• दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों के शिक्षकों के लिए न्याय मार्च का आयोजन ।• शिक्षक कुलपति कार्यालय से दिल्ली के उपराज्यपाल तक न्याय मार्च निकालेंगे
चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ( डूटा ) ने दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में लंबे समय से काम कर रहे अस्थाई/ तदर्थ शिक्षकों को नियमित कराने की मांग को लेकर बुद्धवार 23 सितम्बर 2026 को न्याय मार्च का आयोजन किया जा रहा है । यह न्याय मार्च उन शिक्षकों के लिए है जो लंबे समय से अस्थाई , तदर्थ रूप में कार्य कर रहे हैं । शिक्षक पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के गेट नंबर एक पर 10 :30 बजे एकत्रित होंगे , शिक्षक यहाँ से न्याय मार्च करते हुए दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल को एक पिटीशन / ज्ञापन देकर शिक्षकों के लिए न्याय की मांग करेंगे और इन कॉलेजों में भी शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू हो की मांग की जाएगी । डूटा द्वारा कॉलेजों में जाकर शिक्षकों से मिल रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने की अपील की जा रही है ।
नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ( एनडीटीएफ ) बुद्धवार को हो रहे न्याय मार्च में बड़ी संख्या में भाग लेगा , उनकी टीम दिल्ली सरकार के कॉलेजों में जाकर शिक्षकों से भारी संख्या में पहुंचने की अपील कर रहे हैं । फ्रंट के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार भागी ने दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों के संदर्भ में बताया है कि शिक्षण पदों की स्वीकृति, मौजूदा अस्थायी शिक्षकों के रेगुलराइजेशन तथा रिक्त शिक्षण पदों को भरने के मुद्दे पर NDTF द्वारा निम्नलिखित तर्क रखे जाएंगे । रेगुलराइजेशन की प्रक्रिया शिक्षकों की गरिमा और आजीविका की सुरक्षा से जुड़ी हुई है, जिसमें अन्य कर्मचारियों की तरह सभी लाभ जैसे मातृत्व अवकाश, एलटीसी, इंक्रीमेंट, प्रमोशन आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये कॉलेज पिछले एक दशक से अधिक समय से संकट झेल रहे हैं, जिससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है तथा शिक्षक और छात्र दोनों पीड़ित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में इन कौशल एवं अधिगम आधारित कॉलेजों से कोई उत्पादक परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती, जो सभी बाधाओं के बावजूद देश के कई अन्य कॉलेजों की तुलना में बेहतर रैंकिंग बनाए रखें हुए हैं ।
प्रोफेसर भागी का कहना है कि अब दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में अस्थायी नियुक्तियों (ad-hocism) और लंबित प्रमोशनों को पुरानी बात बना दिया गया है, तो यह दुखद है कि ये 12 कॉलेज स्थायी शिक्षण स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं और कुल शिक्षण स्टाफ में लगभग 50% गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्य कर रहे हैं हैं। उनका मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रावधानों के अनुसार स्थायी नियुक्तियाँ आवश्यक हैं, इसलिए इन कॉलेजों को दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य सभी कॉलेजों के समान लाभ प्राप्त करने का अधिकार है। इतना ही नहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) 1986 ने स्पष्ट रूप से मौजूदा संस्थानों को मजबूत करने पर जोर दिया गया था, न कि नई कॉलेजों के माध्यम से केंद्र की जिम्मेदारियों को बढ़ाने पर। इसने केंद्र सरकार को वित्त पोषण से हतोत्साहित किया। इसके परिणामस्वरूप दिल्ली सरकार को इन कॉलेजों को 100% वित्तीय और पूंजीगत अनुदान प्रदान करने पड़े, जबकि शैक्षणिक संबद्धता, सेवा शर्तें और प्रशासन दिल्ली विश्वविद्यालय के अधीन हैं । उन्होंने यह भी बताया है कि यह व्यवस्था दो दशकों से अधिक समय तक सुचारू रूप से चलती रही, लेकिन 2015 में तत्कालीन आप सरकार ने इन 12 कॉलेजों को गंभीर वित्तीय संकट में धकेल दिया। तत्कालीन सरकार का नीतिगत हमला इतना गंभीर था कि अंततः इन कॉलेजों के लगभग सभी पद अस्वीकृत घोषित कर दिए गए और सभी नियुक्तियाँ अवैध बता दी गईं। आप सरकार ने वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया, लेकिन बार-बार हुई वैधानिक ऑडिट में इन दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला। इससे यह स्पष्ट होता है कि फंडिंग में कटौती वित्तीय कुप्रबंधन के कारण नहीं, बल्कि नीतिगत निर्णय के कारण की गई थी।
प्रोफ़ेसर भागी ने बताया है कि इनमें से अधिकांश कॉलेज दिल्ली में भाजपा की सरकार के दौरान 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू किए गए थे और 100% वित्त पोषण की व्यवस्था उसी समय सुनिश्चित की गई थी। इसलिए NDTF की मांग है कि वर्तमान दिल्ली सरकार इन 12 कॉलेजों को पूर्ण वित्त पोषित दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में स्थायी नियुक्तियाँ तुरंत शुरू करे, जो DOPT के आरक्षण नीति (SC/ST/OBC/EWS एवं PWBD) के अनुसार होनी चाहिए । उन्होंने 2010 से 2025 तक कांग्रेस और आप के कुशासन के कारण इन कॉलेजों में 15 वर्षों से चली आ रही स्थायी नियुक्तियों की समस्या को हल करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया । प्रोफेसर भागी ने दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग दोहराई है और कहा है कि
एनडीटीएफ अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार भागी का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेकर शिक्षक आंदोलन को मजबूत करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है । शिक्षकों के इन मुद्दों को लेकर हमारी सामूहिक आवाज है, इस न्याय मार्च के माध्यम से हम अपनी ताकत दिखाने और अपने मुद्दों को हल कराने के लिए जा रहें हैं ।उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में न्याय मार्च में शामिल हों और इसे शिक्षक एकता और इरादे से प्रदर्शन को सफल बनाएं ।






