लिए समान निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।






