मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। खासकर तेल और गैस की सप्लाई को लेकर कई देशों में चिंता बढ़ गई है। भारत में भी रसोई गैस सिलेंडरों की संभावित कमी को लेकर लोगों के बीच चिंता देखने को मिली। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि कुछ जगहों पर अफवाहों और जमाखोरी के कारण स्थिति गंभीर दिखाई दे रही है।
सरकार ने साफ किया है कि गैस की सप्लाई बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक रास्ते अपनाए गए हैं। खाड़ी क्षेत्र से आने वाली सप्लाई में अस्थायी बाधा के बावजूद भारत ने अन्य देशों से तेल और गैस मंगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई भी की जा रही है।
सप्लाई बनाए रखने के लिए नए रास्ते ?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर खतरा बढ़ गया था। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस सप्लाई रूट्स में से एक है। इस रास्ते में रुकावट की आशंका को देखते हुए भारत ने वैकल्पिक देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाने का फैसला किया।

सरकार ने अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से तेल और एलपीजी की अतिरिक्त खेप मंगाने की व्यवस्था की है। इससे भारत के ऊर्जा भंडार को स्थिर रखने में मदद मिल रही है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ भारतीय जहाजों ने ईरान के सहयोग से होर्मुज रूट से भी सफलतापूर्वक यात्रा पूरी की है, जिससे सप्लाई में संतुलन बना हुआ है।
इसके अलावा तेल कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्टोरेज और वितरण व्यवस्था को मजबूत रखें, ताकि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती ?
सरकार ने यह भी माना है कि कुछ क्षेत्रों में गैस सिलेंडरों की कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है। इस पर रोक लगाने के लिए कई राज्यों में छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में प्रशासनिक टीमों ने गैस गोदामों और डिस्ट्रीब्यूटरों पर जांच शुरू कर दी है।
जमाखोरी करने वालों और कालाबाजारी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई डीलर या एजेंसी गैस सिलेंडरों को छिपाकर ज्यादा कीमत पर बेचने की कोशिश करती है, तो उसके लाइसेंस को भी रद्द किया जा सकता है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर स्टॉक न करें और अफवाहों पर भरोसा न करें।
सरकार की हाईलेवल निगरानी ?
स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक हाईलेवल कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी देशभर में एलपीजी सप्लाई, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की निगरानी कर रही है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि गैस कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे कमर्शियल सिलेंडरों के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा उपलब्ध कराएं, जिससे होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में रुकावट न आए।
इसके अलावा देश के प्रमुख बंदरगाहों पर आने वाली ऊर्जा सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है। जहाजों की आवाजाही और कस्टम क्लियरेंस प्रक्रिया को भी तेज किया गया है ताकि गैस और तेल की खेप जल्दी से जल्दी बाजार तक पहुंच सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ वर्षों में काफी तैयारी की है। देश के पास पर्याप्त रणनीतिक भंडार और विविध आयात स्रोत हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र में संकट होने पर भी सप्लाई पूरी तरह प्रभावित नहीं होती। सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि देश में रसोई गैस की सप्लाई सामान्य बनी हुई है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आने वाले समय में भी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।






