सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने एक प्रेस कांफ्रेंस में चुनाव आयोग से कुछ कड़े सवाल पूछे. उन्होंने कहा, “आप बता नहीं रहे हैं कि क्या मीटिंग हुई, कब मीटिंग हुई.””वोट का अधिकार हमसे छीना जा रहा है”
प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में कल देश के कुछ प्रमुख अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफ़नामे के हरेक पहलू की पड़ताल की. हलफनामे में चुनाव आयोग ने अपने अनेक गलत, असंवैधानिक और अज्ञात प्रक्रिया के तहत लिये फैसलों के बारे में सफाई के तौर पर जो बातें कही हैं, प्रेस कांफ्रेंस में इनका ब्योरेवार पर्दाफाश हुआ. प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद अंजलि भारद्वाज, योगेन्द्र यादव, नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और अमृता जौहरी आदि शामिल हुए।
इन विशेषज्ञों ने चुनाव आयोग के हलफनामे पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिन कुछ बुनियादी मुद्दों को सामने रखा, चुनाव आयोग के लिए सुप्रीम कोर्ट में उनका जवाब देना बहुत मुश्किल है! वह जो भी जवाब देगा; उसमें और फंसता जायेगा!
स क्लब ऑफ़ इंडिया में हुई प्रेस वार्त में चुनाव आयोग के हलफ़नामे का कच्चा चिट्ठा रखा गया जिसमें प्रशांत भूषण जी, अंजलि भारद्वाज और नेहा बोरा शामिल हुए।जिसमे चुनाव आयोग से 7 सवाल किए गए –
1. SIR का फैसला किसने लिया ?
2. फॉर्म 6 में चुनाव आयोग ने कैसे बदलाव किया ?
3. ERO की पॉवर चुनाव आयोग ने दिल्ली के IT डिविजन को क्यों दे दी ?
4. पश्चिम बंगाल में 16 लाख केस किसने और किस आधार पर दायर किए?
5. ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ का सॉफ्टवेयर और प्रोसेस पब्लिक क्यों नहीं?
6. क्या फॉर्म-7 बल्क (एक साथ भारी संख्या में) फाइल किया जा सकता है?
7. SIR की फाइनल लिस्ट के बाद भी फॉर्म-8 क्यों और कैसे भरे जा रहे हैं?
(इन सात सवालों को X पर अपनी टिप्पणी में योगेंद्र यादव ने सूत्रबद्ध किया है






