चौथा अक्षर संवाददाता/कोटा, राजस्थान
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज (17 जून 2026) कोटा के दशहरा मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ महारैली में छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि “भारत की शिक्षा प्रणाली हमारे बच्चों पर अत्यधिक दबाव डालती है, उन्हें तनाव देती है और उन्हें कुचल देती है, जो देश के लिए बिल्कुल सही नहीं है”।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की वर्तमान व्यवस्था बच्चों के सपनों का सम्मान नहीं करती है। कोटा में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों पर अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है। करियर विकल्पों की कमी और छात्र आत्महत्याओं को शिक्षा प्रणाली की विफलता बताते हुए सुधार की मांग की।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बुधवार को कोटा के दशहरा मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं और विद्यार्थियों की आवाज को सामने लाने का मंच है।
राहुल गांधी ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी यह है कि हम बच्चों के मनचाहे विकल्पों और सपनों की इज्जत नहीं करते। उन्होंने सभी से मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को इस तरह के मानसिक दबाव से न गुजरना पड़े। उन्होंने कहा कि यदि देश के छात्र सफल होंगे, तभी भारत सफल होगा। हर एक छात्र की रक्षा और सहायता करना भारत का कर्तव्य है।
कोटा पहुंचने पर राहुल गांधी ने हाल ही में परीक्षा रद्द होने और अवसाद के कारण आत्महत्या करने वाले नीट (NEET) अभ्यर्थियों (उमेश माली और रिया) को याद किया।उन्होंने कहा कि इन 22-23 साल के युवाओं को अपने सपनों की उड़ान भरनी थी, लेकिन वे इस अन्यायपूर्ण और भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ गए। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि नीट (NEET) पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधली, देरी और बेरोजगारी से जुड़े युवाओं के हर मुद्दे को वे सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से उठाएंगे। राहुल गांधी ने कहा कि हर पेपर लीक और रद्द परीक्षा युवाओं के सपनों पर एक सीधा प्रहार है। कोटा से शुरू हुआ यह ‘शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ’ आंदोलन अब देशभर में फैलेगा, जिसके अगले चरण प्रयागराज, पटना और दिल्ली में आयोजित किए जाएंगे।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत करते हुए कहा, “… हमारी शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी यह है कि हम अपने बच्चों के सपनों को पूरा नहीं करते हैं। वे जो विकल्प चाहते हैं, हम उनकी इज्जत नहीं करते हैं… अगर आप सफल होते हैं तो भारत सफल होगा। भारत का यह कर्तव्य है कि हम हर एक भारतीय व्यक्ति और छात्र की रक्षा करें… भारत की शिक्षा प्रणाली हमारे बच्चों पर दबाव डालती है और यह देश के लिए सही नहीं है…”
लोकसभा में लीडर ऑफ अपोजिशन राहुल गांधी ने कहा- वह डॉक्टर बनना चाहती थी. उसने नीट का एग्जाम दिया था, लेकिन पेपर लीक हो गया. उसके पिता पैरालाइज हैं. मैंने उनसे बात की थी. आकांक्षा सिस्टम से हार गई. राहुल गांधी बोले- केंद्र सरकार पांच मंत्रालयों के बजट में जितना खर्च करती है, उतना पैसा 5 एग्जाम से निकाल लेती है.
राहुल गांधी ने टेलीग्राम बैन करने पर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पेपर लीक रोकने का नया नुस्खा है. चोर को पकड़ने की जगह यह पीड़ित के घर ही ताला लटका देने जैसा है. जबकि टेलीग्राम से स्टूडेंट्स नोट्स, टेस्ट सीरीज और डिस्कशन के साथ-साथ तैयारी करते हैं. यह सुविधा विद्यार्थियों की छीन गई है. उन्होंने सवाल उठाया है कि यह क्या फूल प्रूफ सिस्टम और समाधान है. जब यह फूल प्रूफ सिस्टम नहीं है. परीक्षा के दिन विद्यार्थियों की जेब चेकिंग से लेकर कैंची से कपड़े काट दिए जाते हैं. उन्होंने एयरपोर्ट से प्रश्न पत्र भेजने को भी दिखावा बताया है. राहुल गांधी का रहा है कि बीमारी की जड़ पेपर लीक माफिया है और यह सरकार के देखरेख में फूल रहा है.
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं के सामने करियर के सीमित विकल्प क्यों हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर अधिकांश छात्र डॉक्टर या इंजीनियर ही क्यों बनना चाहते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी बेहतर अवसर मौजूद हैं। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा का सुसाइड नोट दिखाते हुए कहा कि यह किसी छात्र की असफलता नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली छात्रों पर अत्यधिक दबाव डालती है, जिससे वे तनाव और मानसिक परेशानी का सामना करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था बच्चों को आगे बढ़ाने के बजाय कई बार उन्हें दबाने का काम करती है, जो देश के भविष्य के लिए चिंताजनक है। राहुल गांधी ने छात्रों की आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। मंच पर मौजूद छात्रों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और शिक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल किए। साथ ही पूछा कि यदि उन्हें अपनी पसंद का करियर चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिले, तो वे वास्तव में क्या करना चाहेंगे।
राहुल गांधी के दौरे को लेकर सचिन पायलट भी कोटा पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री पायलट का सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं में स्वागत किया. इसक दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली और परीक्षा का व्यवस्था से लाखों बच्चे और परिवार शिकार हो गए हैं. नीट पेपर लीक से 22 लाख बच्चों से धोखा हुआ और उनका विश्वास टूट गया है. सीबीएसई ने कॉपी की चेकिंग की उसमें भी प्रॉब्लम आई है. लगातार जवाब देने से भागने का काम सरकार कर रही है. सीबीआई की जांच जारी है, लेकिन अभी तक शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया है, ना ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई है.
राहुल गांधी ने अभियान चालू किया है, यह देश की भावना से जुड़ा हुआ है. अपना भविष्य ढूंढ रहे देश के नौजवान और परीक्षाओं में मेहनत परिवार का पेट काटकर बच्चों को पढ़ा रहे परिवार संकट से गुजर रहे है. इस व्यवस्था ने राजस्थान समेत पूरे देश में कई नौजवानों को आत्महत्या करने पर मजबूर किया गया है. इस व्यवस्था के विरुद्ध में नौजवान छात्रों से संवाद करने, रिस्पांसिबिलिटी और अकाउंटेबिलिटी तय करने के लिए राहुल गांधी ने मुहिम छेड़ी है. उसकी पहल कोटा से होने जा रही है. बड़ी संख्या में कोटा में बच्चे पढ़ते हैं. साथ ही जो युवा भविष्य के बारे में चिंतित थे, उनसे संवाद करेंगे. सोई हुई सरकार हर जुर्म से मुंह फेर रही है. कोटा में राहुल गांधी के कार्यक्रम में बच्चों को नहीं भेजने का दबाव बनाया जा रहा है, दूसरी तरफ पोस्टर बैनर भी हटाए जा रहे हैं.
भारतीय राष्ट्रीय छात्र कांग्रेस (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी कोटा पहुंचे . उन्होंने राहुल गांधी के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार कोई नेता इस तरह से छात्रों के मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा रहा है. उसकी शुरुआत कोटा से हो रही है. पेपर लीक चलते कई बच्चों ने आत्महत्या कर ली है, इसके साथ ही उनकी मेंटल हेल्थ भी खराब हो गई है. यहां तक कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ गई है. इन सब मुद्दों पर ही राहुल गांधी बच्चों से चर्चा करेंगे। सरकार काफी बच्चों को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन हजारों की संख्या में बच्चे आने वाले हैं.






