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⁠ महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू व भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  से डॉ. भीमराव अम्बेडकर को विश्व रत्न की उपाधि से सम्मानित करने की अपील

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राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री यूएनओ को पत्र लिखकर डॉ.अम्बेडकर को विश्व रत्न की उपाधि देने की मांग करें — प्रो.सुमन

            फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ( शिक्षक संगठन ) ने महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू व भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर को विश्व रत्न की उपाधि से सम्मानित कराने के लिए निवेदन किया है कि वे युनाइटेड नेशन आर्गनाइजेशन ( UNO ) को पत्र लिखें जिसमें आधुनिक भारत के निर्माता, बहुजन समाज के महानायक, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत, अर्थशास्त्री, शिक्षाशास्त्री, विधिवेत्ता, पत्रकार व बहुमुखी प्रतिभा के धनी ज्ञान ज्योति डॉ.भीमराव अम्बेडकर को विश्व रत्न की उपाधि से सम्मानित करने की मांग की जाए।

                फोरम के चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में बताया है कि फोरम दिल्ली विश्वविद्यालय में पिछले 35 वर्षो से कार्य कर रहा है। समय-समय पर बहुजन समाज के महानायकों के विषय में केंद्र सरकार व राज्य सरकारों को उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों से परिचित कराता रहा है। आपको यह पत्र विनम्रता पूर्वक प्रस्तुत कर यह अनुरोध किया जा रहा है कि राष्ट्र और मानवता के प्रति बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के अद्वितीय योगदान को स्वीकारते हुए उन्हें ” विश्व रत्न ” जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत किया जाए। प्रोफेसर सुमन ने आगे बताया है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर न केवल भारतीय संविधान के निर्माता थे बल्कि एक दूरदर्शी, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, शिक्षाशास्त्री, पत्रकार, विधिवेत्ता और समानता, सामाजिक न्याय तथा मानवाधिकारों के प्रबल पक्षधर भी थे। वंचित समुदायों के उत्थान के लिए उनके अथक प्रयास से आज देश में समानता का भाव बना हुआ है। लोकतांत्रिक एवं समावेशी भारत के निर्माण के लिए उनके प्रयास का परिणाम है कि दुनिया के अन्य देशों के लिए भारत एक आदर्श लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है।

              प्रोफेसर सुमन का कहना है कि हमारे संविधान में उल्लिखित महत्वपूर्ण मूल्य—स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय—डॉ. भीमराव अम्बेडकर के ज्ञान और दूरदर्शिता को परिलक्षित करता है। स्वच्छ राष्ट्र के निर्माण, महिलाओं के अधिकारों, श्रम सुधारों, शिक्षा और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। इसलिए उन्हें ” विश्व रत्न ” की उपाधि से सम्मानित करना यथोचित है। बेहतर राष्ट्र-निर्माण के लिए उनके विचारों को विश्व के दूसरे देशों द्वारा अपनाया जाता रहा है। इससे उन्हें वैश्विक प्रतिष्ठा मिली और विश्व के सभी विकसित देशों में उनकी मूर्ति स्थापित की गई है। उन्हें मानवता के आदर्श रूप में स्वीकार किया गया है। उनके अनुसार उन्हें ज्ञान ज्योति कहा गया। उनके लेख और विचार विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं। उनके नाम पर ( डॉ.अम्बेडकर पीठ , डॉ.अम्बेडकर चेयर ) स्थापित की गई है , तथा विश्वविद्यालयों / कॉलेजों में डॉ.अम्बेडकर शिक्षा केंद्र खोले गए हैं जिसमें उनकी शिक्षाओं , विचारों व दर्शन को पढ़ाया जाता है । डॉ. भीमराव अम्बेडकर का चिंतन एक आदर्श समाज की विरासत है जहाँ जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमा बद्धता नहीं है, वहाँ सिर्फ मानवतावादी आदर्श रूप स्वीकार किया गया है। उनकी स्थापनाएँ केवल भारत में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में सामाजिक न्याय और समतावादी समाज के लिए निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। उनके द्वारा निर्मित भारतीय संविधान एक मानवतावादी दस्तावेज है, इसे विश्व के श्रेष्ठ संविधान के रूप में मान्यता प्राप्त है। उन्हें “विश्व रत्न” से सम्मानित करने पर पूरी दुनिया में उनके प्रशंसक और उन्हें आदर्श मानने वाले देशों द्वारा सहर्ष स्वीकार किया जाएगा।

            राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने यह भी बताया है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की विरासत जाति, धर्म और क्षेत्र की सीमाओं से परे है। उनके विचार और शिक्षाएँ न केवल हमारे राष्ट्र को, बल्कि संपूर्ण विश्व को सामाजिक न्याय और संवैधानिक नैतिकता की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन कराती हैं। उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए विश्व रत्न सम्मान देना उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप है। भारत के नागरिकों और दुनिया भर में फैले उनके प्रशंसकों द्वारा इसे सहर्ष स्वीकार किया जाएगा। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की विरासत को विश्व स्तर पर 100 से अधिक देशों में मान्यता प्राप्त है। कई देशों में प्रति वर्ष उनकी जयंती मनाई जाती है। उनका बौद्धिक प्रभाव अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, हंगरी, दक्षिण अफ्रीका और कनाडा सहित कम से कम 13 देशों में स्थापित प्रतिमाओं, चित्रों और विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की गई उपाधियों के रूप में दृष्टिगोचर होता है।

            प्रोफेसर सुमन ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा भारत और समग्र मानवता के प्रति किए गए उनके योगदान के लिए, राष्ट्र की विशेष कृतज्ञता और सम्मान स्वरूप, उन्हें विश्व रत्न का सम्मान प्रदान करने के लिए विचार किया जाए। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में, फोरम पुनः आपसे यह भी अनुरोध करता हैं कि आप इस विषय को संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) को अग्रेषित करने की कृपा करें और डॉ. भीमराव अम्बेडकर को विश्व रत्न सम्मान प्रदान किए जाने हेतु अपनी सशक्त अनुशंसा प्रस्तुत करें। उन्होंने बताया है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर को विश्वरत्न की उपाधि से सम्मानित करने पर भारत की छवि विश्व मेंउ भरेगी।

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