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सरकार की संवेदना मर चुकी है,  सोनम वांगचुक जियें या मरें उसे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ेगा 

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 श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली/छायाकार -आशीष कार/आर बी यादव 

       शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को सुधारने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर  अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी  का आंदोलन लगातार पिछले 25 दिनों से जारी है और इसी के साथ जंतर मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सोनम वांगचुक और आइसा के विद्यार्थियों के आमरण अनशन का आज 18 वां दिन है . अनशन के चलते दो युवाओं को पहले ही अस्पताल पहुंचाना पड़ा है  और सोनम का वजन भी अब तक 8:5 किग्रा गिर गया है.  उनकी हालत बहुत गंभीर है लेकिन इस सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही है, उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है, सरकार पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर गई है. कोई जिए या मरे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है.  गौरतलब है कि नीट का पेपर लीक हो जाने के बाद 20 से ज़्यादा बच्चों ने आत्महत्या कर ली है  लेकिन सरकार की सेहत पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा. सरकार ने अभी तक धर्मेंद्र प्रधान का न तो इस्तीफ़ा लिया है और न ही लेने का कोई संकेत दिख रहा है. यह वही मोदी सरकार है जिसने 750 किसानों की शहादत होने के बाद तब जाकर कानून वापस लिया. आप सभी को याद होगा जीडी अग्रवाल 111 दिनों तक गंगा की सफाई को लेकर अनशन पर बैठे रहे खाना पीना छोड़ दिया भूख प्यास से मर गए, लेकिन सरकार ने उफ़ तक नहीं की। सरकार संवेदनहीन हो गई है उसकी संवेदना मर चुकी है, इस अलोकतांत्रिक सरकार से लड़ने के लिए आमरण अनशन नहीं, देश के हर हिस्से में युवाओं को सड़क से संसद तक आंदोलन करना होगा . और अब यही  सोनम वांगचुक कर चुके हैं  उन्होंने लोगों से  20 जुलाई को संसद मार्च में सबको शामिल होने का आवाहन किया है।

उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार जारी है, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सोनम वांगचुक और  आइसा के विद्यार्थियों के आमरण अनशन लगातार आज 18 वें दिन भी जारी  है,सोनम वांगचुक की  हालत लगातार गंभीर होती जा रही है और उनका वजन 9 किलोग्राम तक गिर गया है।उनकी सेहत बिगड़ रही है, चलने-फिरने में तकलीफ हो रही है और ब्लड प्रेशर भी कम हो रहा है. डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं. लेकिन इस सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सोनम वांगचुक एक समय मोदी जी के एक बड़े प्रशंसक हुआ करते थे और वे  मार्च 2014  के आम चुनाव में मोदी जी को वोट देने की अपील कर रहे थे और अच्छे दिन आने की बात कह रहे थे आज वही सोनम वांगचुक इस सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ अनशन पर बैठे हुए है शायद उन्हें यह पता नहीं है वह सरकार जा चुकी है जो अन्ना हजारे के 11 वें दिन उनकी सभी मांगे मान कर उनका अनशन तुड़वा दिया था लेकिन अब वो समय जा चुका है और वो सरकार भी जा चुकी है जिनपर अनशनो का फर्क पड़ता था अब तो ऐसे लोग सत्ता में है चाहे लाशो का ढेर लग जाए उनके कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती । कृषि कानून को लेकर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल 133 दिन भूख हड़ताल पर बैठे रहे , 750 किसानों की मौत हो गई तब जाकर क़ानून वापस लिया वह भी चुनावी फायदे के लिए. जब उनपर इनका दिल नहीं पसीजा तो सोनम वांगचुक किस खेत की मूली हैं .  प्रधानमंत्री विदेश का दौरा करने में व्यस्त हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ पूरा देश पेपर लीक,राम मंदिर चंदा चोरी , पेट्रोल में एथनॉल की मिलावट, ज़मीन घोटाला, चावल घोटाला, दवाइयों के घोटाले जैसे मुद्दों से जूझ रहा है.

यह सरकार कितनी असंवेदनशील है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों मूसलाधार बारिश में जब अभिजीत दीपके प्रदर्शन स्थल पर बारिश से बचने के लिए तिरपाल ला रहे थे तो पुलिस उसे अंदर नहीं लाने दे रही थी कह रही थी ऊपर से आदेश नहीं है  यहाँ तक कि वे दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के पैरों पर गिर पड़े और कहा कि ‘ जब वो मर जाएंगे तभी आपको तसल्ली मिलेगी।’ पूरा मामला सोनम वांगचुक  और छात्रों के भूख हड़ताल से जुड़ा है। जहां वो प्रदर्शन कर रहे हैं, उस जगह पर तिरपाल लगाया जाना था । इसे ही हटाने के लिए पुलिस कह रही, जिसके बाद अभिजीत दीपके पुलिस अधिकारी से उलझते नजर आए।

उधर दूसरी तरफ़ सोनम वांगचुक की बिगड़ती हालत को देखते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे, महुआ मोइत्रा, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अरुंधति रॉय समेत कई हस्तियों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है. यह आंदोलन सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है. इसमें परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य की लड़ाई शामिल है. सरकार अगर जल्दी छात्रों और आंदोलनकारियों से बात करती है तो स्थिति सुधर सकती है.

सिर्फ वांगचुक ही नहीं वहां प्रदर्शन कर रहे आईसा के नेहा, मनीष और उनके दोस्तों को भी बचाने की जिम्मेदारी सरकार की है. जब आईसा के छात्र नेताओं ने भूख हड़ताल शुरू की थी तब वो छह थे. अब वहां तीन बचे हैं. तीन अस्पताल पहुंच गये. ये छात्र किसलिये अपना जीवन दांव पर लगा रहे हैं? शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ.  तो इसमें गलत क्या है ? सोचने की बात है जुलाई की इस उमस भरी गर्मी में  बिना एसी के जब आप एक दिन नहीं बिता सकते उस समय वहां पेड़ के नीचे पिछले 18 दिनो से लगातार तक भूख हड़ताल करना आसान काम नहीं है

अभिनेता प्रकाश राज, पंजाबी गायक काका (रविंदर सिंह), संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के प्रतिनिधिमंडल, असम जातीय परिषद के युवा प्रकोष्ठ तथा कई शिक्षाविदों और नागरिक समाज संस्थाओं के सदस्यों ने भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों के प्रति समर्थन जाहिर किया। कॉजपा संस्थापक दीपके ने कहा कि ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने उन्हें फोन कर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी ली। दीपके के अनुसार, दोनों नेताओं ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई और 20 जुलाई को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च को अपना समर्थन भी दिया।

जंतरमंतर पर 20 जून को शुरू हुए इस विरोधप्रदर्शन को विपक्षी दलों के कई नेताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों की कई हस्तियों का समर्थन मिल चुका है। प्रदर्शन स्थल का दौरा करने वालों में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (आप) का एक प्रतिनिधिमंडल, सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष शामिल हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद अमरा राम, पार्टी की वरिष्ठ नेता सुभाषिनी अली, केरल सरकार में मंत्री रह चुकी केके शैलजा, थॉमस आइजैक, केएन बालगोपाल और पी राजीव तथा त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य जितेंद्र चौधरी और शिवसेना (उबाठा) सांसद अरविंद सावंत ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया है।

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